अमित के फिर ‘शाह’ बनने पर BJP हेडक्वार्टर्स में था सहमा-सा सेलिब्रेशन

नई दिल्ली. पहली नजर में देखकर कोई भी कहेगा कि रविवार को अमित शाह के दोबारा बीजेपी प्रेसिडेंट बनने पर दिल्ली के अशोका रोड पर शादी-सा जश्न था। नाच-गाना, खाना, आतिशबाजी सबकुछ था। लेकिन असलियत में ये मुंह दिखाई रस्म थी। दस्तूर के मुताबिक शाह दोबारा बिना विरोध प्रेसिडेंट चुने जाने थे। इसलिए इस धूम धड़ाके के बीच भी ऐसा लग रहा था मानों दूल्हे या दुल्हन में से एक राजी न हो और जबरन शादी करवाई जा रही हो।
एक गाना बजा और आडवाणी-जोशी की चर्चा होने लगी…
– कभी कभार इस दफ्तर का रुख करने वाले कई सारे वीवीआईपी यहां आने थे। रेड कारपेट पर अवॉर्ड फंक्शन सी एंट्री हो रही थी। बाहर सोकॉल्ड कार्यकर्ता थे। और कुछ डांस ट्रूप भी।
– किसी ने चुटकी भी ली “ये वही डांस ट्रूप है न जिसे बिहार चुनाव नतीजों वाले दिन के लिए बुक किया था? “बाहर दफ्तर के आंगन में एक बड़ा सा स्टेज बनाया गया था।
– दफ्तर के पिछले दरवाजे और अहाते के बीच एक माइक पार्टी के झंडे वाले पोडियम के साथ लगाया गया था।
– वहां कुछ नेता आकर बोले भी लेकिन ढोल के शोर में वो बोल कम ही सुनाई दिए। भीतर वेरी वेरी इम्पॉर्टेंन्ट लोग ही जा पा रहे थे। पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य, मंत्री, मुख्यमंत्री और कुछ स्टार नेता।
– अंदर का सीन कुछ ऐसा था, ब्रीफिंग रूम में स्टेज पर इलेक्शन ऑफिसर अपनी टीम के साथ बैठे थे। उनके पास हाजिरी लगाने वालों में देश के गृहमंत्री-रक्षामंत्री तक शामिल थे।
– फिर हर राज्य के प्रस्तावक अपने लवाजमे के साथ दिखे। इनमें कुछ को लीड करने वाले मुख्यमंत्री भी थे।
– बारी-बारी राज्यों की नुमाइंदगी दिखती रही। गुजरात, महाराष्ट्र से होते हुए जम्मू-कश्मीर तक। जे एंड के की बारी आई तो बीजेपी का जम्मू वाला नारा ‘जहां बलिदान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है’ भी लगाया गया।
– अब स्क्रीन पर बाहर बने स्टेज का वीडियो आउटपुट दिखाया जाने लगा। और पीछे से गाना बजा…”कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आए।”
– गाने के मतलब निकाले जाने लगे। भीड़ से होंठ फड़फड़ाए तो उसमें आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का लिपसिंक दिखा।
– अचानक गाने को दो लाइनों के बाद बंद करवा दिया गया। स्थिति संभली तो याद आया भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में से राजनाथ के अलावा कोई इस समारोह का भागीदार नहीं बना।
दबी जबानों में लगे नारे…
तभी स्टेज से शंखनाद हुआ। भगवा कपड़े पहने नॉर्थ ईस्ट के बच्चों ने शंखध्वनि की। और इसी बीच इलेक्शन ऑफिसर अविनाश खन्ना ने अमित शाह के दोबारा अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की। 13th पार्टी प्रेसिडेंट।
– सड़क से हलकी फुलकी आतिशबाजी की आवाजें आईं। भीतर गिने चुने नारे लगे। दबी जबानों से। कुछ लोग पिछले गेट से लौटने लगे।
– लौटने वालों में सबसे पहले पहचाना सा चेहरा मेनका गांधी का था। प्रोग्राम में वित्तमंत्री जेटली नहीं थे। सेल्फी सिखाने वाले मोदीजी नहीं थे।
– सबसे ज्यादा फैन संबित पात्रा के साथ सेल्फी लेते नजर आए।
– मेंबरशिप भले अमित शाह के पिछले कार्यकाल के बाद से पांच गुना बढ़ी हो उत्साह और लोकप्रियता दुगुनी घटी है। ये हम नहीं वहां मौजूद जुबानें कह रहीं थीं।
तीन साल के लिए चुने गए हैं अमित शाह
मोदी, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, वेंकैया नायडू सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने शाह के नाम का प्रपोजल रखा।
– बीजेपी के जिन मुख्यमंत्रियों ने उनके नाम का प्रपोजल रखा उनमें वसुंधरा राजे सिंधिया, रघुबर दास, शिवराज सिंह चौहान शामिल थे।
– हालांकि, इस दौरान लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी नजर नहीं आए। जो चर्चा का विषय बना रहा।
– शाह की यह नई पारी तीन साल की होगी। 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश असेम्बली इलेक्शन उनके इस कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं।
संघ को शाह पर भरोसा क्यों?
– संघ मानता है कि शाह ने बीजेपी को लोकसभा के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड में सीधी जीत दिलाई।
– जम्मू-कश्मीर में भी पार्टी अच्छा प्रदर्शन कर पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार बनाने में सफल रही।
– इसके अलावा मणिपुर, केरल और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में पार्टी का असर पहली बार दिखा। यह आने वाले वक्त के लिए बेहतर संकेत हैं।
– संघ को मोदी और शाह की जोड़ी पर भरोसा है।
शाह का रिपोर्ट कार्ड
अमित शाह जुलाई 2014 में पार्टी अध्यक्ष बने थे। इसके बाद बीजेपी ने छह राज्यों में चुनाव लड़े। चार में उसकी सरकार बनी। दो में वह चुनाव हार गई। हालांकि, इससे पहले शाह को लोकसभा चुनाव में यूपी की जिम्मेदारी दी गई थी। वहां पर एनडीए को 80 में से 73 लोकसभा सीटें मिली थीं।
राज्य
चुनाव
कैंडिडेट
नतीजा
सीटें
नफा/नुकसान
बिहार
2015
कोई नहीं
हार
53
– 38
दिल्ली
2015
किरण बेदी
हार
3
-28
महाराष्ट्र
2014
कोई नहीं
जीत
122
+76
हरियाणा
2014
कोई नहीं
जीत
47
+43
जम्मू-कश्मीर
2014
कोई नहीं
जीत
25
+14
झारखंड
2014
कोई नहीं
जीत
37
+19
अगले दो साल में कहां होंगे चुनाव?
– आने वाला समय बीजेपी के लिए मुश्किल भरा है। यह शाह की दूसरी पारी पर भी दिखेगा। अगले दो साल में 10 राज्यों में चुनाव होने हैं। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुड्डुचेरी, तमिलनाडु में 2016 में चुनाव होंगे। यूपी, पंजाब, गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तराखंड में 2017 में चुनाव होंगे।
राज्य वर्ष
असम 2016
केरल 2016
पुड्डुचेरी 2016
तमिलनाडु 2016
पश्चिम बंगाल 2016
गोवा 2017
मणिपुर 2017
पंजाब 2017
उत्तराखंड 2017
उत्तर प्रदेश 2017
बीजेपी-एनडीए के पास देश के 11 राज्यों में सत्ता
राज्य जहां बीजेपी-एनडीए सत्ता में देश के जीडीपी में हिस्सेदारी
महाराष्ट्र 16.26%
गुजरात 7.69%
राजस्थान 4.26%
मध्य प्रदेश 4.21%
हरियाणा 3.58%
छत्तीसगढ़ 1.49%
झारखंड 1.65%
जम्मू कश्मीर 0.84%
पंजाब 3.03%
गोवा 0.47%
आंध्र प्रदेश 4.43%
कारोबारी परिवार से ताल्लुक
– शाह का जन्म प्लास्टिक पाइप का कारोबार करने वाले घराने में 1964 में हुआ था।
– उन्होंने गुजरात के मेहसाणा से स्कूल की पढ़ाई की। उसके बाद अहमदाबाद गए और बायोकेमेस्ट्री में ग्रैजुएशन किया।
– इसके बाद वे बिजनेस में अपने पिता का हाथ बंटाने लगे।
– शाह स्टॉक ब्रोकर के रूप में और को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं।
1982 में पहली बार मिले थे मोदी से
– 1982 में अमित शाह पहली बार नरेंद्र मोदी से मिले थे। तब नरेंद्र मोदी अहमदाबाद में यूथ के लिए संघ की ओर से काम करते थे।
– दोनों ने मिलकर बीजेपी और संघ के अन्य संगठनों के लिए मिलकर काम किया।
– 1995 में बीजेपी ने गुजरात में पहली बार अपनी सरकार बनाई। उस दौर में अमित शाह और नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर गुजरात के ज्यादातर गांवों में दूसरे नंबर के सबसे इफेक्टिव नेता की पहचान कर उन्हें बीजेपी में शामिल कराया।
– दोनों ने मिलकर गुजरात में 8 हजार ऐसे नेताओं का नेटवर्क खड़ा कर दिया, जो प्रधान का चुनाव हारे थे। इस तरह से गांव-गांव तक बीजेपी से नेताओं को जोड़ा गया।
– 1995 में जब केशुभाई पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो मोदी के साथ शाह की करीबी उन्हें पसंद नहीं आई।
– यही वजह है कि 1997 में विधानसभा उपचुनाव जीतने और 1998 में विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बावजूद उन्हें सरकार में कोई अहम पद नहीं मिला।
– लेकिन 2001 में नरेंद्र मोदी के गुजरात की सत्ता संभालते ही शाह के दिन बदलने लगे। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने शाह को अपनी सरकार में गृह राज्य मंत्री का अहम पद दिया।