नई दिल्ली. कांग्रेस ने योजना आयोग (नीति आयोग) के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर किए एक दावे को खारिज कर दिया। अहलूवालिया के मुताबिक, राहुल गांधी द्वारा अध्यादेश फाड़े जाने के बाद मनमोहन सिंह ने इस्तीफे की पेशकश की थी। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सोमवार को इस बारे में सफाई दी। कहा- राहुल गांधी हमेशा मनमोहन सिंह को अपना गुरु मानते आए हैं। ऐसे में उनके अनादर या अपमान का सवाल ही नहीं है। अहलूवालिया ने अपनी किताब ‘बैकस्टेज: द स्टोरी बिहाइंड इंडिया हाई ग्रोथ ईयर्स’ में खुलासा किया था कि मनमोहन राहुल गांधी के अध्यादेश फाड़ने वाले घटनाक्रम से आहत थे और वह प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहते थे। 

यह अध्यादेश यूपीए सरकार 2013 में लाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दागी जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने के खिलाफ फैसला दिया था। इस फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए यूपीए सरकार ने अध्यादेश जारी किया था। तब राहुल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस अध्यादेश को बकवास बताते हुए कहा था कि इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए। इस घटनाक्रम से यूपीए सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।

राहुल चाहते थे कि राजनीति साफ-सुथरी रहे: सुरजेवाला

सुरजेवाला ने कहा कि हमें दोनों (सिंह और अहलूवालिया) के बीच हुई बातचीत की जानकारी नहीं है, लेकिन हम कह सकते हैं कि राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह को हमेशा अपना गुरु माना। राहुल के दृष्टिकोण पर उन्होंने कहा- सुप्रीम कोर्ट ने अब तमाम राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया कि आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्‍मीदवारों की पूरी प्रोफाइल पार्टी की वेबसाइट पर अपलोड की जाए। यह राहुल के रुख की पुष्टि करता है। जब सभी राजनीतिक दल अध्यादेश के साथ आगे बढ़ने के लिए सहमत थे, तब राहुल गांधी ने इसे बदलने की कोशिश की। क्योंकि, वे चाहते थे कि ‘राजनीति की गंगा साफ हो’।

राहुल गांधी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया: अगलूवालिया

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में अहलूवालिया ने कहा था- राहुल ने उस समय कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। भविष्य को देखते हुए मुझे लगता है सिंह ने सही फैसला लिया। अहलूवालिया ने इसका कारण बताते हुए कहा- राहुल गांधी अगर मंत्रिपरिषद के सदस्य होते, तो चीजें अलग होतीं। लेकिन उस समय वे कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे। राहुल ने अपनी सोच को लेकर सिंह को अंधेरे में रखा। राहुल के शब्दों का चयन और बेहतर हो सकता था।

उन्होंने कहा- आपको इसका एहसास होना चाहिए कि लोकतंत्र में असंतोष होना गलत नहीं है। मुझे नहीं लगता कि एक पार्टी को चलाने में बहुत योग्यता की जरूरत है, जहां पार्टी में हर कोई शीर्ष नेतृत्व का समर्थन करता है।

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