अगले 48 घंटों में फिर आ सकता है तूफान, अब तक 100 लोगों की मौत

उत्तर भारत के कई इलाकों में बुधवार देर रात आए आंधी-तूफान से काफी नुकसान पहुंचा है. उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भारी तबाही हुई है. राजस्थान और यूपी में करीब सौ लोगों की मौत हुई है. उत्तर प्रदेश में कुल 64 लोगों की मौत हुई है जिनमें आगरा में सबसे ज्यादा 36 लोगों की मौत हुई है. वहीं राजस्थान में 32 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले 48 घंटे के लिए अलर्ट जारी किया है.

उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान की वजह से 156 से ज्यादा मवेशियों की भी मौत हुई है.

इस मामले में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने ट्वीट कर जानकारी दी कि उन्होंने अधिकारियों और मंत्रियों को आदेश दे दिये हैं कि प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य शुरू करें. उन्होंने लिखा कि स्थिति काबू में लाने के लिए स्थानीय कर्मचारी काम में जुट गए हैं. उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संबंधित जिलों में भारी नुकसान के लिए मुआवजा जारी करने के आदेश दिए हैं.

उत्तर प्रदेश के आगरा मंडल में आने वाले खेरागढ़, फतेहाबाद, पिनाहट और अछनेरा में आंधी तूफान से सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है. वहीं राजस्थान के  भारपुर, धौलपुर, अलवर और झुंजनु जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है. यहां सौ से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं. तेज रफ्तार आंधी-तूफान से खेतों में कटे पड़े गेंहूं की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है.

धूल की आंधी 

राजस्थान के अलवर भरतपुर और धौलपुर में कई लोगों की मौत हुई है. इन जिलों के कई इलाकों में जबर्दस्त आंधी ने जमकर तबाही मचायी और कच्चे मकान, दर्जनों बिजली के पोल और पेड़ धराशाई हो गये. कई वाहनों की आपस में टक्कर होने की भी खबर आ रही है. इन हादसों में अभी तक 24 लोगों की मौत की खबर है. बताया जा रहा है कि कई लोग घायल भी हैं और मृतकों की संख्‍या बढ़ सकती है.

पश्‍चिम बंगाल में आठ लोगों की मौत
बंगाल में बिजली गिरने और दीवार ढहने की अलग-अलग घटनाओं में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य घायल हो गये. पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. हालांकि, इससे पहले पुलिस ने बताया कि मुर्शिदाबाद जिले में चार और मौते हुई हैं जिसमें दो खरगाम, एक भरतपुर और एक सागरदीघी में हुई है. आपदा प्रबंधन मंत्री जावेद खान ने कहा कि नदिया जिले के कालीगंज में तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि उत्तर 24 परगना जिले के देगंगा में दो और आमडांगा में एक की मौत हुई है. कल्याणी में  बुधवार को एक विद्यालय की निर्माणाधीन दीवार के ढह जाने से एक छात्रा की मौत हो गयी. घटना कृष्णगंज थाना अतंर्गत मनोहरपुर प्राथमिक विद्यालय की है. मृतक छात्रा का नाम नीमा नस्कर(9) बताया गया है. वह तीसरी कक्षा की छात्रा थी. जानकारी के अनुसार तीन महीने से निर्माणाधीन विद्यालय एक दीवार बुधवार को अचानक से ढह गयी, जिसकी चपेट में आने से नीमा घायल हो गयी. स्थानीय लोगों की मदद से उसे अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उत्तर दिनाजपुर के कुमारगंज में एक और मुर्शिदाबाद के डोमकल में एक की मौत हुई है. मंत्री ने बताया कि इनमें से ज्यादातर लोगों की मौत बिजली गिरने से हुई है, जबकि दो लोगों की मौत दीवार ढहने से हुई है. पुरुलिया में चार लोग घायल हो गये और मुर्शिदाबाद के खरगाम में दो अन्य लोग घायल हो गये, जहां करीब 150 परिवार प्रभावित हुए हैं. मंत्री ने बताया कि जिला अधिकारियों द्वारा राहत सामग्रियां प्रभावित लोगों तक पहुंचाया गया है.

झारखंड में अब तक 7 मरे
झारखंड के कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर गुरुवार को भी जारी रहा. वर्षाजनित हादसों, पेड़ गिरने और वज्रपात से अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. गुरुवार सुबह से ही बोकारो जिला के गोमिया, कथारा और बोकारो थर्मल समेत कई इलाकों में झमाझम बारिश शुरू हो गयी. गुमला में आंधी-तूफान व बारिश के कारण एक बच्चे की मौत हो गयी, जबकि दर्जनों घर ध्वस्त हो गये. फसलें बर्बाद हो गयीं. पांच दिनों से बिजली ठप है. पेयजल की आपूर्ति भी नहीं हो रही है. लातेहार में भी आंधी के कारण सड़क पर पेड़ गिर गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है.

इस कारण आते हैं बवंडर

– ज्यादातर रेगिस्तान भूमध्य रेखा के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायुमंडलीय दबाव बहुत अधिक होता है।
– यह दबाव ऊंचाई पर मौजूद ठंडी शुष्क हवा को जमीन तक लाता है। इस दौरान सूरज की सीधी किरणें इस हवा की नमी समाप्त कर देती हैं।
– नमी समाप्त होने से यह हवा बहुत गर्म हो जाती है। इस कारण बारिश नहीं हो पाती है और जमीन शुष्क और गर्म हो जाती है।
– जमीन गर्म होने के कारण नमी के अभाव में धूल के कणों की आपस में पकड़ नहीं रह पाती है। ऐसे में ये हवा के साथ बहुत आसानी से ऊपर उठना शुरू कर देते हैं।
– हवा की गति 40 किलोमीटर से अधिक होने पर ये धूल कण एक बवंडर का रूप धारण कर लेते हैं।
– बवंडर के साथ धूल के कण 10 से 50 फीट की ऊंचाई तक उठते हैं। कई बार ये इससे भी अधिक ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं।

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