आधा दर्जन कांग्रेसी सांसद नहीं लड़ना चाहते चुनाव

Tatpar 28 feb 2014

 नरेन्द्र मोदी के पक्ष में चल रही लहर और राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार द्वारा दो माह के कार्यकाल के दौरान हुए निर्णयों से चिंतित कांग्रेस के आधा दर्जन वर्तमान सांसद लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते, इनमें दो केन्द्रीय मंत्री और एक पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शामिल है। वहीं एक केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी सीट बदलना चाहते है। दो माह पूर्व हुए राज्य विधानसभा चुनाव में आजादी के बाद 66 वर्ष में पहली बार कांग्रेस केवल दो अंकों पर सिमट कर रह गई। पार्टी को 200 विधानसभा सीटों में से केवल 21 सीटें मिली। उस दौरान भी राजस्थान में नरेन्द्र मोदी की लहर चली और इसका फायदा भाजपा को हुआ, पहली बार 163 सीटें मिली। अब यह लहर ओर अधिक भाजपा के पक्ष में बढ़ती देखकर कांग्रेस के आधा दर्जन सांसदों ने चुनाव नहीं लड़ने का मानस केन्द्रीय नेतृत्व को बताया है। इनमें पार्टी महासचिव डॉ. सी.पी. जोशी, केन्द्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास, केन्द्रीय मंत्री चन्द्रेश कुमारी, राजसमंद सांसद गोपाल सिंह और जयपुर शहर के सांसद महेश जोशी शामिल है। वहीं केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा अपनी वर्तमान सीट टोंक-सवाई माधोपुर के स्थान पर दौसा से चुनाव लड़ना चाहते है। कुछ दिन पूर्व ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने सचिन पायलट भी अब अजमेर सीट के स्थान पर भीलवाड़ा से चुनाव लड़ना चाहते है।

सी.पी.जोशी ने तो विधानसभा चुनाव में हार के बाद ही लोस.चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था। वे लम्बे समय से अपने निर्वाचन क्षेत्र भीलवाड़ा गए भी नहीं। वहीं गिरिजा व्यास संगठन में काम करने का हवाला देकर चुनाव नहीं लड़ना चाहती। पायलट अपने निर्वाचन क्षेत्र अजमेर में सक्रिय तो रहे, लेकिन यहां कांग्रेसी ही उनका विरोध कर रहे है। संभावित हार को देखते हुए वे अपना निर्वाचन क्षेत्र बदलना चाहते है। नमोनारायण मीणा का भी वर्तमान संसदीय क्षेत्र में विरोध है।

जानकारी के मुताबिक जाट समाज का एक वर्ग विस. चुनाव में हार के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें आगामी लोकसभा चुनाव लड़ाने को लेकर पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से आग्रह कर चुके है। लेकिन गहलोत अपने बेटे वैभव गहलोत को चुनाव लड़ाना चाहते है।

सूत्रों का कहना है कि टिकटों को लेकर मार्च के दूसरे सप्ताह तक निर्णय हो सकता है। गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में राज्य की 25 में से कांग्रेस को 21, भाजपा को 4 और एक सीट पर निर्दलीय की जीत हुई थी। लेकिन विस. चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई।