आसाराम के पास 20 वकील, बोले-कोर्ट में कुछ न कहना, जज से बात कर ली है : जेठमलानी

नई दिल्ली/जोधपुर. राजस्थान से राज्यसभा सांसद और देश के नामी वकील राम जेठमलानी कहते हैं कि आसाराम बापू के केस से उनका कोई संबंध नहीं है। वे सिर्फ एक पेशी पर जोधपुर गए थे, मगर वहां देखा कि आसाराम ने करीब 20 वकील कर रखे हैं। उनसे कहा गया कि कोर्ट में कुछ मत कहिएगा, जज से बात हो चुकी है।
इसके बाद वे कभी दोबारा इस केस से नहीं जुड़े…और आसाराम आज तक जेल में हैं। अपनी बेबाकी के लिए जाने जाने वाले राम जेठमलानी से भास्कर ने कालेधन से लेकर समान नागरिक संहिता तक कई मुद्दों पर बातचीत की। पेश हैं इस बातचीत के अंश-
Q. कन्याभ्रण हत्या रोकने, इसका खुलासा करने वालों को सिक्युरिटी देने, बच्चियों के साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट और क्राइम रोकने के लिए आपकी राय में क्या कानूनी बदलाव होने चाहिए?
– मैं विश्वास नहीं कर पाता हूं कि कैसे पांच साल की मासूम के साथ इस तरह की घटनाएं हो जाती है। ये तो कोई जानवर ही कर सकता है। देश में पॉपुलेशन के रेशियों में सिक्युरिटी अरेंजमेंट नहीं हैं। लॉ कमीशन भी कहता है कि हमें 16 गुना जजों की जरूरत है, लेकिन सरकार इस पर पता नहीं क्यों खर्च ही नहीं करना चाहती है।
Q. आप अभी तो बच्चियों को लेकर दर्द की बात कर रहे हैं, वहीं नाबालिग से रेप के आरोप में जोधपुर की जेल में बंद आसाराम बापू के लिए पैरवी के लिए जाते हैं। क्या ये डुअल स्टैंडर्ड नहीं है?
मैं केवल एक ही सुनवाई में जोधपुर गया था। तब मैंने महसूस किया कि आसाराम ने पहले से ही 20 वकील कर रखे हैं। जो मुझे कहते हैं कि आप अब कुछ मत करो, हमारी जजों से बात हो गई है। तब मैं लौट आया और फिर कभी उस केस से नहीं जुड़ा। वो आज भी जेल में ही हैं, क्योंकि स्वाभाविक रूप से उनके पास उसी तरह के वकील हैं।
Q. निर्भया कांड का आरोपी घटना के समय 18 साल से कम था, ऐसे में मौजूदा कानून के चलते रिहा हो गया। फैसले के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किए और इसे गलत बताते हुए कानून में बदलाव की मांग की है, आप क्या कहेंगे?
मैं आश्वस्त हूं कि ये निर्णय टेक्निकल रूप से सही होगा, लेकिन इस बारे में दावा नहीं कर सकता हूं कि जिस कानून के तहत यह फैसला हुआ है वह सही है या नहीं। हो सकता है इस कानून में बदलाव जरूरी हो। जो लोग निर्भया कांड के नाबालिग गुनाहगार की रिहाई पर प्रदर्शन कर कानून बदलने की मांग कर रहे हैं, वे सिर्फ पॉपुलैरिटी चाहते हैं। क्योंकि अगर नया कानून भी बना लिया तो वह आगे आने वाले मामले पर ही लागू होगा, पुराने मामलों में कभी भी नहीं।
Q. आर्बिट्रेशन पर केंद्र सरकार बिल ला रही है, कंपनियों के केस सेटल करने को लेकर। आपको इसमें सरकार का क्या इरादा लग रहा है?
मुझे तो कानून में बदलाव की कोई जरूरत नहीं लगती हैं। फिर भी जब कानून बनेगा तभी पता चल पाएगा कि उसमें क्या चेज हुआ है। सरकार का इरादा भी तभी पता चल सकेगा।
Q. आज जेल में सिर्फ वे ही बंद होते हैं जिनके पास बेल करने या बड़े वकील करने के पैसे नहीं हैं। गरीबों को जो फ्री में वकील मिलते भी हैं वे जेठमलानी या कपिल सिब्बल जैसे एक्सपीरियंस्ड नहीं होते। ये कैसा ज्यूडिशियल सिस्टम है?
ये सही है कि दुनिया में सब एक जैसा तो नहीं है। मगर मैं ये बताना चाहूंगा कि मैं 90% केस फ्री में लड़ता हूं, सिर्फ 10% केसों की ही फीस लेता हूं। गरीब और जरूरमंदों के लिए केस की मेरिट को ध्यान में रखकर अवेलेबल रहता हूं। आप जो एक्सपीरियंस की बात कर रहे हैं वैसा तो रहेगा ही। कुछ वकील अच्छे हैं तो कुछ एवरेज या खराब होंगे। ये जरूरी है कि जब निशुल्क सेवा के लिए सरकारी वकीलों की सूची बने तो उसमें कुछ सीनियर वकीलों को भी रखा जाए।
Q. पावर में आते ही सरकारें अपने पॉलिटिकल एडवांटेज के लिए वर्कर्स, नेताओं और अपने लोगों के खिलाफ चल रहे मामलों को वापस ले लेती हैं, क्या ये सही है?
ये एक तरह का करप्शन ही है। मेरे हिसाब से ऐसे मामले कम ही होते होंगे। इस तरह सरकार केस वापस नहीं ले सकती है। जज इन सब चीजों को देखने के लिए हैं। उनको ये जरूर देखना चाहिए।
Q. आप अपने प्रोफेशन में एवरेस्ट पर हैं, अब उम्र के इस मोड़ पर जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो ऐसा क्या बाकी है, जो अब करना चाहेंगे?
देखिए मैं 93 साल का हो गया हूं। अब भी दौड़ रहा हूं; दुआ करो कि 100 साल तक रहूं। वैसे आपको बता दूं कि अभी 7 साल और बचे हुए हैं, जो घोटालेबाजों को सजा दिलाने के लिए ही बचे हुए हैं।

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