‘…ऐसा लग रहा था जैसे भगवान शिव तांडव कर रहे हों’

tatpar 22 june 2013

बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहे उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग में चार दिन फंसे रहने के बाद वापस लौटीं कर्नाटक की पूर्व मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि यह भयावह अनुभव था और एक हजार तीर्थयात्रियों के उनके समूह को ऊंचे पहाड़ों और उफनती गंगा के बीच कई रातें जागते हुए गुजारनी पड़ीं.

शोभा ने कहा, ‘उत्तराखंड की त्रासदी ने मुझे हॉलीवुड की फिल्म ‘2012’ की याद दिला दी, जिसे मैंने कुछ वर्ष पहले देखा था. मुझे लगा कि भगवान शिव तांडव कर रहे हों, संभवत: रूद्रप्रयाग के इलाके में पारिस्थितिकी को हो रहे नुकसान से नाराज होकर.’

पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार में मंत्री रहीं और बाद में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की पार्टी में शामिल हुईं शोभा ने कहा, ‘हमारे समूह में करीब एक हजार लोग थे.’

पूर्व मंत्री जब गंगोत्री से वापस लौट रही थीं उसी दौरान 15 जून को भूस्खलन शुरू हुआ.

उन्होंने कहा, ‘मैं भाग्यशाली थी कि मेरी कार सुरक्षित स्थान पर पहुंच गई. हमारे पीछे आ रही गाड़ी के खाई में गिरने से उसमें सवार तीन लोगों की मौत हो गई.’

उन्होंने कहा, ‘हम ऊंचे पहाड़ों और उफन रही गंगा के बीच फंसे हुए थे. ऊपर के इलाकों में भूस्खलन हो रहा था. एक रात तो मैं अपनी गाड़ी से बाहर भी नहीं आ सकी.’

कुछ दूर यात्रा करने के बाद शोभा की कार कांडीयाखंड में फंस गई. वे लोग वहां से पहाड़ी चढ़कर बुडला पहुंचे. जहां वह चार दिन तक फंसी रहीं.

शोभा ने बताया कि तीर्थयात्रियों के उनके समूह में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और राजस्थान के लोग थे. ज्यादातर बुढ़ी महिलाएं और बच्चे थे. उनके पास खाने की थोड़ी सी चीजें थी. बच्चे बीमार पड़ गए लेकिन उनकी सुध-बुध लेने के लिए कोई डॉक्टर नहीं था.

उन्होंने कहा, ‘नदी के उफान के चलते और भूस्खलन की आशंकाओं के चलते हम सो नहीं पा रहे थे.’

शोभा ने बताया कि स्थानीय लोगों ने उनकी बहुत मदद की. वे ‘बेहद मददगार’ थे. चूंकि नदी खतरनाक स्थिति में थी, उन्हें दूरदराज से पानी लाना पड़ता था. स्थानीय लोगों ने इसमें उनकी मदद की और उन्हें अपनी मोटर साइकल से वहां ले गए.

उन्होंने बताया कि ज्यादा सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए उन्हें पैदल चलना पड़ा. स्थानीय लोग उन्हें मोटर साइकल से कुछ दूर ले गए.

शोभा ने बताया कि गंगोत्री में उनकी मुलाकात कर्नाटक के कुछ तीर्थयात्रियों से हुई, लेकिन केदारनाथ और अन्य स्थानों में फंसे तीर्थयात्रियों के साथ उनका मोबाइल संपर्क था.