आज से उपवास करेंगे शिवराज, कृषि मंत्री बोले- नहीं माफ करेंगे किसानों का कर्ज

भोपाल। हिंसक हो रहे किसान आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार से BHEL के दशहरा मैदान पर अनिश्चितकाल उपवास पर बैठेंगे। सीएम ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारी किसानों से कहा था कि किसान भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आएं और मुझसे बात करें। दोपहर बाद 4 बजे सीएम उनसे चर्चा करेंगे।
-सीएम के उपवास के लिए दशहरा मैदान पह वाटरप्रूफ पंडाल बनाया गया है। मंदसौर में फिलहाल हालात सामान्य बताए जा रहे हैं। उधर, गृह मंत्रालय ने सभी पड़ोसी राज्यों को अलर्ट किया। हिंसा ग्रस्त इलाकों में सुरक्षा के लिए कुल 13 कंपनियां तैनात की गई हैं।
कृषि मंत्री का बयान..
इस बीच मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने कहा, ”जो जैसा व्यवहार करेगा, उसके साथ वैसे ही निपटा जाएगा। यह आंदोलन अब किसानों का नहीं रहा। राहुल गांधी यहां क्यों आए थे, उनका जन्म मप्र में हुआ है क्या। किसानों के कर्ज माफी का कोई सवाल ही नहीं उठता मैं पहले भी इसके पक्ष में नहीं था और अब भी नहीं हूं।”
विपक्ष ने कहा नौटंकी
विपक्ष ने मुख्यमंत्री के उपवास और दशहरा मैदान से सरकार चलाने के फैसले को महज नौटंकी करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि चौहान को नौटंकी करने की बजाय किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण करना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव का कहना है कि, खुद को संवेदनशील मुख्यमंत्री बताने वाले चौहान छह किसानों की मौत के बाद न तो मंदसौर गए और यहां तक कि बालाघाट में एक पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में 25 लोगों की मौत के बाद भी उन्होंने वहां जाना भी मुनासिब नहीं समझा। वे सिर्फ नौटंकी और मुद्दों से भटकाने की कोशिश करते रहे हैं। उपवास भी उसी का हिस्सा है।
ये रहेंगे चर्चा के मुख्य बिंदु
-सीएम शिवराज सिंह चौहान ने आंदोलनकारी किसानों से आंदोलन स्थगित करने की अपील की है।
-शांति बहाल करने और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए खुला निमंत्रण दिया है।
-मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था सर्वोपरि है। जनता की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
-जो परिस्थितियां निर्मित हुई हैं वह ठीक नहीं है। बच्चों के हाथ में जिन्होंने पत्थर थमा दिए हैं उन्होंने ठीक नहीं किया है। अराजक तत्वों के साथ सख्ती के साथ निपटा जाएगा।
-जनता की सुरक्षा के लिए सरकार राजधर्म का पालन करेगी।
-सरकार ने सिंचाई, बिजली की व्यवस्था, पहले जीरो प्रतिशत और बाद में दस प्रतिशत ऋणात्मक कर्ज पर किसानों को कर्ज देने आदि के कार्य किए हैं।
-सरकार की नीतियों से बम्पर उत्पादन हो रहा है। बम्पर उत्पादन के कारण फसलों की कीमतों में कमी आई है।
-पिछले दिनों जो परिस्थितियां निर्मित हुई हैं उनसे होने वाली किसानों की तकलीफ को सरकार ने समझा है।
-सरकार ने गेहूं, धान को समर्थन मूल्य पर खरीदा है। प्याज 8 रुपए प्रति किलो के मूल्य पर खरीदा जा रहा है।
-तुअर 5050 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर खरीदी जाएगी। ग्रीष्म मूंग को 10 जून से 5225 रुपए प्रति क्विंटल के दर पर खरीदा जाएगा।
-उड़द भी 10 जून से समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी। भुगतान चेक से नहीं आरटीजीएस से किया जा रहा है।
-रबी और खरीफ फसलों के लिए अलग-अलग कर्ज देने की व्यवस्था को बदलने का फैसला कर दिया है।
-किसान एक साथ दोनों फसलों के लिए कर्ज ले सकते हैं। भविष्य में ऐसी स्थितियां निर्मित नहीं हों इसके लिए 1000 करोड़ का स्थिरीकरण कोष का गठन किया जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को उनकी फसल का ठीक दाम मिले।

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