कोरोना के कारण गुजरात को 10 हजार करोड़ का नुकसान

अहमदाबाद. गुजरात में कोरोना के कारण राज्य सरकार का स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ गया है। दूसरी तरफ शेष सभी आय बंद हो गई है। इन हालात में राज्य के आर्थिक संकट को दूर करने के लिए आय प्राप्ति की दिशा में कदम उठा रही है।

कोरोना पर रोज एक करोड का खर्च

इस समय सरकार कोरोना पर हर रोज एक करोड़ रुपए खर्च कर रही है। पिछले दो महीनों में सरकार की तिजोरी से 10 हजार करोड़ से भी अधिक का नुकसान हो चुका है। ऐसे में खर्च की पूर्ति के लिए राज्य सरकार केंद्र से विशेष पैकेज मांगेगी। इसके अलावा अन्य विभागों के बजट में कटौती भी करेगी।

कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए अध्ययन

गुजरात के नए 1-वर्ष के बजट में विभिन्न विभागों के लिए आवंटित धनराशि का उपयोग कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कैसे किया जा सकता है, इस पर अध्ययन शुरू किया गया है, क्योंकि राज्य का एक साल का स्वास्थ्य बजट भी कोरोना से लड़ने के लिए कम हो सकता है। हालांकि सबसे बड़ा सवाल सरकार के कर राजस्व का है। यदि कर राजस्व में गिरावट आती है, तो यह वित्तीय वर्ष के अंत में, यानी 31 मार्च, 2021 को बड़ा झटका दे सकता है।

स्वास्थ के लिए आवंटित 11,243 करोड़ कोरोना पर खर्च करना संभव नहीं

2020-21 के लिए गुजरात का बजट 2.17 लाख करोड़ रुपए का है। सरकार ने कृषि विभाग के लिए बजट से 7,423 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जिसमें कोई कटौती नहीं की जा सकती है। जल संसाधनों के लिए सबसे अधिक 7,220 करोड़ रुपए और शिक्षा के लिए 31,995 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जबकि सरकार ने पहली बार स्वास्थ्य कार्यों के लिए 11,243 करोड़ रुपए प्रदान किए हैं। लेकिन इस प्रावधान के खिलाफ कोरोना के संक्रमण को हराने के लिए सारा पैसा खर्च करना संभव नहीं होगा क्योंकि राज्य में अन्य स्वास्थ्य योजनाओं को भी इस राशि को वर्ष के दौरान खर्च करना होगा। इस पर अध्ययन चल रहा है कि क्या सरकार महिलाओं और बाल विकास, जल आपूर्ति, सामाजिक न्याय, आदिवासी विकास, पंचायत, शहरी विकास, बंदरगाहों, उद्योग या किसी अन्य विभाग को नियोजित कर सकती है।

राजस्व रुक गया और खर्च बढ़ गया

इस तरह से सभी खर्चों का आधार इस पर निर्भर करता है कि कोरोना का संक्रमण कितने समय तक रहता है। वित्त विभाग के अधिकारियों ने सरकार के 25 से 27 विभागों के प्रमुखों के साथ चर्चा शुरू की है, जिस पर बजट में कटौती की जा सकती है। गुजरात सरकार को कोरोना महामारी से लड़ने के लिए वित्तीय मदद की आवश्यकता है। दूसरी ओर  कर राजस्व लगातार घट रहा है।

केंद्र से कोरोना पैकेज की मांग कर सकती है

वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से कोरोना के पैकेज की मांग कर सकती है, ताकि गुजरात को कोरोना के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। अभी तक, सरकार को पिछले साल के बजट के आखिरी महीने मार्च में अनुमानित कर राजस्व नहीं मिला है। आठ से दस हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। इसी तरह नए वित्तीय वर्ष के अप्रैल और मई कोरोना संक्रमण में चले गए हैं।

13 से 15 करोड़ का झटका

अभी भी आशंका है कि आने वाले महीनों में कोरोना का संक्रमण बढ़ेगा, इसलिए सरकार को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय धन की आवश्यकता होगी। राज्य सरकार को जुलाई के अंत तक करों में 13,000-15,000 करोड़ रुपए का झटका लगने की संभावना है, इसलिए सरकार को बाहर से ब्याज पर लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *