उत्तराखंड की पांचों सीटें जीतना चाहती हैं उमा भारती

Tatpar 05/02/2014

हरीश रावत के उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनते ही भाजपा ने आक्रामक तेवर वाली संन्यासिन उमा भारती को लोकसभा चुनावों के लिए उत्तराखंड का प्रभारी बना दिया है।

मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर रखी जा रहीं उमा भारती उत्तराखंड में लंबा समय बिताती रही हैं।

केदारनाथ त्रासदी के बाद विकास और आस्था का मंत्र लेकर चुनावी मैदान में कमान संभालने की तैयारी में उमा भारती पांचों सीटने जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही हैं।

उमा भारती ने अमर उजाला को बताया कि बुंदेलखंड में उनका जन्म हुआ लेकिन उत्तराखंड में उनके प्राण बसते हैं। उन्होंने कहा, “केदारनाथ त्रासदी को प्राकृतिक आपदा बताने वाली उमा भारती का कहना है कि राहत और बचाव कार्य करने में राज्य सरकार बुरी तरह विफल रही। बहुगुणा सरकार की नाकामी ने इसे और ज्यादा भीषण बना दिया।”

मीडिया के लिए उमा भारती भाजपा के उन नेताओं में से हैं, जो अपनी पार्टी से जब भी नाराज हुईं, उत्तराखंड में केदारनाथ या ऋषिकेश चली गईं।

अब तक साधना के लिए उत्तराखंड जाने वाली उमा भारती को अब जिस तरह से प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, आरएसएस का गणित समझना मुश्किल नहीं है।

गंगा बचाओ अभियान से उमा भारती लंबे समय तक जुड़ी रही हैं। गंगा के लिए वह अनशन भी कर चुकी हैं। साधु संन्यासियों के बीच उमा भारती का बड़ा नेटवर्क रहा है।

उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों की उन्हें जमीनी जानकारी है। जनता के बीच उनका आकर्षण नरेंद्र मोदी से कम नहीं है। वे आक्रामक भाषणों की माहिर हैं।

दूसरी तरफ हरीश रावत उन कांग्रेसी नेताओं में से हैं, जिन्होंने कांग्रेस को उत्तराखंड में जमीनी स्तर पर खड़ा किया है। जब वह उत्तराखंड कांग्रेस के नेता थे, तभी कांग्रेस ने चुनाव जीता लेकिन रावत मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर एक तरह से कांग्रेस को संघर्ष में लाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

उमा भारती कांग्रेस के इस परिवर्तन को खारिज करती हैं। उनके मुताबिक, ‘हरीश रावत को मुख्यमंत्री बनाने से कांग्रेस को अब कोई लाभ नहीं होगा। जब केदारनाथ त्रासदी हुई तो हरीश रावत हरिद्वार से सांसद थे, वह केंद्र सरकार में मंत्री थे। उन्होंने क्या किया। इसलिए कांग्रेस का यह दांव बेकार है।’

उमा भारती का कहना है कि वह विकास और आस्था का समन्वय का मुद्दा लेकर चुनाव मैदान में उतरेंगी। लोगों को विकास की भी जरूरत है, आस्था की भी और पर्यावरण की भी।