गुजरात में मोदी और राज्यपाल फिर आमने-सामने, संशोधित लोकायुक्त बिल भी नामंजूर

Tatpar 3 Sep 2013

लोकायुक्त के मुद्दे पर गुजरात की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है. राज्य की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ गतिरोध का एक और मंच तैयार करते हुए राज्यपाल कमला बेनीवाल ने सोमवार को इस साल अप्रैल में विधानसभा द्वारा पारित गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 लौटा दिया.

राज्य सरकार के प्रवक्ता और वित्तमंत्री नितिन पटेल ने कहा, ‘राज्यपाल ने गुजरात लोकायुक्त आयोग विधेयक 2013 को अपनी मंजूरी नहीं दी है. यह विधेयक इस साल अप्रैल में राज्य विधानसभा द्वारा पारित हुआ था. राज्यपाल ने इसे समीक्षा के लिए सरकार के पास भेजा है.’

पटेल ने यह नहीं बताया कि राज्यपाल ने किस आधार पर विधेयक सरकार के पास वापस भेजा है.

इस बिल में राज्य के मुख्यमंत्री को लोकायुक्त की नियुक्ति का अधिकार दिया गया है. बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने लोकायुक्त की नियुक्ति का सारा अधिकार मुख्यमंत्री को देने पर सवाल उठाए हैं.

बेनिवाल ने लिखा है कि नए लोकायुक्त बिल में लोकायुक्त नियुक्त करने का आखिरी फैसला मुख्यमंत्री पर रखा गया है. वैसे में सरकार के खिलाफ भष्ट्राचार कि तटस्थ जांच हो पाना मुमकिन नही हो पायेगा. साथ ही नये लोकायुक्त बिल में चीफ जस्टिस कि भूमिका को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जो चीफ जस्टिस के सारे अधिकार को खत्म कर देता है. नये लोकायुक्त को बनाने के लिये विपक्ष के नेता, कैबिनेट मत्री, विधानसभा के अध्यक्ष और कानून मंत्री लोकायुक्त के नाम का चुनाव करेंगे. ऐसी स्थिति में आखिरी नाम वही आएगा जो सरकार को चाहिये, जो एक तटस्थ लोकायुक्त लाने के लिये उचित नहीं होगा.

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