एमजे अकबर के खिलाफ लगे आरोपों से मंत्रालय का किनारा, निजी बर्ताव के लिए खुद ही देंगे स्पष्टीकरण

नई दिल्ली: यौन शोषण के खिलाफ चल रहे #MeToo कैम्पेन के बीच आरोपों के छींटे विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर भी आए हैं जिनके खिलाफ कई महिला पत्रकारों ने बदसलूकी के आरोप लगाए हैं. हालांकि इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. वहीं सरकार की ओर से भी इस बाबत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

इस बीच सरकारी सूत्रों का कहना है कि एमजे अकबर पर लगे आरोप उनके निजी बर्ताव से जुड़े हैं और मंत्री बनने से पहले के हैं. ऐसे में बेहतर होगा कि इस बारे में वो स्वयं ही स्पष्टीकरण दें. इससे विदेश मंत्रालय के कामकाज का कोई सीधा संबंध नहीं है.

सोशल मीडिया में एक के बाद एक सामने आ रही घटनाओं के बीच दबाव बढ़ रहा है कि नाइजीरिया में मौजूद एमजे अकबर बुधवार को भारत लौटने के बाद खुद पर लगे आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करें. महत्वपूर्ण है कि एमजे अकबर सीआईआई और एग्जिम बैंक द्वारा आयोजित भारत-पश्चिम अफ्रीका क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए नाइजीरिया गए हुए हैं. उन्हें कल लौटना है.

इस बीच सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने समाजवादी पार्टी से बीजेपी में आए नरेश अग्रवाल की जया बच्चन के खिलाफ टिप्पणी पर तो तीखा ट्वीट कर उसे अस्वीकार्य करार दिया था. लेकिन अपने ही सहयोगी मंत्री के खिलाफ महिला पत्रकारों की तरफ से आ रहे यौन शोषण के आरोपों पर वो चुप्पी साधे हुए हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि इसकी जांच होनी चाहिए और सबसे पहले जिस पर आरोप लग रहे हैं वो चुप्पी तोड़ें. प्रियंका ने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए.

विदेश राज्यमंत्री पर लगे आरोपों को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज औऱ सरकार की चुप्पी पर विपक्ष ने सवाल उठाना शुरु कर दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि खुद एक महिला होते हुए सुषमा स्वराज अब तक कैसे चुप हैं? एमजे अकबर अब तक ख़ामोश क्यो हैं? मामले पर पीएम जवाब दें. जो बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ की बातें करते थे वो चुप्पी तोड़ें.” उन्होंने अकबर का बचाव करने और महिलाओं के खिलाफ बोलने के लिए उदित राज की भी आलोचना की.

बीजेपी नेता उदित राज ने ट्वीट कर कहा कि ‘#MeToo कैम्पेन जरूरी है लेकिन किसी व्यक्ति पर 10 साल बाद यौन शोषण का आरोप लगाने का क्या मतलब है? इतने सालों बाद ऐसे मामले की सत्यता की जांच कैसे हो सकेगा? जिस व्यक्ति पर झूठा आरोप लगा दिया जाएगा उसकी छवि का कितना बड़ा नुकसान होगा ये सोचने वाली बात है. गलत प्रथा की शुरुआत है.”

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