इटली की दगाबाजी पर जवाब मांगेगा भारत

रोम/नई दिल्ली. इटली ने भारत को धोखा दिया है। इटली की सरकार ने दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी दो नौसैनिकों को भारत भेजने से मना कर दिया है। विपक्ष ने इटली सरकार के इस रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया की है और भारत सरकार से इटली को सख्‍त जवाब देने की मांग की है। बीजेपी ने कहा है कि वह इस मुद्दे को संसद में उठाएगी। बीजेपी के प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘हम सरकार से चाहते हैं कि वह इटली पर दबाव बढ़ाए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमें उम्मीद नहीं थी कि भारत का दोस्त इटली अपने वादे को पूरा करने में विफल होगा।’  विपक्ष के दबाव के मद्देनजर सरकार ने इटली के राजदूत को बुला कर इस मामले पर विरोध जताने का फैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 22 फरवरी को दोनों नौसैनिकों को इटली जाने की इजाजत दी थी। इटली में 24 और 25 फरवरी को चुनाव थे, जिसमें वोट देने के लिए दोनों सैनिकों ने इटली जाने की इजाजत मांगी थी। इटली सरकार की ओर से कोर्ट में अंडरटेकिंग दी गई थी कि वोटिंग के बाद दोनों नौसैनिक भारत लौटेंगे। इससे पहले भी क्रिसमस के अवसर पर दोनों को 8 दिनों के लिए इटली जाने दिया गया था। उस बार वे 3 जनवरी को भारत लौट आए थे। इसी आधार पर चुनाव में भाग लेने के लिए उन्हें जाने दिया गया था। हालांकि तब आशंका जताई गई थी कि दोनों सैनिक आने से मना कर सकते हैं।

 इटली के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बयान जारी कर दोनों नौसैनिकों के नहीं लौटने की जानकारी दी। इस मुद्दे पर इटली के विदेश मंत्रालय ने अपने नोट में लिखा है, ‘हमने भारत सरकार से मामले के हल के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के रास्ते को अपनाए जाने को कहा था। लेकिन इटली को कोई जवाब नहीं मिला। ऐसा होने की वजह से यह अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बन गया।’ इटली के विदेश मंत्रालय का कहना है कि चूंकि घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में घटी थी, इसलिए मुकदमा अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में चलना चाहिए। अब इस मामले को दोनों देशों के बीच यूनाइटेड नेशन्स कन्वेन्शन के समुद्री कानून के मुताबिक सुलझाया जाएगा।

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे देर रात इटली सरकार की सूचना मिली है। मंत्रालय मामले की बारीकी से पड़ताल कर रहा है। इस बात की संभावना है कि भारत इस मुद्दे पर कूटनीतिक आपत्ति जता सकता है।

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