कोरोनावायरस : बैंकॉक से कोलकाता लौटे दो यात्री संक्रमित, दिल्ली एयरपोर्ट पर भी संदिग्ध की जांच; चीन में एक दिन में 242 मौतें

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट पर गुरुवार को दो यात्री कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने बताया कि दोनों यात्री थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक से आए थे। अब कोलकाता में कोरोनावायरस के मरीजों की तादाद तीन हो गई है। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गुरुवार को स्पाइसजेट की फ्लाइट से चीन से लौटे एक यात्री को संदिग्ध पाया गया। उसकी जांच की जा रही है। चीन में इस वायरस से एक दिन में 242 मौतें हुईं। वहां अब मौतों का आंकड़ा 1365 हो गया है। कोरोनावायरस के 59 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, जापान के योकोहोमा तट पर फंसे डायमंड प्रिंसेस क्रूज पर अब तक 218 लोगों की जान गई।

क्रूज पर मौजूद भारतीय सुरक्षा अधिकारी सोनाली ठाकुर ने बुधवार को भारत सरकार से मदद की अपील की। एक न्यूज चैनल से वीडियो के जरिए हुई बातचीत में उन्होंने कहा- संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हमें डर है कि हम भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। हम बस घर वापस जाना चाहते हैं।

  • अमेरिका की प्रमुख विमान सेवा कंपनी यूनाइटेड एयरलाइंस ने कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच चीन जाने वाली उड़ानों को 24 अप्रैल तक स्थगित रहने देने का फैसला किया है।
  • वियतनाम ने गुरुवार को घोषणा की कि कोरोनावायरस के संक्रमण की आशंका के कारण 10 हजार लोगों को 20 दिन तक निगरानी में रखा जाएगा। अब तक देश में 15 मामलों की पुष्टि हुई है।

बुधवार को 2 भारतीय में संक्रमण की पुष्टि हुई

इससे पहले डायमंड प्रिंसेज क्रूज पर सवार दो भारतीय बुधवार को कोरोनावायरस से संक्रमित पाए गए थे। जापान में भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी दी। दूतावास ने बताया कि यात्रियों और क्रू मेंबर समेत 160 भारतीय इस जहाज पर सवार हैं। जापान में वायरस का संक्रमण न फैले इसके लिए क्रूज को 19 फरवरी तक पोर्ट पर ही रोके रखने का फैसला किया गया है। शिप में कुल 3711 लोग सवार हैं।

डब्ल्यूएचओ ने कोरोनावायरस का नाम कोविड-19 रखा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मंगलवार को नोवेल कोरोनावायरस का नया आधिकारिक नाम ‘कोविड-19’ रखा। को- कोरोना, वि- वायरस और डी का मतलब डिजीज है। चीन के हेल्थ कमीशन ने 8 फरवरी कोरोनावायरस का नाम बदलकर नोवेल कोरोनावायरस निमोनिया (एनसीपी) कर दिया था।

सरकार कोरोनावायरस के खतरे को गंभीरता से नहीं ले रही : राहुल गांधी

इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कोरोनावायरस को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने ट्वीट किया था- कोरोनावायरस हमारे लोगों और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है। मेरी समझ से सरकार इस खतरे को गंभीरता से नहीं ले रही है। उधर, आंध्र प्रदेश में 50 साल के व्यक्ति ने कोरोनावायरस से संक्रमण की आशंका के बाद मंगलवार को आत्महत्या कर ली। उनका इलाज करने वाले डॉक्टर ने पुष्टि की कि उसे वायरल था, उसमें कोरोनोवायरस के कोई लक्षण नहीं थे। रिश्तेदारों ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए खुदकुशी कर ली।

चीन से दवा सप्लाई ठप; भारत में अप्रैल तक का स्टॉक बचा, निर्यात पर रोक संभव

चीन में फैले कोरोनावायरस की वजह से भारत में दवाओं का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। भारत के पास अप्रैल तक का दवा स्टाॅक बचा है। दवाओं की कीमत न बढ़े और इस स्थिति से कैसे निपटा जाए, इसके लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है। इसमें 8 अहम तकनीकी विभागों के विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। कमेटी ने एक प्राथमिक रिपोर्ट भी सरकार को सौंप दी है। इसमें कहा गया है कि अगले एक महीने में चीन से सप्लाई शुरू नहीं हुई तो गंभीर हालात पैदा हो सकते हैं। भारत में चीन से 80% एपीआई (दवा बनाने का कच्चा माल) आता है। चीन से करीब 57 तरह के मॉलिक्यूल्स आते हैं। 19 तरह के कच्चे माल के लिए भारत पूरी तरह से चीन पर ही निर्भर है। 

वायरस फैलने के बाद चीन में उत्पादन बंद हुआ

चीन में जनवरी में छुटि्टयां थीं, इसलिए कच्चा माल कम आया था। उसके बाद वायरस फैल गया और चीन में उत्पादन तत्काल रोक दिया गया। इस वजह से सप्लाई एक महीने से ठप है। वहां स्थिति सामान्य होने के बाद जब उद्योग शुरू होंगे तो समुद्री रास्ते से भारत तक दवा पहुंचने में कम से कम 20 दिन लगेंगे।

दूसरे देशों पर भी इसका प्रभाव

इस स्थिति को देखते हुए उच्चस्तरीय सूत्र कह रहे हैं कि सरकार दवाओं के निर्यात पर रोक लगा सकती है। भारत से अलग-अलग देशों में हर साल 1.3 लाख करोड़ रु. की दवा निर्यात की जाती है। देश में कुल ढाई लाख करोड़ रु. का दवा कारोबार है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि चीन में हालात नहीं सुधरे तो भारत में एंटीबॉयोटिक्स, एंटी डायबिटिक, स्टेरॉयड, हॉर्मोन्स और विटामिन की दवाओं की कमी हो सकती है। न सिर्फ भारत, बल्कि विश्व के कई दूसरे देशों में भी चीन से ही एपीआई मंगाई जाती है। इसलिए समस्या और गंभीर हो सकती है।

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