गृह मंत्रालय के ई- वीज़ा कार्यक्रम से मंत्रालय को 1700 करोड़ रुपए की कमाई

मोदी सरकार ने नवंबर 2014 में विदेशी अतिथियों के लिए ई- वीज़ा कार्यक्रम की शुरुआत की । डिजिटल इंडिया के सपने को साकार कर रहे इस कार्यक्रम के जरिए ना सिर्फ विदेशी सैलानियों को घर बैठे भारत का वीज़ा हासिल करने की सुविधा मिल रही है बल्कि इसके चलते गृह मंत्रालय को 1700 करोड़ रुपए की कमाई भी हुई है।

भारत आनेवाले विदेशियों को वीज़ा की सुविधा ऑनलाइन देने के मकसद से गृह मंत्रालय ने अपने आव्रजन विभाग के जरिए ई वीज़ा देने का अभियान शुरु किया था। पिछले करीब 4 वर्षों में इस कार्यक्रम पर करीब पौने चार सौ करोड़ रुपए (378 करोड़ रुपए )खर्च हुए लेकिन इसके जरिए मिले वीज़ा शुल्क से मंत्रालय को करीब 1700 करोड़ रुपए की आमदनी हुई है।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंत्रालय से जुड़े संसदीय समिति को गृह मंत्रालय के विदेशी विभाग के कार्यप्रणाली और कार्यक्रमों को लेकर जानकारी दी। कोच्ची में शुक्रवार को हुई संसदीय समिति की बैठक में राजनाथ सिंह ने बताया कि

नवंबर 2014 में 44 देशों के साथ शुरु किए गए ई- वीज़ा कार्यक्रम से फिलहाल 165 देशों के नागरिकों को फायदा हो रहा है।

साल 2017 में 19 लाख विदेशियों ने ई वीज़ा की सुविधा का लाभ उठाया था। जबकि इस साल पांच जुलाई तक 11 लाख विदेशी इसका इस्तेमाल कर चुके हैं।

इससे विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों पर काम का बोझ तो कम हुआ ही है, आसानी से वीज़ा मिलने के चलते भारत आनेवाले विदेशी सैलानियों की संख्या भी बढ़ी है। साल 2017 में रिकॉर्ड एक करोड़ विदेशी भारत की यात्रा पर आए थे, जबकि तीन साल पहले यानी साल 2014 में भारत आनेवाले विदेशियों की संख्या सिर्फ 70 लाख रुपए थी।

ऑनलाइन वीज़ा सुविधा ने एक तरफ विदेशी अतिथियों की सहूलियत बढ़ाई है तो दूसरी ओर इसके चलते वीज़ा देने के मामले में फैसले भी तेजी़ से हो पा रहे हैं।

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