इस मौत के कुएं में जा चुकी 178 लोगों की जान, एक परिवार ने खत्म किया खौफ

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इस जगह अब तक हुईं 178 मौतें।
भोपाल. केरवा डैम में जंगल कैंप के आगे स्टॉप डैम के पास मौत के कुएं का खौफ अब खत्म हो गया है। अब तक यहां 178 लोगों की जान जा चुकी है। 22 लाख रुपए खर्च कर चट्‌टानों पर खतरनाक फिसलन भरे गहरे ढाल को पूरी तरह से पत्थरों से भर दिया गया है। यह काम विश्वास घुषे के परिवार की कोशिशों से मुमकिन हुआ।
गत 21 मार्च को उनके 16 साल के बेटे मंदार की जान यहीं गई थी, जब वह दसवीं की परीक्षा खत्म हाेने के बाद अपने दोस्तों के साथ आया था। मंदार को खोने के बाद विश्वास घुषे ने मंदार-एंड-नो-मोर अभियान शुरू किया। जलाशयों में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने और आपात स्थिति में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करने की शुरुआत की है। इसमें उनका साथ रोटरी क्लब ईस्ट भोपाल और भोपाल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने दिया।
अभियान की शुरुआत मौत के कुएं के नाम से कुख्यात इस उजाड़ जगह से की गई। इसके लिए उन्होंने वन, जल संसाधन और रेवेन्यू विभागों की मदद से केरवा डैम के कुंड और उसके आस-पास स्थित पानी से भरे गड्ढों को खाली कराया। फिसलन भरी गहरी खाइयों को बड़े-बड़े पत्थरों से भरवाया। बारिश से बने गड्ढ़ों में कंक्रीट रखकर स्थान को समतल कर दिया जाएगा। जिससे यहां पर पानी में डूबने के कारण किसी की मौत न हो। इतना ही नहीं, दो चौकीदार नियुक्त कर दिए गए हैं। इनका वेतन भी वे ही दे रहे हैं।
चार माह लगे समतल बनाने में
विश्वास कहते हैं कि बेटे को खोने के बाद हमने सपरिवार वह जगह कई बार जाकर देखी। एक ही बात दिमाग में घूम रही थी कि आखिर किस वजह से उस स्थान पर 178 लोग डूब चुके हैं। जब पानी खाली किया तो इस जगह की जानलेवा अंदरुनी संरचना सामने आई। हमने विशेषज्ञों से चर्चा की। पूरे गड्ढे को भरवाकर चट्टान के बराबर कर दिया। जून के आखिर में यह काम खत्म हुआ। हर शनिवार और रविवार को शहर के लोग बड़ी संख्या में इस इलाके में पिकनिक मनाने आते हैं। उन्हें आगाह करने के लिए गहरे पानी वाले इलाके में बेरीकेड्स लगाए जा रहे हैं।
अब कलियासोत की बारी
अभियान अभी थमा नहीं है। केरवा का काम पूरा होने के बाद कलियासोत डैम पर भी इसे शुरू किया जाएगा। विश्वास का कहना है कि जलाशयों में होने वाली दुर्घटनाओं को रोककर उन्हें सुरक्षित बनना ही अब उनके जीवन का लक्ष्य है। कलियासोत डैम में भी डूबने की घटनाएं हो रही हैं। यहां फेंसिंग लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि मंदार-एंड-नो-मोर अभियान से रोटरी मंडल 3040 और कोयम्बटूर रोटरी मंडल 3201 जुड़ गया है। ये प्रदेश के पब्लिक सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान बनाकर मैदानी स्तर पर उसका क्रियान्वयन करने में मदद करेंगे।

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