गंगा यात्रा के दौरान प्रियंका 5 लोकसभा सीटों से गुजरेंगीं, इनमें से 4 पर 35 साल से नहीं जीती कांग्रेस

  • यात्रा के दौरान प्रियंका इलाहाबाद, फूलपुर, भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी लोकसभा को कवर करेंगी
  • कांग्रेस इन 5 में से सिर्फ वाराणसी सीट पर 2004 में आखिरी बार जीती थी
  • फूलपुर, इलाहाबाद और मिर्जापुर सीट पर कांग्रेस ने आखिरी बार 1984 में जीत दर्ज की थी
  • 1984 में अमिताभ बच्चन कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद लोकसभा सीट से जीते थे

इलाहाबाद. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सोमवार को अपनी गंगा यात्रा शुरू कर दी। तीन दिन की यात्रा के दौरान प्रियंका पांच लोकसभा सीटों इलाहाबाद, फूलपुर, भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी को कवर करेंगी। इस दौरान वे स्थानीय लोगों से मिलेंगी। उनका रास्ते में पड़ने वाले कई मंदिरों में भी जाने का प्रोग्राम है। उत्तरप्रदेश में पहली बार कोई नेता नाव के जरिए चुनाव प्रचार कर रहा है। जिन इलाकों से प्रियंका गुजरेंगी वहां, वाराणसी को छोड़कर 1984 के बाद किसी भी सीट पर कांग्रेस जीत नहीं सकी है।

प्रयागराज में इलाहाबाद और फूलपुर दो लोकसभा सीटें आती हैं। फूलपुर से पंडित जवाहरलाल नेहरु, विजय लक्ष्मी पंडित जैसे नेता कांग्रेस सांसद रह चुके हैं। वहीं, इलाहाबाद सीट से दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, अमिताभ बच्चन कांग्रेस सांसद रहे। 1984 में यहां से जीते अंतिम कांग्रेसी सांसद अमिताभ ही थे। बोफोर्स दलाली विवाद में अमिताभ और उनके भाई अजिताभ पर आरोप लगे। इसके बाद 1987 में उन्होंने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि वे राजनीति के लिए फिट नहीं हैं। फूलपुर में भी कांग्रेस 1984 के बाद कभी नहीं जीती। तब राम पूजन पटेल जीते थे। इसके बाद 1989 और 1991 में राम पूजन पटेल जनता दल के टिकट पर जीते।

मिर्जापुर : 35 साल से यहां भी नहीं जीत सकी कांग्रेस

अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध  मिर्जापुर में 1984 में कांग्रेस के उमाकांत मिश्रा जीते थे। इसके बाद कांग्रेस यहां से अब तक नहीं जीती। इस दौरान हुए आठ चुनावों में तीन बार समाजवादी पार्टी, दो बार भाजपा, एक बार जनता दल, एक बार बसपा जीती। फिलहाल अपना दल की अनुप्रिया पटेल यहां से सांसद हैं।

भदोही : 2009 में अस्तिव में आई सीट, एक बार बसपा और एक बार भाजपा जीती

2009 में परिसीमन के बाद ये सीट अस्तिव में आई। यहां 2009 में बसपा को जीत मिली जबकि 2014 में यहां से भाजपा के वीरेंद्र सिंह जीते। भदोही लोकसभा सीट में आने वाली पांच विधानसभाओं में से तीन पहले मिर्जापुर और दो फूलपुर लोकसभा में आती थीं। कांग्रेस को यहां अभी अपना खाता खुलने का इंतजार है।

वाराणसी : कांग्रेस 35 साल में यहां सिर्फ एक बार जीती

वाराणसी लोकसभा सीट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से वीवीआईपी हो चुकी है। पिछले 35 साल में यहां कांग्रेस सिर्फ एक बार जीती है। 1984 के बाद हुए आठ लोकसभा चुनावों में छह बार यह सीट भाजपा के खाते में आई। 1989 में यहां जनता दल जीती थी। सिर्फ एक बार 2004 में ये सीट कांग्रेस जीत सकी है। 2004 में कांग्रेस के राजेश कुमार मिश्रा ने भाजपा के शंकर प्रसाद जयसवाल को हराया था।

चंदौली : 1984 के बाद यहां भी नहीं जीती कांग्रेस, 1989 के बाद दूसरे नंबर पर भी नहीं आ सकी

वाराणसी से सटी इस लोकसभा सीट पर भी कांग्रेस 1984 में अंतिम बार जीती थी। 1989 में पार्टी यहां दूसरे नंबर पर रही। 2009 में उसे तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। इसके अलवा ऐसा कोई चुनाव नहीं गया जब कांग्रेस यहां टॉप तीन में भी आ पाई हो। 2014 में भाजपा के महेंद्रनाथ पांडेय यहां से जीते। पांडेय अभी उत्तरप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं।