कोर्ट रूम के सामने DIG ने कहा, मैं हूं गांधी, नहीं हुआ फरार

भोपाल. लोकायुक्त के अफसरों ने अदालत परिसर में डीआईजी जेल उमेश गांधी के फरार होने बात कही तो हड़कंप मच गया। चंद मिनटों में गांधी हांफते हुए कोर्ट रूम के सामने मीडिया से खुद रूबरू हुए। आते ही परिचय दिया बोले- “मैं हूं गांधी। फिर बोले… मैं फरार नहीं हुआ हूं।
आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को गांधी के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया। चार हजार पन्नों के चालान में गांधी, उनकी पत्नी और भाई की कारगुजारियों का सिलसिलेवार ब्योरा पेश किया गया। सीबीआई कोर्ट ने इन्हें 20 फरवरी को दोबारा पेश होने को कहा है। गांधी वर्तमान में जेल मुख्यालय में डीआईजी के पद पर पदस्थ हैं।
रिश्तेदारों को दे रखे थे सप्लाई के ठेके
आय से अधिक संपत्ति हासिल करने के आरोपी डीआईजी उमेश गांधी पर पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के भी आरोप हैं। गांधी ने जेल में सब्जी, समेत अन्य दैनिक जरूरत की चीजों के ठेके अपने रिश्तेदारों को दे रखे थे। इसके अलावा गांधी ने कुछ ठेके रिश्तेदारों के नाम से खुद भी ले रखे थे।
गांधी डीआईजी जेल, भाई बहन जेल में प्रहरी
छापामार कार्रवाई में इससे संबंधित दस्तावेज मिलने के बाद गांधी के कार्यकाल में दिए सारे ठेके निरस्त कर दिए गए थे। इस मामले में भी जांच चल रही है कि गांधी ने अपने भाई और बहन को भोपाल जेल में प्रहरी बना रखा था। उन्होंने परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों का इनवेस्टमेंट किया था।
इंचार्ज सीबीआई जज के सामने चालान पेश
लोकायुक्त के स्पेशल जज काशीनाथ सिंह शुक्रवार को अवकाश पर थे। इस वजह से इंचार्ज सीबीआई जज मनोज कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में चालान पेश किया गया। इस दौरान गांधी उनकी पत्नी, भाई के साथ कोर्ट परिसर में तो मौजूद थे, लेकिन जज के सामने नहीं गए।
कठघरे में क्यों नहीं गए
चालान पेश करते समय जांच एजेंसी आरोपियों को नोटिस भेजकर कोर्ट का नाम और पेशी तारीख देकर अदालत में हाजिर होने के लिए पाबंद करती है। नियमानुसार चालान पेश करते वक्त आरोपियों को जज के सामने कठघरे में खड़े किया जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
नोटिस दिया पर वो नहीं मिले
गांधी दंपती को बुलाने के लिए नोटिस दिया गया था। हमने अधीनस्थों को भेजा था, लेकिन वे नहीं मिले।
चालान में बेहिसाब काली कमाई का लेखा-जोखा
-मकान की तलाशी में 25 लाख रुपए कीमत के सोना-चांदी के गहने मिले।
-पांच लाख रुपए नकदी।
-घर में 50 लाख का सामान।
-गांधी ने स्वयं के और परिजनों के नाम से 60 बैंक खाते खुलवाए, एफडीआर और नकदी कुल जमा दो करोड़ 85 लाख रुपए से अधिक।
-गांधी और उनके परिजनों के नाम पर 50 लाख रुपए की एलआईसी बीमा पाॅलिसियां।
-भोपाल, इंदौर और सतना में एक करोड़ रुपए की जमीन।
-शेयर मार्केट में एक करोड़ रुपए का निवेश।
-सह आरोपी जेल प्रहरी भाई अजय गांधी 74 लाख रुपए का इनवेस्टमेंट।
-सह आरोपी पत्नी अर्चना गांधी के नाम से अचल संपत्ति पर करोड़ों का इनवेस्टमेंट।
-वास्तविक आय करीब सवा करोड़ रुपए थी। जबकि छापे में उनके घर से करीब साढ़े छह करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति मिली।

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