चंडीगढ़ . हींग लगे न फिटकरी और रंग भी चोखा…पंजाब में निजी थर्मल प्लांटों के मामले में कांग्रेस सरकार पर यह कहावत सिद्ध होने वाली है। फिर चाहे मामला निजी थर्मल प्लांटों से होने वाले प्रदूषण का हो या फिर इनके साथ हुए विवादित बिजली समझौतों का। इन दोनों मामलों को लेकर अब कांग्रेस के नेता आरपार की लड़ाई के मूड़ में नजर आ रहे हैं।

कांग्रेसी नेता इस बात को जानते हैं कि बेशक यह समझौते पिछली सरकार द्वारा किए गए हों, लेकिन इनका खामियाजा मौजूदा सरकार को भी भुगतना पड़ रहा है। सरकारी खजाने को लगने का करोड़ों रुपये का चूना हो। इन सब मामलों को लेकर मंगलवार को पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच एक मीटिंग होगी। यह मीटिंग जाखड़ ने तय की है। ताकि सीएम से इन बिजली समझौतों को लेकर बात की जाए और किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकें। इस मीटिंग में इन बिजली समझौतों और इससे होने वाले प्रदूषण से परेशान लोगों की आवाज उठाई जाएगी।

तलवंडी साबो थर्मल प्लांट की राख से बीमार हुए लोगोंे का दर्द भी बताएंगे जाखड़

सुनील जाखड़ की आज सीएम से मुलाकात होनी है। जाखड़ तलवंडी साबो के अपने दौरे का विस्तृत ब्यौरा सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के सामने रखेंगे। दौरे के दौरान जाखड़ ने बहुत से लोगों से मुलाकात की थी। वे लोग वे थे जो थर्मल प्लांट की राख के कारण बीमार हो रहे हैं। जाखड़ बताएंगे कि कैसे थर्मल प्लांट की राख लोग बेबस किए हुए है। क्षेत्र में बीमारियां बढ़ नहीं हैं। यहां तक कि जानवर भी उसके प्रभाव में हैं, क्योंकि उनके चारे में भी थर्मल की राख मिल रही है। वे सीएम से मांग करेंगे कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर राज्य में निजी थर्मल प्लांट्स पर दो साल के लिए रोक लगाई जाए ताकि लोगों में बढ़ती बीमारियों को रोका जा सके। इसके साथ ही वे विभिन्न कंपनियों से किए बिजली समझौतों को भी तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। इससे पंजाब के लोगों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी प्रदूषण को लेकर हुआ सख्त
पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से इन विवादित बिजली समझौतों को रद्द किए जाने को लेकर विपक्ष द्वारा कांग्रेस सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन कानूनी पेचीदगियों के चलते सरकार इन समझौतों को रद्द नहीं कर पा रही है। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन थर्मल प्लांटों पर प्रदूषण यंत्र लगाने को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अगर थर्मल प्लांट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेशों की पालना नहीं करते है तो इनको बंद करने की नौबत भी आ सकती है। 

नेता और अधिकारी दे चुके हैं अपने सुझाव
कांग्रेसी नेताओं की कई मैराथन मीटिंग होने के बाद इन थर्मल प्लांटों पर कार्रवाई को लेकर सहमति बनी है। इस समस्या को लेकर कुछ दिन पहले भी जाखड़ ने अपना पक्ष रखते हुए इन थर्मल प्लांटों पर कार्रवाई की मांग की थी। जिसमें सीधे तौर पर इनको बंद करने की मांग की गई थी। वहीं सरकार के एक उच्च अधिकारी ने भी इन थर्मल प्लांटों पर कार्रवाई करने को एसवाईएल के मुद्दे की ही तर्ज पर प्रस्ताव लाने की मांग की थी। 

आप भी सरकार पर साध चुकी है निशाने
आम आदमी पार्टी की ओर से भी सरकार से इन बिजली समझौतों को रद्द किए जाने को लेकर कई बार निशाना साध चुके है। आप विधायक एवं बिजली मामलों में माहिर अमन अरोडा भी सरकार को इस बारे में कई सुझाव दे चुके हैं। जिसमें इस मामले को अदालत ले जाने की भी मांग कर चुके हैं। क्योंकि सूबे की आर्थिक हालात ऐसे ही पतली है और अगर सूबा इन थर्मल प्लांटों के समझौतों से बच जाए तो सरकार को हर साल करोड़ों रुपये की बचत होगी।

घोटाले से ध्यान हटाने के लिए जाखड़ की ड्रामेबाजी: चंदूमाजरा 

थर्मल प्लांटों को लेकर अकाली दल भी आक्रामक मूड में आ गया है। अकाली दल ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ से कहा कि वह तलवंडी साबो थर्मल प्लांट द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के बारे में लोगों को मूर्ख न बनाएं क्योंकि उसकी सरकार ने प्रदूषणरोधी उपकरण लगाने की सिफारिश करके इस प्लांट का अतिरिक्त समय बढ़ाया था। प्रोफेसर चंदूमाजरा ने कहा कि यह दूसरी बार जब जाखड़ ने 4100 करोड़ रुपए के बिजली घोटाले से ध्यान हटाने के लिए ड्रामेबाजी की है।

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