“आइटम” पर राहुल-कमलनाथ में रार…!

 

 

 

 

 

 

 

  • नेतृत्व का सम्मान करना था नाथ को
  • असहमति नहीं,आदेश देने थे राहुल को

शैलेन्द्र सिंह पंवार, इंदौर। सोशल मीडिया पर राहुल गांधी “पप्पू” के तौर पर आए दिन प्रचलित रहते है, भाजपा नेता भी अपने भाषणों में उन्हें पप्पू कहते रहते है, राहुल ने कभी इसका प्रतिकार नहीं किया, पर कांग्रेसी बचाव करते रहते है। ताजा प्रषंग “आइटम” से जुड़ा हुआ है, राहुल ने कमलनाथ की आइटम भाषा पर आपत्ति ली है और बोले की मैं इस तरह की भाषा का समर्थन नहीं करता हूं, राहुल ने भले ही आइटम का समर्थन नहीं किया है, पर विरोध भी नहीं किया है, जब उन्हें ऐसी भाषा पसन्द नहीं है तो सीधे तौर पर कमलनाथ को माफी मांगने की बात कहनी थी, राहुल ने आइटम पर बस अपनी भावनाएं व्यक्त की है, राहुल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके है, उनके नेतृत्व में लोकसभा के चुनाव लड़े जा चुके है, वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार रहे है, प्रत्यक्ष तौर पर सोनिया गांधी की तुलना में आज भी कांग्रेस के सबसे चर्चित चेहरे और नीति निर्धारक भी वे ही है,अगर उन्हें ये भाषा पसन्द नहीं है तो बहुत अच्छी बात है, पर यहा पसन्द-नापसंद का सवाल नहीं है, सवाल इस मामले पर आदेश/निर्देश का है। और जब पसन्द नहीं है, तब पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व होने के नाते माफी मांगने के आदेश/निर्देश देने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। कमलनाथ उनसे दो कदम आगे है, जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व “आइटम” को पसन्द नहीं कर रहा, तब भी माफी मांगने की बजाए अपने को सही साबित करने पर तुले हुए है, यहा तक कह दिया कि मैंने कुछ गलत नहीं किया और ये राहुलजी के अपने विचार है। आपको लगता है कि आप सही हो, पर शीर्ष नेतृत्व उसे गलत मान रहा है,तब आप पर भी दबाव आ जाता है कि नेतृत्व का सम्मान करें, ऐसे कई उदाहरण कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य दलों में मिल भी सकते है। कमलनाथ को राहुल की भावना का सम्मान करते हुए माफी मांगने में देर नहीं करनी थी, फिर माफी मांगकर आइटम विषय को समाप्त भी किया जा सकता था, भाजपा भी इस पर शायद तब वैसी आक्रमक नहीं दिखाई देती, जैसी अभी है। तय है कि भाजपा 3 नवम्बर तक इस पर आक्रामक बनी रहेगी और मतदाताओं के बीच खूब प्रचारित भी करेगी। वैसे भी कांग्रेस ने सरकार बचाने और बनाने के मौजूदा चुनावी खेल में बीते कुछ दिनों में आइटम, भूखे नंगे सहित कई मुद्दे भाजपा को दे दिए है। अब बात पप्पू की, कमलनाथ ने राहुल की भावनाओं को नजरअंदाज कर उन्हें पप्पू सिद्ध करने में भी कोई कमी नहीं छोड़ी है, एक तरह से कमलनाथ ने राहुल को नोटिस में नहीं लिया है, कमलनाथ की नजर में राहुल कही पप्पू तो नहीं! शायद तभी उन्हें नोटिस में नहीं ले रहे है। वैसे राजनीतिक अनुभव के मामले में कमलनाथ, राहुल से बहुत आगे है,पर यहा सवाल अनुभव का नहीं, नेतृत्व के सम्मान का है। नरेन्द्र मोदी-अमित शाह से सीनियर भाजपा में आज भी कई नेता है, ये सक्रिय भी है, कई मामलों में असहमत भी होते होंगे, वैचारिक तालमेल की परेशानियां भी होती होंगी, पर मजाल है कि ये उनकी भावनाओं के इतर काम करें, ये भय नहीं होता है ये नेतृत्व के प्रति सम्मान और संगठन की कार्य पद्धति का हिस्सा रहता है। वैसे कमलनाथ ने तो उन्हें पप्पू सिद्ध किया ही है, राहुल ने भी अपने को पप्पू सिद्ध करने में कोई कमी नहीं रखी है, शीर्ष नेतृत्व है सहमति-असहमति की बजाए सीधे माफी मांगने के आदेश देने थे।

■ राहुल को दिखाया दंभ
कर्ज माफी, बेरोजगारी भत्ते सहित वचन पत्र की कई मांगों की पूर्ति के लिए तब के कांग्रेसी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सड़क पर आने की बात कही थी, इस पर कमलनाथ ने दंभ में कहा था- तो आ जाए सड़क पर, सिंधिया तो सड़क पर नहीं आए, पर कमलनाथ और कांग्रेस सरकार को जरूर ला दिया। पिछले दिनों मीडिया मित्रों के समक्ष कमलनाथ का ये दंभ फिर नजर आ रहा था, इस बार उन्होंने ये दंभ राहुल गांधी को दिखाया है- आइटम में कुछ गलत नहीं है, माफी का सवाल ही नहीं, नहीं मांगूगा। कांग्रेस में इस समय दो धड़े है, एक सोनिया कांग्रेस तो दूसरी राहुल कांग्रेस। हो सकता है कि कमलनाथ ने इसलिए भी राहुल कांग्रेस को दंभ दिखाया हो।

■ क्यों बदनाम है आइटम
वैसे कमलनाथ ने आइटम की परिभाषा वस्तु से गलत नहीं की है, आइटम का मतलब तो वस्तु ही होता है, हम कई बार घर में भी कहते है क्या-क्या आइटम है, शादी समारोह व होटल-रेस्टोरेंट में भी बोलते है कि क्या-क्या आइटम बने है, आइटम और भी कई अवसरों पर सम्मान से उपयोग में किया जाता है। पर कमलनाथ का आइटम तो वस्तु वाला नहीं था, क्योंकि इसका उपयोग एक महिला के लिए कर रहे थे, महिला वस्तु मात्र तो हो नहीं सकती, फिर उनकी एक पुर्व कैबिनेट महिला सहयोगी आइटम पर मुंह छिपा रही थी, कमलनाथ और सामने वाले भी आइटम पर हास परिहास कर रहे रहे। वैसे सम्मानित आइटम को बदनाम किया है बॉलीवुड ने, कम कपड़ो में किसी नई नवेली या चर्चित हीरोइन के हॉट गाने जब से फिल्मों में डाले जाने लगे तब से आइटम की परिभाषा ही बदल गयी, हीरोइन आइटम हो गयी और गाना आइटम सांग हो गया। वैसे बॉलीवुड ने “आइटम” शब्द को प्रसिद्धि भी दी है।।

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