गूगल की ड्राइवरलेस कार का एक्सीडेंट: 19 लाख मील का ट्रायल, पहली बार लोग घायल

कैलिफोर्निया: सेल्फ ड्राइविंग कार (बिना ड्राइवर वाली कार) डेवलप कर रही कंपनी गूगल ने बताया है कि हाल ही में ट्रायल के दौरान उसकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कंपनी के मुताबिक, छह साल में 19 लाख मील के ट्रायल के दौरान 14 बार यह कार छोटे-बड़े हादसे का शिकार हुई, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि कार के एक्सीडेंट होने के साथ लोग भी चोटिल हुए हैं। गूगल कैलिफोर्निया में इन कारों का ट्रायल कर रही है। सड़क पर ऐसी 25 कारों को ट्रैफिक के बीच उतारकर नतीजे जांचे जा रहे हैं।
गूगल की ओर से जारी बयान में बताया गया कि एक जुलाई को कैलिफोर्निया के माउंटेन व्यू में उनकी लेक्सस एसयूवी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह एसयूवी एक चौराहे पर रुकी थी, जहां एक अन्य कार ने इसे 17 मील प्रति घंटे की रफ्तार से टक्कर मार दी। हालांकि, दूसरी कार को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन गूगल की कार में सवार यात्रियों को मामूली चोटें आईं और उनकी गर्दन में मोच भी आ गई। बता दें कि ट्रायल के दौरान भी इस कार में एक ड्राइवर सवार होता है ताकि अप्रिय हालात में कार को काबू किया जा सके। इस ड्राइवर के अलावा दो अन्य लोग भी इसमें थे, जो चोटिल हुए।
हाल ही में मिली ट्रायल की मंजूरी
अमेरिकी शहर सैन फ्रांसिस्को स्थित गूगल के हेडक्वार्टर के करीब सड़कों पर कंपनी की महत्वाकांक्षी सेल्फ ड्राइविंग कार (बिना ड्राइवर के चलने वाली कार) का टेस्ट हाल ही में शुरू हुआ है। आम सड़कों पर गूगल के इस टू सीटर कार को उतारने के लिए पहली बार मंजूरी दी गई। इससे पहले तक, शहर से 120 किमी दूर एयरफोर्स के बेस में बने प्राइवेट ट्रैक पर इन कारों का टेस्ट चल रहा था। एक साल पहले ही गूगल ने इस प्रोजेक्ट को लोगों के सामने रखा था।
क्या है ट्रायल का मकसद
कैलिफोर्निया के मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट ने गूगल को शुरुआत में 25 कारें सड़क पर उतारने की मंजूरी दी है। कार के नए मॉडल में न स्टीयरिंग व्हील है और न ही ब्रेक पैडल। हालांकि, पब्लिक रोड पर ट्रायल के दौरान कार में ड्राइवर रहेंगे। कंपनी पब्लिक रोड पर इस टेस्ट के जरिए यह जानना चाहती है की दूसरी ड्राइवर ऑपरेटेड कारों के बीच गूगल की यह कार कैसे काम करती है?
कब तक सड़कों पर
सब कुछ अच्छा रहा तो गूगल इसके बाद कार से स्टीयरिंग व्हील, ब्रेक पैडल और इमरजेंसी ड्राइवर को हटाने की मंजूरी लेगी। कंपनी के अधिकारियों को उम्मीद है कि इन कारों को 2020 तक रूटीन ट्रैफिक के साथ सड़कों पर चलते देखा जा सकेगा।