खतरे में BJP-PDP अलायंस? गवर्नर ने कहा- कल तक करें फैसला

नई दिल्ली/श्रीनगर. पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने बीजेपी से कॉमन मिनिमम प्रोग्राम को लेकर लिखित में भरोसा देने की मांग की थी। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने इसे ठुकरा दिया है। पीडीपी विधायकों की आज एक खास मीटिंग होने जा रही है।
आखिर क्या चाहती हैं महबूबा…
– एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को महबूबा ने पार्टी वर्कर्स की मीटिंग के दौरान बीजेपी से चल रही बातचीत के बारे में जानकारी दी।
– जानकारी के मुताबिक, पीडीपी चीफ ने बताया कि उन्होंने बीजेपी से कॉमन मिनिमम प्रोग्राम (सीएमपी) लागू करने के लिए लिखित में भरोसा मांगा है। इस बारे में आज फैसला लिया जा सकता है।
– इस बीच, खबर है कि गवर्नर ने बीजेपी और पीडीपी से कहा है कि वो सरकार बनाने को लेकर कोई भी फैसला मंगलवार तक कर लें।
बीजेपी का रुख क्या?
– एक सूत्र के मुताबिक, बीजेपी महबूबा की मांग मानने से साफ इनकार कर चुकी है।
– बीजेपी ने कहा कि सीएमपी पर मुफ्ती मोहम्मद सईद के समय से ही दोनों पार्टियां राजी थीं और सरकार भी इसी भरोसे पर काम कर रही थी।
– बीजेपी सूत्रों ने ये भी कहा कि सीएमपी पर पार्टी पुराने रुख पर कायम है। लेकिन इसके लिए रिटन अश्योरेन्स देने की कोई जरूरत नहीं है।
सरकार बनाने की जल्दी में नहीं हैं महबूबा…
– महबूबा ने पार्टी के सीनियर नेताओं और विधायकों की सोमवार को मीटिंग बुलाई है।
– मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महबूबा को सरकार बनाने की किसी भी तरह की जल्दी नहीं है।
– महबूबा के नजदीकी लोगों के मुताबिक, पीडीपी-बीजेपी अलायंस दोबारा तभी संभव है, जब बीजेपी फिर से कोशिश करे।
– महबूबा तभी आगे बढ़ेंगी जब बीजेपी की तरफ से उन्हें पक्का भरोसा न हो जाए।
अब तक क्या हूआ?
– बता दें कि मुफ्ती की मौत के 23 दिन बाद भी पीडीपी की ओर से सरकार बनाने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई है।
– मुफ्ती की मौत के बाद महबूबा ने यह कहकर सरकार बनाने से मना कर दिया था कि वे दुख में हैं।
– माना जा रहा था कि पार्टी नेताओं की मीटिंग में इसका हल निकलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
– वहीं कुछ नेताओं के मुताबिक, महबूबा के फैसला न ले पाने की वजह बीजेपी से उनकी नाराजगी है।
– महबूबा मानती हैं कि मुफ्ती के 10 महीने की गवर्नमेंट के दौरान अलायंस का जो एजेंडा तय किया गया था, उसे लागू नहीं किया गया। इसकी वजह बीजेपी है।
बीजेपी का क्या कहना है?
– उधर बीजेपी के एक सीनियर नेता के मुताबिक, सरकार बनाने में जितनी देर होगी, उतना हमारा सब्र कम होगा।
– ‘यह कुछ ऐसा है कि हमारा हाथ मरोड़कर शर्तें मानने के लिए कहा जा रहा है। यह सही नहीं है।’
– ‘अगर पीडीपी का मानना है कि हमारा पेशेंस जवाब दे गया है और सरकार बनाने के लिए कोई भी शर्त मान लेंगे, तो वह गलत है।’
– ‘पीडीपी से हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन वे कोई भी दबाव न बनाएं।’
ऐसा में क्या हो सकता है?
– अगर सरकार बनाने को लेकर दोनों ही पार्टियों की तरफ से कुछ नहीं होता है, तो उस हालत में गवर्नर रूल जारी रह सकता है।
– कोई भी अलायंस न होने पर मिड-टर्म पोल की बात से इनकार नहीं किया जा सकता।