उठने लगे विरोध के स्‍वर, मुख्यमंत्री को मंदिर सुरक्षा मंच ने लिखा पत्र

गरीबों को सेवा मुहैया कराने वाले बगला धर्मशाला बिक्री प्रसंग को लेकर अब हर तरफ से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। निर्णय पर पुनर्विचार करने एवं इसमें हस्तक्षेप करने के लिए अब चारों तरफ से पत्राचार का दबाव बढ़ने लगा है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर के मंदिर सुरक्षा आंदोलन किया वाहक डॉक्टर सुंदराजन ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखा है। बगला धर्मशाला की जमीन बिक्री करने के निर्णय पर पुनः विचार करने के लिए उन्होंने निवेदन कियात निवेदन किया है।

85 वर्षीय सुंदराजन ने मुख्यमंत्री को अनुशासित ढंग से रथयात्रा आयोजित करने के लिए प्रशंसा की है। कोरोनावायरस के बीच महाप्रभु की रथयात्रा का आयोजन कर ओडिशा सरकार ने जिस प्रकार से करोड़ों लोगों के मन को जीता था, ठीक उसी प्रकार इस निर्णय पर भी पुनः विचार करने को अनुरोध किया है। बगला धर्मशाला की जमीन बेचे जाने से दाता के महत्वपूर्ण उद्देश्य का उल्लंघन हुआ है।

कन्हैया लाल ने बगला धर्मशाला को पुरी में गरीब एवं साधु-संतों के रहने के उद्देश्य से दान किया था।इस दान को विस्थापितों को देना, दाता का उद्देश्य नहीं था। धर्म के हिसाब से भी यह ठीक नहीं है। संविधान की धारा 26 के अनुसार दाता के दान एवं दान के उद्देश्य को सुरक्षित रखना उचित होने की बात भी उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है। इस प्रसंग पर पुरी के विधायक जयंत षडंगी ने केंद्र संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तथा केंद्र पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर बगला धर्मशाला की जमीन बेचने के प्रसंग में हस्तक्षेप करने के लिए अनुरोध किया है।

गौरतलब है कि 1905 में कन्हैया लाल बगला धर्मशाला को दान किया था। इस धर्मशाला को पुरी के जिलाधीश अब बेच रहे हैं। इसमें केंद्र सरकार की प्रसाद योजना के तहत 20 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है और पुरी के जिलाधीश काम बंद कर इसे बेच रहे हैं, ऐसे में इस प्रसंग पर हस्तक्षेप करने के लिए विधायक ने मांग की है।