अमित शाह ने दिया छत्तीसगढ़ बीजेपी को लक्ष्य- 90 में से 70 सीटें जीतो

रायपुर.भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तरप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में जीत का रोड मैप तैयार किया है। गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों को लक्ष्य दिय कि छत्तीसगढ़ की 90 में से 70 सीटें जीतनी हैं। शाह ने दिनभर में कुल 7 बैठकें लीं। 3 दिन के प्रवास के पहले दिन उन्होंने प्रदेश पदाधिकारियों से दो टूक कहा- पार्टी के लक्ष्य के लिए काम नहीं कर सकते, तो इस्तीफा देकर आराम करें।
उन्होंने समझाइश दी कि हर कमजोर बूथ पर फोकस करें, लक्ष्य मिल ही जाएगा। शाह ने कहा कि हमें कमजोर बहुमत वाली नहीं, ताकतवर सरकार बनानी है। उन्होंने कहा कि आप लोगों ने यहां तीन चुनाव जीते हैं। अभी पार्टी की 49 सीटें हैं। कांग्रेस की आपसी लड़ाई के बावजूद जीत का अंतर 4-5 सीटों तक ही है। इससे कांग्रेस कमजोर नहीं होगी। अंतर बड़ा करना होगा। 3 दिन के प्रवास में शाह 2018 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए पार्टी की रणनीति को अंतिम रुप देने के लिए कुल 22 बैठकें लेंगे।
धमकी समझें या आग्रह, काम नहीं कर सकते तो इस्तीफा दो
प्रदेश पदाधिकारियों को उनके ग्राउंड वर्क में कमी को लेकर शाह ने फटकार लगाई। उन्होंने कहा- मैं झंडे-बैनर उठाने वाला कार्यकर्ता हूं। संगठन में क्या हो रहा है, मुझे सब पता है। आज की बैठक के लिए एक रात में तैयारी कर खुश किया जा रहा है।
नसीहत
सभी पदाधिकारी जनसंपर्क अभियान बढ़ाएं
– यदि जनसंपर्क नहीं कर सकते या पार्टी के लिए समय नहीं दे सकते, तो प्रदेश अध्यक्ष को बताकर पद छोड़ दें। या जो जिम्मेदारी मिली है, उसे निभाएं। इसे धमकी समझ लें या फिर आग्रह।
धान बोनस पर बोले- जो नहीं कर पाए उसकी बात मत करो, अपना काम बताओ
विधायक शिवरतन शर्मा ने धान का बोनस नहीं देने का मामला उठाया, तो उन्होंने कहा- जो नहीं कर पाए, उसकी बात न करें और जो किया है उसे आम जनता के बीच लेकर जाएं।
…और पदाधिकारियों को टिप्स दिए
अभी से जुटें, रणनीति बनाएं। पिछली बार हारे हर बूथ जीतने का प्लान बनाएं। बूथ लेवल कार्यकर्ता सम्मेलन करें, नए सदस्य जोड़ें। जिलाध्यक्ष-संगठन प्रभारी बूथों पर प्रवास करें। 15 अगस्त 2018 तक के लिए अपना प्रतिदिन का लक्ष्य तय करें।
संतों से मांगे सुझाव, वे बोले-
गाय, गंगा और श्रीराममंदिर मामले में चिंतन करें। छत्तीसगढ़ और मप्र की तरह देश में गो-हत्या पर प्रतिबंध लगे। गंगा सफाई के लिए बड़ा अभियान शुरु हो। ’’
– संत युधिष्ठिर लाल, शदाणी दरबार के प्रमुख
निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को एडमिशन मिले अभी ऐसा नहीं हो रहा है। लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता।’’
-प्रकाशमुनि महाराज, कबीर पंथ
अब नक्सली लूट खसोट और हिंसा पर उतारू हो गए हैं। गरीबी के चलते नवयुवक भटक रहे हैं। अधिक से अधिक आवासीय स्कूल-कॉलेज खोलकर बच्चों पढ़ाया जाए।’’
-स्वामी शिवरूपानंद,
भारत सेवा संघ के संत