अफजल मामले पर मनमोहन ने तोड़ा मौन, शिंदे से जवाब-तलब

नई दिल्ली। संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने से पहले उसके परिवार वालों को सूचना नहीं दे पाने से खुद प्रधानमंत्री भी नाखुश हैं। इसको लेकर सरकार की कई संगठन आलोचना कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अफजल के परिवार वालों को सूचित करने में देरी के मुद्दे को लेकर गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से नाराजगी जताई है।

जिस गोपनीय ढंग से उसे फांसी दी गई और उसे पुनर्विचार याचिका दायर करने के अधिकार से वंचित किया गया उस पर बुधवार को वामदलों ने भी सवाल उठाया। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने शिंदे को कहा है कि तिहाड़ जेल में शनिवार को अफजल को फांसी देने से पहले उसके परिवार वालों को सूचित किया जाना चाहिए था। राष्ट्रपति भवन में मंगलवार को राज्यपालों के सम्मेलन में मुलाकात के दौरान मनमोहन ने शिंदे से नाराजगी जताई। उन्होंने शिंदे से कहा, आतंक पर सख्ती पूरी तरह ठीक है लेकिन गुरु के परिवार को सूचना देने में जिस तरह विलंब हुआ उस तरह देश नहीं चलता। सरकार ने स्पीड पोस्ट के जरिए गत शुक्रवार को कश्मीर के सोपोर में रह रहे गुरु के परिवार को उसे फांसी दिए जाने की सूचना दी थी। वह पत्र फांसी दे दिए जाने के 51 घंटे बाद सोमवार को उसके परिवार को मिला।

प्रधानमंत्री ने पत्र के जरिए उसके परिवार को सूचित करने को अपवाद माना। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस युग में पत्र के जरिए अफजल के परिवार को सूचित करने की कटु आलोचना की है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने भी आलोचना करते हुए कहा कि दया याचिका खारिज करने की जानकारी अफजल और उसके परिवार को नहीं दी गई। उसे इस मुद्दे पर अदालत जाने का समय भी नहीं दिया गया। उसके परिवार वालों को उसके आखिरी समय में उससे मिलने का मौका भी नहीं दिया गया। भाकपा के मुखपत्र में भी इसकी आलोचना की गई है।

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