आरबीआई ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव

tatpar 30 july 2013

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये के अवमूल्यन को देखते हुए अपनी मुख्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया। इसके साथ ही बैंक ने स्वीकार किया कि विकास के सामने जोखिम में वृद्धि हुई है और खुदरा बाजार में महंगाई उच्च स्तर पर बरकरार है।

रिजर्व बैंक ने क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान करते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। सीआरआर और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साफ है कि ईएमआई भी घटने की कोई उम्मीद नहीं है। आरबीआई ने विकास दर का अनुमान भी घटाया है। अनुमानित विकास दर 5.7 से घटकर 5.5 फीसदी जताई गई है।

मौजूदा कारोबारी साल की पहली तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रिपर्चेज दर या रेपो दर को 7.25 फीसदी पर बरकरार रखा, इसके साथ ही रिवर्स रेपो दर भी 6.25 फीसदी के पुराने स्तर पर बनी रही। रेपो दर वह दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से कर्ज लेते हैं, वहीं रिवर्स रेपो दर वह दर है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंक से उधार लेती है।

नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) को भी चार फीसदी पर बरकरार रखा गया। वाणिज्यिक बैंक अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित अनुपात आरबीआई में जमा रखते हैं, इसे ही सीआरआर कहते हैं।

रुपये को संभालने के लिए आरबीआई ने जो कदम उठाए थे उससे डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट पर कुछ हद काबू तो हुआ, लेकिन बाजार में नगदी की कमी का असर अब कारोबार पर पड़ रहा है। रिजर्व बैंक ने सोमवार को ही संकेत दिया था कि मौद्रिक बाजार में स्थिरता कायम करने के लिए वो दरों में बदलाव नहीं करेगा।

मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा से पहले जारी दस्तावेज में बैंक ने कहा कि मौजूदा हालात में प्राथमिकता मौद्रिक बाजार में स्थिरता लाने की रहेगी ताकि आर्थिक स्थिति विकास के लिए सहायक बनी रहे।

इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा था कि आरबीआई की प्राथमिकता विकास में तेजी लाना होनी चाहिए। चिदंबरम के मुताबिक आरबीआई इस तरह का फैसला ले जिससे रुपये की स्थिरता के साथ-साथ विकास और रोजगार में बढ़ोतरी हो। वैसे, अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात पर नजर डालें तो आरबीआई के पास ज्यादा विकल्प मौजूद नहीं हैं।