गुरदासपुर में विनोद खन्ना के अलावा आज तक नहीं जीता कोई भाजपाई, क्या होगा सनी देओल का?

पंजाब की गुरदासपुर लोकसभा सीट फिल्म अभिनेता सनी देओल के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने से फिर से हॉट सीट बन गई है. ऐसी उम्मीद है कि विनोद खन्ना की विरासत सीट अब सनी देओल संभाएंगे. लेकिन सनी देओल के लिए यह जिम्मेदारी कितनी चुनौतीपूर्ण होगी, आइए जानते हैं.

विनोद खन्ना के अलावा गुरदासपुर में नहीं जीता कोई भाजपाई
यूं तो बीजेपी की नींव ही साल 1980 में पड़ी. इस साल लोकसभा चुनाव भी हुए. लेकिन तब पंजाब में बीजेपी कोई दमदार उम्मीदवार तलाश नहीं पाई. लेकिन साल 1985 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी बलदेव प्रकाश दूसरे स्‍थान पर रहे. इसके बाद से सभी लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस सीट के लिए पूरा दमखम लगाया. लेकिन बीजेपी यह सीट जीत नहीं पाई.

साल 1998 में पहली बार विनोद खन्ना ने गुरदासपुर में कदम रखा और उन्होंने कांग्रेस की दिग्गज नेता सुखबंस कौर भिंडर को हरा दिया. भिंडर गुरदासपुर को लगातार 5 बार 1980, 1985, 1989, 1992 और 1996 को जीत चुकी थी. लेकिन विनोद खन्ना यहां पहली बार कमल खिलाने में कामयाब हुए.

विनोद खन्ना ने लगातार तीन बार 1998, 1999 और 2004 गुरदासपुर में कमल खिलाने में कामायाब हुए. जब साल 2004 में बीजेपी की करारी हार हुई तब भी उन्होंने बीजेपी का झंडा यहां बुलंद रहा.

विनोद खन्ना बस एक बार हुए थे परास्त फिर कर ली थी वापसी
गुरदासपुर में विनोद खन्ना के उदय के बाद बस साल 2009 के आम चुनाव में बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी थी. इस चुनाव में कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने विनोद को हरा दिया था. लेकिन साल 2014 के चुनाव में विनोद खन्ना एक बार फिर से इस सीट को जीतकर यह साबित कर दिया था उनके जीते जी इस सीट पर बीजेपी का झंडा नहीं झुकेगा.


विनोद खन्ना के जाते ही बीजेपी से फिसल गया गुरुदासपुर
विनोद खन्ना के निधन के बाद हुए उपचुनाव में यह फिर से साबित हो गया कि इस सीट पर बीजेपी के संगठन से ज्यादा विनोद खन्ना के चेहरे की अहमियत थी. क्योंकि साल 2017 में हुए उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार सवर्ण सिंह सलारिया 3,06,553 वोट ही जुटा पाए. जबकि कांग्रेस उम्मीदवार सुनील सिंह जाखड़ को 4,99,752 वोट मिले.

क्या विनोद खन्ना का इतिहास दोहरा पाएंगे सनी देओल
विनोद खन्ना की छवि गुरदासपुर में एक ठोस नेता की थी. वे गुरदासपुर से एक जनप्रिय नेता के तौर पर उभरे थे. फिल्मों की शूटिंग के चलते ज्यादातर समय गुरदासपुर से बाहर से रहने के बाद भी गुरदासपुर की जनता उनसे सीधे जुड़ती थी. इसके अलावा उनके संसदीय कार्यकाल में उन्होंने क्षेत्र में जमकर काम भी कराए थे.

उनकी तुलना में सनी देओल के पास एक जाना-पहचाना चेहरा और कुछ देशभक्ति फिल्मों के अलावा कुछ नहीं है. यह सच है कि सनी देओल के परिवार में चुनाव लड़ने वालों की संख्या विनोद खन्ना की तुलना में ज्यादा है. लेकिन विनोद खन्ना की अपनी जिंदगी और राजनैतिक कौशल बेहद उतार-चढ़ाव होने के साथ बीजेपी के अहम नेताओं से उनके रिश्ते भी बेहद मधुर थे. विनोद खन्ना ने जब राजनीति का रुख किया तो वे एक अभिनेता या जाना-पहचाना चेहरा के बजाए एक राजनेता जैसा बर्ताव करते थे. ऐसे सनी देओल फिलहाल उनकी छवि में कितना सटीक बैठ पाएंगे यह कहना जल्दबाजी होगी.

गुरुदासपुर के वर्तमान सांसद का प्रदर्शन
गुरुदासपुर के वर्तमान सांसद कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ हैं. उन्होंने बीजेपी नेता विनोद खन्ना के निधन के बाद हुए उपचुनाव में यह सीट जीती थी. हालांकि साल 2017 से 2019 के बीच हुए संसदीय कार्यवाहियों में वे बस एक बार ही संसद का हिस्सा बने. इस दौरान उन्होंने महज तीन सवाल पूछे

गुरुदासपुर सीट की बनावट
गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं. फिलहाल इन नौ सीटों में से सात पर कांग्रेस का कब्जा है. जबकि बीजेपी के पास महज एक सीट है. एक सीट अकाली दल ने जीती थी. साल 2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर 13,18,967 वोटर हैं. पिछले आम चुनाव में यहां मतदान के लिए 1552 पोलिंग बूथ बनाए गए थे. अब इस सीट पर सातवें फेज में 19 मई को मतदान होने हैं. अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों का घोषणा नहीं किया है. ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस के वर्तमान उम्मीदवार सुनील जाखड़ और अभिनेता से नेता बने सनी देओल के बीच इस सीट पर मुकाबला होगा.

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