आंखें डबडबाई और रुंध गया गला…आडवाणी की नजर में अपनी राह से ऐसे भटकी भाजपा

नई दिल्ली. भाजपा नेतृत्व से खफा चल रहे पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का सियासी हमला जारी है। परोक्ष रूप से उन्होंने एनडीए में टूट को श्यामाप्रसाद मुखर्जी की विचारधारा के खिलाफ बताते हुए भाजपा पर हमला बोला है। सत्य साई सेंटर में श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने इसका जिक्र किया। आडवाणी ने कहा कि जनसंघ के पहले अधिवेशन में श्यामाप्रसाद मुखर्जी ओडीशा गणतंत्र परिषद के सदस्यों को लेकर आए। 
भाषण में मुखर्जी ने कहा था कि कांग्रेस को चुनौती देने के लिए और उसे सत्ता से बाहर करने के लिए गैर-कांग्रेसी दलों को साथ लाना जरूरी है। कांग्रेस से मुकाबला तभी किया जा सकता है जब गैर-कांग्रेसी दल एक साथ मिलें।
आडवाणी ने यह बात ऐसे समय कही है जब जदयू, नरेंद्र मोदी के नाम पर एनडीए से बाहर हो गया है। मोदी के नाम पर कुछ ऐसी पार्टियों को भी ऐतराज है, जिनकी नींव गैर-कांग्रेसी राजनीति की वजह से पड़ी थी और राज्यों में कांग्रेस के खिलाफ हैं। आडवाणी ने यह बात भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की मौजूदगी में कही, जिन्होंने आडवाणी के जबरदस्त विरोध के बावजूद नरेंद्र मोदी को भाजपा चुनाव अभियान समिति का मुखिया बनाया है।
गौरतलब है कि मोदी को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाए जाने के विरोध में आडवाणी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा श्यामाप्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की विचारधारा से भटक गई है। 10 जून को इस्तीफा देने के बाद आडवाणी का यह पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था, जिसमें उन्होंने राजनाथ सिंह के साथ मंच साझा किया।
भावुक हुए आडवाणी 

श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आडवाणी की आंखें छलछला गई। देश के प्रति श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बलिदान को याद करते हुए आडवाणी भावुक हो गए और लगभग दो मिनट तक उनकी आंखें डबडबाई रही और गला रुंध गया। बाद में उन्होंने खुद को काबू किया और मुखर्जी के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

देश को जोड़ने वाला नेता चाहिए : नीतीश 
एनडीए से अलग होने के चार दिन बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने निर्णय का बचाव करते नजर आए। जेडीयू नेता ने कहा कि इस समय देश को बांटने वाले नहीं, बल्कि जोडऩे वाले नेता की जरूरत है। नीतीश ने एक न्यूज चैनल से कहा, ‘हमने भाजपा से पहले ही कह दिया था कि हमें विभाजनकारी नेता स्वीकार नहीं है। विविधता वाले हमारे देश को ऐसे नेता की जरूरत है, जो इसे जोड़ सके।’ नरेंद्र मोदी का नाम लिए बिना नीतीश ने कहा कि भाजपा में एक व्यक्ति का कद बढ़ाने के लिए जैसा माहौल बनाया गया, उसने कई सवाल खड़े किए। नीतीश ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वे प्रधानमंत्री बनने की रेस में नहीं हैं। यह भी कहा कि जेडीयू ने एनडीए इसलिए छोड़ा क्योंकि भाजपा अपने वादों पर कायम नहीं रही।