केंद्रीय मंत्री अनिल दवे का निधन: चाहते थे मेरी याद में पेड़ लगाएं-नदियां बचाएं

नई दिल्ली.केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल माधव दवे का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 61 साल के थे। गुरुवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के एम्स में एडमिट कराया गया। जहां दवे ने आखिरी सांस ली। नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इसे निजी क्षति बताया है। दवे 2009 से मध्य प्रदेश से राज्यसभा के मेंबर थे। लंबे वक्त से आरएसएस से जुड़े रहे। नर्मदा और पर्यावरण की बेहतरी के लिए उन्होंने काम किया। दवे चाहते थे कि हो सके तो मेरी याद में सिर्फ पेड़ लगाएं और नदियां बचाएं। इसबीच, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।
नर्मदा के किनारे होगा अंतिम संस्कार…
– 23 जुलाई, 2012 को लिखा दवे का एक लेटर सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा, ”मेरा दाह संस्कार बांद्राभान (होशंगाबाद) में नर्मदा के किनारे किया जाए। मेरी याद में कोई स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रतिमा न हों। बल्कि पेड़ लगाएं और नदियों-तालाबों को बचाने की कोशिश करें तो खुशी होगी।”
– इसबीच, सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि दवे की इच्छा के मुताबिक, शुक्रवार को नर्मदा किनारे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बीजेपी सूत्रों ने बताया कि शाम तक दवे का पार्थिव शरीर निजी विमान से भोपाल लाया जाएगा और अंतिम दर्शन के लिए प्रदेश बीजेपी ऑफिस में रखा जाएगा।
– बता दें कि अनिल दवे का जन्म 6 जुलाई, 1956 को उज्जैन के पास बड़नगर में हुआ। उन्होंने गुजराती कॉलेज, इंदौर से एम.कॉम किया। वे संघ प्रचारक रहे और शादी नहीं की थी।
मोदी ने कहा- कल शाम ही हमने मीटिंग की
– पीएम ने शोक जताते हुए कहा, “दोस्त और एक आदर्श साथी के तौर पर अनिल दवे जी के निधन से दुखी हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। लोक हित के काम के लिए दवेजी को याद रखा जाएगा। कल शाम ही वो मेरे साथ थे। हमने कुछ पॉलिसी इश्यू पर चर्चा भी की थी। उनका जाना मेरे लिए निजी क्षति है।”
– प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने कहा, ”केंद्रीय मंत्री अनिल दवे के निधन से दुख पहुंचा। उनके परिवार और शुभचिंतकों के लिए मेरी संवेदनाएं।”
– सोनिया गांधी ने कहा, ”दवेजी के आकस्मिक निधन से धक्का लगा। वह अच्छे वक्ता और जेंटलमैन थे। अपने नम्र स्वभाव के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्हें मेरी श्रद्धांजलि।”
दो सेशन मेंसंसद नहीं पहुंचे थे
– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दवे संसद के पिछले दो सेशन में नहीं पहुंचे थे। तबीयत ठीक नहीं होने के चलते छुट्टी पर थे। सिर्फ मेडिकल चेकअप के लिए संसद आते थे।
– उनकी गैर-मौजूदगी में प्रकाश जावड़ेकर सदन में कामकाज संभाल रहे थे।
देश ने मां नर्मदा का सपूत खो दिया: शिवराज सिंह
– शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”बड़े भाई, घनिष्ठ मित्र अनिल माधव दवे के असामयिक निधन से हैरान हूं। उनके रूप में देश ने सच्चा देश भक्त और मां नर्मदा का सपूत खो दिया।”
– प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ”दवेजी एक सच्चे प्रकृति प्रेमी थे। पर्यावरण की रक्षा और विकास के लिए उनके काम को याद रखा जाएगा।”
– राजनाथ सिंह ने कहा, ”कैबिनेट के साथी दवेजी के लिए निधन से गहरा धक्का लगा। वह पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर काफी संवेदनशील और बहुत जुझारू थे। उनके परिवार के लिए मेरी संवेदनाएं।”
– रमन सिंह ने कहा, ”अनिल दवेजी के अचानक निधन से दुखी और हैरान हूं। शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें।”
– बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ”मैंने दवेजी के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में बीजेपी के लिए काम किया। वो बहुत अच्छे लेखक, चिंतक और पर्यावरण के जानकार थे। नर्मदा संरक्षण के लिए उन्होंने कई अहम काम किए। शरीर साथ नहीं देता था तो हेलिकॉप्टर से नर्मदा की परिक्रमा की। उनके निधन से देश ने एक बड़ा नेता खो दिया।”
– कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “दवेजी के निधन से मध्य प्रदेश ने एक श्रेष्ठ पर्यावरणविद् और सुलझा हुआ राजनेता खो दिया, मेरी विनम्र श्रद्धांंजलि।”
कैसा रहा राजनीतिक करियर?
– दवे ने इंदौर के कॉलेज से मास्टर डिग्री ली। यहां वे स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट चुने गए। इसके बाद जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़ गए थे।
– इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक बने। बीजेपी को मध्य प्रदेश की सत्ता में वापस लाने में अनिल दवे का भी अहम योगदान रहा।
– 2009 से अब तक मध्य प्रदेश से राज्यसभा मेंबर थे। मोदी सरकार में जुलाई, 2016 में वन और पर्यावरण राज्य मंत्री बने।
– दवे की कोशिशों से कुछ दिन पहले सरसो की जीएम फसल को पर्यावरण मंत्रालय ने कारोबारी खेती की मंजूरी दी थी। क्लाइमेट चेंज पर पेरिस समझौते में भारत का पक्ष रखने के लिए दवे ने अहम भूमिका निभाई।
अच्छे लेखक और विचारक भी थे?
– दवे पर्यावरण के चिंतक होने के साथ अच्छे लेखक भी थे। उन्होंने पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज के अलावा कई विषयों पर किताबें लिखीं।
– जिनमें Beyond Copenhagen, Yes I Can So Can We, Creation to Cremation, rafting through a civilization: a travelogue, शताब्दी के पांच काले पन्ने, संभल के रहना अपने घर में छुपे हुए गद्दारों से, महानायक चंद्रशेखर आजाद, रोटी और कमाल की कहानी, समग्र ग्राम विकास प्रमुख हैं।

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