असम में BJP; बंगाल में नारा- ‘ठंडा-ठंडा, कूल-कूल, घोरे-घोरे तृणमूल’

नई दिल्ली/कोलकाता. असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती जारी है। असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। वहीं, ममता की टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड वापसी की है। कोलकाता में ममता के घर के बाहर जश्न शुरू हो गया है। सैकड़ों पार्टी मेंबर नारा लगा रहे हैं- ठंडा-ठंडा कूल-कूल-घोरे-घोरे तृणमूल यानी ठंडा-ठंडा कूल-कूल, घर-घर में तृणमूल। केरल में लेफ्ट गठबंधन आगे है। सबसे ज्यादा घाटा कांग्रेस को हो रहा है। पांचों राज्यों में बुरी हार हुई है।
कोलकाता में ममता के घर के बाहर जश्न
– पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी रिकार्ड जीत दर्ज कर रही है।
– इस बीच, उनके घर के बाहर जश्न की शुरुआत हो गई है।
– बारिश के बावजूद उनके घर के बाहर हजारों पार्टी मेंबर जुटे हैं। हरा गुलाल लगाकर एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं।
– कालीघाट स्थित अपने घर पर ही वे मुकुल रॉय और डेरेक ओ’ब्रायन के साथ मीटिंग कर रही हैं।
– मीटिंग के बाद ममता बनर्जी ने विक्ट्री साइन दिखाते हुए इसे आम जनता की जीत बताया।
असम (कुल सीट-126)
– बीजेपी- 76
– कांग्रेस- 28
– एआईयूडीएफ- 14
– अन्य- 8
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प. बंगाल (कुल सीट-294)
– टीएमसी- 219
– लेफ्ट- 65
– बीजेपी- 7
– अन्य- 3
असम-प.बंगाल के रिजल्ट्स पर एक्सपर्ट का क्या कहना है…
 1. असम
सीनियर जर्नलिस्ट पार्थाे बोराबताते हैं- ”असम में 126 सीटों में से पहले फेज में अपर असम में 65 सीटों पर वोट पड़े। यहीं बीजेपी को काफी फायदा हुआ। दूसरे फेज में मुस्लिम बहुल सीटों पर वोट पड़े। राज्य में 34 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं।”
– ”34 सीटें ऐसी हैं जहां बांग्लादेशी इमिग्रेंट्स का दबदबा है जिन्हें अब इंडियन सिटिजनशिप मिल चुकी है।”
– ”दूसरे फेज से पहले बीजेपी के नेता हिमंत विश्वा शर्मा का बयान आया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वो 1951 से बाद और 1971 से पहले बांग्लादेश से आए मुस्लिमों को सिटिजनशिप देंगे।”
– ”इसके अलावा चुनाव के दौरान एक और मुद्दा यह भी उठा कि AIUDF के नेता बदरुद्दीन अजमल क्यों बीजेपी नेताओं से मिले? वे बड़े बिजनेसमैन हैं। कहा जाता है कि केंद्र की मदद के बिना उनका बिजनेस नहीं चलता।”
– ”इसके बाद मुस्लिम बहुल इलाकों में 90 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई। समझा जा रहा है कि यह वोट कांग्रेस को गया।”
– ”इसका सबसे ज्यादा नुकसान अजमल को हुआ। अजमल ने आशंका भी जताई है कि अगर बीजेपी को कुछ MLA की जरूरत पड़ती है तो वो हमारी पार्टी तोड़ सकते हैं।”
– अजमल कांग्रेस के साथ गठबंधन चाहते थे। उनकी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से सीधी बातचीत है। लेकिन तरुण गोगोई इस अलायंस के खिलाफ थे। लिहाजा यह गठबंधन नहीं हुआ।”
– ”सीएम तरुण गोगोई का मानना था कि अगर यह गठबंधन होता तो इसके उनके हिन्दू वोटर्स नाराज हो सकते थे।”
– ”अगर बीजेपी बहुमत नहीं जुटा पाती है तो दोनों के बीच चुनाव के बाद गठबंधन की पूरी सम्भावना है।”
2 वेस्ट बंगाल
वेस्ट बंगाल के सीनियर जर्नलिस्ट जयंतो घोषाल ने बताया, ”पांच साल के शासन के बाद वेस्ट बंगाल के लोगों में ममता बनर्जी के खिलाफ नाराजगी थी। लेकिन यह नाराजगी शहरी इलाकों में ज्यादा और गांवों में कम दिखी।”
– ”जहां तक भ्रष्टाचार और स्टिंग ऑपरेशनों का मुद्दा शहरी इलाकों में हावी रहा। गांवों में ममता बनर्जी की काफी मजबूत पकड़ है। गरीबों के लिए 2 किलों में चावल की व्यवस्था की गई है।”
– ”ममता ने जहां 2011 में 184 सीटें जीती थीं, वहीं इस बार इतनी उन्हें इतनी सीटें मिलना मुश्किल लग रहा था।”
– ”लेफ्ट और कांग्रेस अगर मिलकर नहीं लड़ते तो टीएमसी को फायदा होता।”
– राज्य में करीब 30 फीसदी मुस्लिम हैं। माना गया कि ज्यादातर का झुकाव तृणमूल की तरफ है। इसके अलावा ममता सरकार ने छोटे-छोटे क्लबों और संगठनों को भी काफी बजट देकर मदद की। SC/ST और OBC समेत महिला वाेटरों में ममता की गहरी पैठ है।”
– सीनियर जर्नलिस्ट ए.सेनगुप्ता ने कहा, ”शहरी इलाकों में ममता को लेकर थोड़ी नाराजगी थी लेकिन ग्रामीण इलाकों में उनती ही उनकी इमेज मजबूत हुई है। इसका सीधा फायदा मिला।”
– ”अपोजिशन द्वारा करप्शन का मुद्दा (शारदा-नारदा स्टिंग ऑपरेशन) बेकार हो गया है। इससे उन्हें फायदा नहीं हुआ।”
– ”लेफ्ट-कांग्रेस का गठबंधन दोनों के लिए ही खतरनाक साबित हुआ। ”

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