कैबिनेट की बैठक में ‘अयोध्या तीर्थ विकास परिषद’ के गठन को मिल सकती है मंजूरी; 5 सदस्यीय परिषद के अध्यक्ष होंगे योगी

लखनऊ. अयोध्या में भगवान रामलला के मंदिर के निर्माण के लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के गठन को लेकर अपना कदम बढ़ा दिया है। सूत्रों की मानें तो सरकार तक परिषद बनने का प्रस्ताव पहुंच गया है। मंगलवार को होने वाली कैबिनेट में इस प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जा सकता है। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने की पूरी संभावना है। सूत्रों के अनुसार, जो प्रस्ताव तैयार किया गया है उसके मुताबिक अयोध्या तीर्थ विकास परिषद में 5 सदस्य होंगे। अयोध्या तीर्थ विकास परिषद अगले दो साल में अयोध्या की तस्वीर बदलने के लिए काम करेगा।

सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के अध्यक्ष होंगे। अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का फोकस अयोध्या को स्मार्ट और नव अयोध्या बनाने के लिए होगा। वहीं, लोक निर्माण, पर्यटन, वित्त, संस्कृति, नगर विकास, परिवहन, वन, पर्यावरण विभागों के प्रमुख सचिव एवं सचिव इसके सदस्य होंगे। इस संबंध में जल्द शासनादेश जारी करने की तैयारी है।

रामनगरी के विकास पर 250 करोड़ रुपए किए जाएंगे ख़र्च
ट्रस्ट के गठन के बाद अयोध्या के विकास के लिए 250 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। अयोध्या तीर्थ विकास परिषद केंद्र और राज्य सरकार के साथ मिलकर अयोध्या के विकास के लिए फैसले लेगा। इसके अलावा राम मंदिर के लिए अयोध्या में आधारभूत ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी भी अयोध्या तीर्थ विकास परिषद की होगी। उत्तर प्रदेश सरकार अपने बजट में अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के लिए अलग से बजट देगी। जो ट्रस्ट के सदस्यों के साथ अयोध्या के विकास के लिए प्लान तैयार करेगी। परिषद स्वतंत्र होकर ढांचागत विकास व लाभ के लिए आर्थिक नीतियां बनाने से लेकर पर्यटन और प्रबंधन का अधिकार होगा।

ब्रज तीर्थ परिषद जैसा होगा, अनापत्ति प्रमाण पत्र भेजे गए पत्र
अयोध्या जिला प्रशासन ने शासन में अयोध्या विकास प्राधिकरण से भूमि के विकास संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र समेत संस्था का अंग बनने वाले विभागों से आवश्यक रिपोर्ट शासन को भेज दी है। उत्तर-प्रदेश अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का स्वरूप ब्रज तीर्थ परिषद जैसा होने की उम्मीद जताई जा रही है। यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद, उत्तर प्रदेश ब्रज नियोजन और विकास बोर्ड (संधन) अध्यायम 2017 (यू.पी. अधिनियम संख्या 3 2017) के अंतर्गत बनाई गई है, जिसमें ब्रज विरासत की सौंदर्य गुणवत्ता को बनाए रखने, विकसित करने और बनाए रखने की योजना तैयार की गई है।

अयोध्या समेत पांच जिलों आएंगे दायरे में
परिषद के दायरे में रामनगरी के 100 वर्ग किमी के भू-भाग समेत पांच जिलों से होकर गुजर रहे 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का क्षेत्र होगा। अयोध्या के साथ बाराबंकी, गोंडा, बस्ती व अंबेडकरनगर जिले से होकर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग गुजरा है, जिसकी कुल लंबाई करीब 252 किमी है, जिसके किनारे तमाम रामायणकालीन स्थलों के साथ सिद्ध ऋषि-मुनियों की तपस्थली और मठ-मंदिर भी हैं। 84 कोसी परिक्रमा की शुरूआत ही बस्ती के मखौड़ा नामक स्थल से होती है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्ठी यज्ञ किया था, जिसके बाद स्वयं भगवान विष्णु स्वरूप राम समेत चारों भाई भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ था। इन्हीं के प्रताप से रावण का वध हुआ और बाद में राजसूय यज्ञ कर अयोध्या विश्व विजयी कहलाई।

19 फरवरी को हो सकती है राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट की पहली बैठक

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से घोषित किए गए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक नई दिल्ली में 19 फरवरी को होने की संभावना है। इसी दौरान राम मंदिर निर्माण की तारीख की घोषणा की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार जिन तारीखों पर विचार हो सकता है कि उसमें रामनवमी (12 अप्रैल) या अक्षय त्रितिया (26 अप्रैल) शामिल हैं। सूत्रों का दावा है कि बैठक में ट्रस्ट में शामिल किए गए सभी लोग मौजूद रहेंगे। 

इससे पहले पीएम मोदी ने 5 फरवरी को संसद में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए जाने की घोषणा की थी। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों को शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद के मुददे की सुनवाई के दौरान अपने फैसले में केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह तीन महीने के भीतर ट्रस्ट का निर्माण करे।

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