आर्मी के सहायक लड़ने वाले जवान होते हैं, नौकर की तरह काम नहीं कराया जाता: सरकार

नई दिल्ली. सरकार ने आर्मी ने सहायक (बडी) सिस्टम का बचाव किया है। राज्यसभा में सरकार की तरफ से रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा, “आर्मी के सहायक अफसरों को जंग और शांति के दौरान पूरा सपोर्ट करते हैं। वे लड़ने वाले जवान होते हैं। उनसे नौकरों की तरह काम न लिया जाए, इसको लेकर रेग्युलर इंस्ट्रक्शन जारी होते हैं, ताकि एक सैनिक का आत्मसम्मान बना रहे।” बता दें पिछले दिनों कुछ सहायकों ने अफसरों पर आरोप लगाए थे कि उनसे गुलामों की तरह काम कराया जाता है। वे जेसीओ या अपने अफसर को सपोर्ट करते हैं…
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– भामरे ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया, “एक सहायक के पास सामान्य सैनिक की ही तरह काम होता है। वह अपने अफसरों/जूनियर कमीशन्ड अफसर (जेसीओ) की जंग और शांति के वक्त मदद करता है। इसके लिए उसे बाकायदा काम दिया जाता है।”
– भामरे ने ये भी कहा, “सहायक सिस्टम अफसरों को सपोर्ट करता है। वह अफसरों और बडी के बीच बेहतर ताल्लुक बनाता है। इसके चलते यूनिट के सैनिकों में स्पिरिट बनी रहती है, जिसकी जंग और शांति के दौरान जरूरत होती है।”
और क्या बोले भामरे?
– “समय-समय पर निर्देश दिए जाते हैं कि सहायक एक लड़ने वाला जवान है और उससे नौकरों की तरह काम नहीं कराया जा सकता, ताकि एक सैनिक का आत्मसम्मान बना रहे।”
– “एक सहायक की ड्यूटी तय हैं और वह यूनिट का अभिन्न हिस्सा होता है। एक ऑपरेशन के दौरान मेंटल, फिजिकल और मोरल सपोर्ट की जरूरत होती है।”
– बता दें कि नेवी और एयरफोर्स में सहायक सिस्टम नहीं है।
इस तरह के मामले आए थे सामने
– मार्च में ही एक जवान रॉय मैथ्यू नामक जवान की बॉडी महाराष्ट्र के देवलाली कैंटोनमेंट के पास टंगी मिली थी। उसका एक वीडियो भी मिला था, जिसमें मैथ्यू ने अपने अफसरों पर घर का काम करवाने की शिकायत की थी।
– इसके कुछ दिन बाद एक सिपाही ने ऑनलाइन वीडियो पोस्ट किया था। इसमें कहा गया था कि सीनियर अफसर गुलामों जैसा काम कराते हैं।

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