आजाद भारत में नाथूराम गोडसे को अंबाला जेल में दी गई थी पहली फांसी

अंबाला। भारत की आजादी के बाद पहली फांसी महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को दी गई थी। मुंबई आतंकी हमले का दोषी कसाब 56वां व्यक्ति था, जिसे फांसी पर लटकाया गया। इसके बाद याकूब का नंबर आता है। नाथूराम गोडसे को फांसी दिए जाने के बाद सरकार ने शव परिजन को नहीं दिया था। जेल के अधिकारियों ने घग्घर नदी के किनारे पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।
भारत की आजादी के बाद देश में पहली फांसी महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे एवं एक अन्य षडयंत्रकारी नारायण आप्टे को 15 नवंबर 1949 को अंबाला जेल में दी गई थी। इस जेल में नाथूराम और आप्टे को बी कैटेगरी में रखा गया था।
नाथूराम कॉफी पीने और जासूसी किताबें पढ़ने का शौकीन था। वो छुरी-कांटे से खाना पसंद करता था। हालांकि, जेल में उसे ये सुविधाएं नहीं मिली। 15 नवंबर 1949 को गोडसे को फांसी दिए जाने से एक दिन पहले परिजन उससे मिलने अंबाला जेल गए थे। उनकी बेटी भतीजी और गोपाल गोडसे की पुत्री हिमानी सावरकर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह फांसी से एक दिन पहले अपनी मां के साथ उनसे मिलने अंबाला जेल गई थी। उस समय वह ढाई साल की थी।