इसरो ने सबसे भारी रॉकेट जी एस एल वी मार्क-थ्री का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधन संगठन-इसरो ने आज अपने सबसे भारी रॉकेट जी एस एल वी मार्क–3 और मानवरहित क्रू मॉडयूल का सफल प्रायोगिक प्रक्षेपण किया। यह बाद में बंगाल की खाड़ी में जा गिरा।

श्री हरिकोटा में मिशन नियंत्रण केन्‍द्र के वैज्ञानिक क्रू मॉडयूल के प्रक्षेपण वाहन से अलग होते ही खुशी से नाच उठे। क्रू मॉडयूल पोर्ट ब्‍लेयर से छह सौ किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में उतर गया, जहां भारतीय तटरक्षक बल उसे निकालने के लिए तैनात थे। इस मिशन की सफलता और भी ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि दो वर्ष के भीतर अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के भारत के सपने को सच करने के और एक सम्‍पूर्ण प्रक्षेपण की इसरो की योजनाओं को बढ़ावा मिला है। मिशन कन्‍ट्रोल केन्‍द्र में इसरो के अध्‍यक्ष के0 राधाकृष्‍णन ने वैज्ञानिकों से कहा कि यह बहुत महत्‍वपूर्ण दिन है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में ये बहुत ही उल्‍लेखनीय दिन है। इससे चार से पांच टन वजन के और भारी प्रक्षेपास्‍त्रों को ले जाने लायक आधुनिक प्रक्षेपण वाहन का विकास किया जा सकेगा। भारत ने विकास की यह प्रक्रिया एक दशक पहले शुरू की थी और अभी हमने सबसे भारी मानवरहित रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 का पहला प्रायोगिक प्रक्षेपण पूरा किया। जी एस एल वी–एम के-तीन परियोजना निदेशक एस0 सोमनाथ ने कहा कि भारत के शक्तिशाली रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के साथ भार ले जाने की क्षमता काफी बढ़ गई है। उन्‍होंने कहा कि इस सफलता से कक्षा में और भारी उपग्रह भेजने का आत्‍मविश्‍वास आया है। 42 दशमलव 4 मीटर लम्‍बा 630 टन वजन ले जाने में सक्षम जी एस एल वी-मार्क तीन सुबह साढ़े 9 बजे के अपने निर्धारित समय से सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र पर दूसरे प्रक्षेपण पैड से शान से रवाना हुआ। यह मिशन प्रक्षेपण से लेकर बंगाल की खाड़ी में क्रू मॉडयूल को गिराने तक 20 मिनट में पूरा हो गया। क्रू मॉडयूल का आकार एक विशाल कप केक जैसा है और इसका वजन लगभग चार टन है। इसमें तीन लोगों को रखने के लायक काफी जगह है और इसका आकार लगभग एक छोटे कमरे के बराबर है।

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