कांग्रेस नेताओं की चापलूसी के पांच अनोखे मामले

tatpar 19 june 2013

राजनीति में चापलूसी या अपने नेताओं की अंधभक्ति की पुरानी परंपरा रही है. ऐसे अनेक नेता हुए हैं, जिन्होनें इस परंपरा को परवान चढ़ाने की मिसाल कायम करके सुर्खियां बटोरीं हैं. कई कांग्रेसी नेता पार्टी नेतृत्व की प्रति अपने स्नेह को प्रदर्शित करने में अतिरंजना करने से हिचकते नहीं.

चरण दास महंत, केन्द्रीय राज्य मंत्री

इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कांग्रेसी नेताओं की सूची में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख चरण दास महंत का नाम भी जुड़ गया है.

सोमवार को उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि “मैं वही करता हूं जैसा पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी और राहुल आदेश देते हैं. अगर सोनिया गांधी आदेश दें तो मैं छ्त्तीसगढ़ के कांग्रेस कार्यालय में झाड़ू लगाने को भी तैयार हूं. उनका आदेश मेरे लिए सर्वोच्च है.”

वे वर्तमान में केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री हैं.

कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में चापलूसी और अतिरेक भरे बयानों की परंपरा बहुत पुरानी हैं. आज से 31 साल पहले भी इसी तरह का बयान दिया गया था.

ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व राष्ट्रपति

इंदिरा गांधी ने जब ज्ञानी जैल सिंह को 1982 में राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया तो उसके जवाब में कहा था, “मैं इंदिरा गांधी के लिए कुछ भी कर सकता हूं. अगर इंदिरा गांधी कहें तो मैं उनके घर में झाड़ू लगाने को भी तैयार हूं.”

देवकांत बरुआ, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष

देवकांत बरुआ को उनके उस कथन के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होनें कहा था कि “इंदिरा भारत हैं, भारत इंदिरा है”

इसे  इंदिरा गांधी की चापलूसी और अतिशयोक्ति भरी तारीफ वाले मुहावरे के रुप में याद किया जाता है.

देवकांत भारत में 1975 से 1977 के दौरान लगे आपातकाल के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे.

उनको इंदिरा गांधी के सबसे निष्ठावान समर्थकों के रुप में देखा जाता था.

शंकरसिंह वाघेला, पूर्व केन्द्रीय मंत्री

2004 में सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री न बनने पर तत्कालीन कपड़ा मामलों के मंत्री शंकरसिंह वाघेला ने कहा, “महात्मा गांधी के बाद भारतीय इतिहास में त्याग करने वाले लोगों में सोनिया गांधी का नाम आता है.”

उन्होनें प्रेस वार्ता में कहा कि “भारतीय राजनीति के इतिहास में सोनिया गांधी जैसा महान त्याग किसी और व्यक्ति ने नहीं किया.”

अभय अवस्थी, कांग्रेस समन्वयक

 कुंभ मेले में किसान कांग्रेस के समन्वयक अभय अवस्थी को सोनिया गांधी को झांसी की रानी के रुप मे दिखाने वाले बैनरों पर नोटिस थमाया था.

जिसके जवाब में अवस्थी ने कहा कि ऐसा करना पार्टी नेतृत्व के प्रति उनकी स्वामिभक्ति को दर्शाता है.

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