केबीसीः कबाड़ी से करोड़पति तक

Tatpar 17 Sep 2013

अमिताभ बच्चन की मेज़बानी में केबीसी के सीज़न सात में राजस्थान के उदयपुर के ताज मोहम्मद एक करोड़ का इनाम जीतने वाले पहले विजेता बन गए हैं।

ताज मोहम्मद उदयपुर के गांव कनौड़ में रहते हैं। पढ़ाई में साधारण रहे हैं। कंप्यूटर चलाना नहीं जानते।

ताज मोहम्मद ने जीवन में कड़े संघर्ष किए हैं। एक वक़्त ऐसा था जब उन्होंने केवल 20 रुपए रोज़ पर कबाड़ी का काम किया। फिर 4,500 रुपए रोज़ पर एक एनजीओ में काम किया।

इसके बाद वे सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगिता परीक्षाएं देने लगे। आज वे सरकारी नौकरी करते हैं।

ताज मोहम्मद बताते हैं, “एक वक़्त ऐसा भी था जब हमारे पास पैसे नहीं थे, और हम पुराना केस हार चुके थे। हमारे घर की नीलामी के काग़ज़ भी निकल चुके थे।”

ताज मोहम्मद को जीवन में बहुत सारी असफलताएं भी मिलीं लेकिन उन्होंने हौसला नहीं हारा। उन्हें उम्मीद थी कि कभी न कभी अच्छा होगा। और हुआ। उन्होंने केबीसी में एक करोड़ रुपए जीते।

एक करोड़ कैसे ख़र्च करेंगे?
ताज मोहम्मद के पास केबीसी में जीते गए एक करोड़ रुपए को खर्च करने की ख़ास योजना है।

उन्होंने बताया, “सबसे पहले मैं अपनी बेटी की आंखों का इलाज करवाना चाहता हूं। उसकी दिमाग़ की नसें दबी हुई हैं। दूसरी योजना है कि इन पैसों से अनाथ लड़कियों की शादी करवाऊं। मेरी तीसरी प्राथमिकता है अपना एक मकान बनवाना।”

ताज मोहम्मद दुनिया भर में लड़कियों के साथ हो रही ज्यादतियों पर काफ़ी संवेदनशील हैं। वे मादा भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ लड़ना चाहते हैं। वे अपने पैसों का अधिकांश हिस्सा सामाजिक कार्यों में लगाना चाहते हैं।

वे सोचते हैं, “मैं अगर दूसरे की बेटियों के लिए करूंगा तो मेरी बेटी को सबकी दुआएं लगेंगी, और वो ठीक हो जाएगी।”

हमेशा दूसरे नंबर पर
ताज मोहम्मद स्कूल में पढ़ाते हैं। उन्होंने इतिहास में एमए किया हुआ है। बीएड भी किया है। मगर एक अनोखी बात है कि वे स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई में बहुत बेहतर नहीं रहे।

ताज बताते हैं, “मैं पढ़ने में बहुत तेज़ कभी नहीं रहा। हमेशा सेकेण्ड ही आता था। मगर पढ़ने की ललक थी इसलिए पढ़ता गया।”

ताज मोहम्मद उदयपुर के कानौड़ गांव में रहते हैं। उन्हें मेट्रो सिटी में बसना पसंद नहीं।

इसका कारण वे बताते हैं कि वे जहां रहते हैं वहां का माहौल उन्हें बहुत पसंद हैं। लोग मिलनसार हैं, सबकी सोच अच्छी है।

एक और ख़ास बात है कि वे जहां रहते हैं वहां शिक्षा का माहौल बहुत अच्छा नहीं है। वहां के बच्चे आगे पढ़ने के लिए बाहर जाते हैं। उनके इलाक़े में बस एक ही कॉलेज है।

करोड़पति बनने के बाद बदलाव
ताज मोहम्मद के करोड़पति बनने से लोगों के बीच उनकी स्वीकार्यता, पहचान बदली है। बहुत तारीफ़ें मिलीं। मीडिया ने कवर किया। मगर ताज इतने संकोची है कि कहते हैं, “मैं इतना क़ाबिल भी था कि वहां तक पहुंच गया?”

वे चाहते हैं कि इतने पैसे मिलने के बाद भी वे पहले की तरह आम जीवन जीएं। लोगों से पहले की तरह मिलें, बातें करें।

वे कहते हैं, “पैसों से जिंदगी का फैलाव तो आ जाएगा, ज़िंदगी की गहराई नहीं आ पाएगी।”

ताज मोहम्मद की बेटी सुफ़िया अभी पहली कक्षा में पढ़ती है। एक पिता के तौर पर ताज बेहद खुली सोच के हैं। वे अपनी इच्छाएं और सपने बेटी पर थोपना नहीं चाहते। वे उसे ख़ूब पढ़ाना चाहते हैं।

वे कहते हैं, “मैं जब अजमेर ग़रीब नवाज़ के यहां गया था तो यही दुआ मांगी थी कि बेटी हो. बेटे की कोई चाह नहीं है। जब बेटी हुई तो मैं ख़ुद को दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत इंसान समझने लगा।”

‘करोड़पति सर’
ताज मोहम्मद मानते हैं कि केबीसी में एक करोड़ जीतने के बाद स्कूल में लोगों का उनके प्रति नज़रिया ही बदल गया। सब कहते हैं, ये करोड़पति सर हैं।

केबीसी में अपनी जीत के बारे में वे कहते हैं, “इस दौर में सबसे ज्यादा दुआएं काम आती हैं, वरना ज्ञान तो साइड में रह जाता है। ज्ञान तो आप तब दिखाएंगे जब हॉट सीट पर आएंगें।”

मोहम्मद रंगरेज़ को उम्मीद नहीं थी कि वे हॉट सीट पर पहुंचेगें। क्योंकि उन्हें कंप्यूटर चलाना नहीं आता।

वे बताते हैं, “मैं कंप्यूटर चलाना नहीं जानता। शुरू में ख़ूब ग़लतियां हुई थीं। मुश्किल से पहुंच गया तो फिर सवालों का सिलसिला शुरू हुआ।”

ताज को कंप्यूटर स्टार्ट और बंद करना भी नहीं आता। मगर वे केबीसी की टैगलाइन “सीखना बंद तो जीतना बंद” में गहरा विश्वास रखते हैं।

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