आसाराम के साधकों ने 1 करोड़ का चंदा इकठ्ठा कर दी गवाह को मारने की सुपारी

इंदौर. दुष्कर्म के आरोपी आसाराम और नारायण साईं के मामलों से जुड़े गवाहों पर जानलेवा हमले और हत्या के प्रकरणों में गिरफ्तार आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने गवाहों की हत्या करवाने के लिए एक करोड़ का फंड जमा किया था। इसमें इंदौर के गवाह को मारने के लिए 75 हजार की सुपारी दी गई थी। इसी के चलते वे इंदौर आए थे, लेकिन मौका नहीं मिला तो दूसरे गवाहों को टारगेट किया।
अहमदाबाद पुलिस ने सोमवार को बेंगलुरू से बासवराज उर्फ वासु अवन्ना  तल्लोई निवासी बीजापुर कर्नाटक और सेजल उर्फ ज्योति महेशभाई प्रजापति निवासी दमण को गिरफ्तार किया था। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उनसे पूछताछ की तो उन्होंने बताया आसाराम के लिए पंडाल तैयार करने वाले शैलेंद्र और वकील प्रवीण ने दोनों को गवाहों पर हमले के लिए तैयार किया था। उनका मानना था कि गवाहों के कारण ही आसाराम और नारायण साईं की जमानत नहीं हो पा रही है। उन्हीं के कहने पर आश्रम में वासु और सेजल ने शादी कर ली थी। इसके बाद उन्हें एक करोड़ का फंड जमा करने का कहा गया। इसके लिए वासु और सेजल बेंगलुरू चले गए। यहां वासु ने अपने भाई हरीश के साथ मिलकर पांच स्थानों पर चोरियां की। एक जगह से लाखों का सोना मिला, दूसरे स्थान से चांदी और रुपए मिले।

 

इंदौर आकर मौके की तलाश में रहे : वासु और सेजल 2013 में इंदौर आए थे। उन्होंने इंदौर में रह रहे गवाह सतीश वाधवानी की हत्या के लिए 75 हजार रुपए की सुपारी ली थी। वे तीन दिन इंदौर में रुके थे। उन्होंने गुजरात के एक कथित पत्रकार के माध्यम सतीश को कॉल कर कहा था कि वे आसाराम से पीड़ित हैं और यहां मदद लेने आए हैं। इंदौर आने के बाद उन्हें सूर्यदेव नगर के एक आश्रम में ठहराया गया था। वे पूरे समय सतीश को अकेले में ले जाने की कोशिश करते रहे, लेकिन सतीश लोगों से घिरा रहा।
अहमदाबाद में भी हुई थी हमले की कोशिश 
सतीश ने आरोपियों के गिरफ्तार होने के बाद अहमदाबाद के पुलिस अधिकारियों से बात की तो उन्होंने इसकी पुष्टि की। सतीश ने बताया 2014 में वे वासु के साथ अहमदाबाद गए थे। होटल से वासु जरूरी काम का कहकर चला गया था। कुछ देर बाद शंका होने पर सतीश ने भी होटल छोड़ दी। इसके बाद वहां 40-50 लोग हथियार लेकर पहुंचे थे। यह सूचना सतीश को होटल वाले से मिली थी।
दिल्ली के साधक ने दिलवाए थे हथियार 
वासु और सेजल के साथ दो अन्य साधक अंकित उर्फ सूरज और कार्तिक शूटर के रूप में जुड़ गए थे। उन्होंने मुजफ्फरनगर में एक गवाह की हत्या की थी। फिर वैद्य अमृतलाल प्रजापति को मारा, अखिल गुप्ता की भी हत्या की। इसके बाद उनका टारगेट गवाह राहुल सचान, महेंद्र चावला और सतीश वाधवानी थे। महेंद्र पर हमला हुआ, लेकिन उनकी जान बच गई।

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