चीन के OBOR के जवाब में प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं भारत-US, जापान-ऑस्ट्रेलिया भी आएंगे साथ

सिडनी. चीन के वन बेल्ट वन रोड (OBOR) प्रोजेक्ट के जवाब में ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका और भारत मिलकर अपना एक अलग इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया के एक रिपोर्ट में दावा किया गया ‘अपने अमेरिका दौरे में प्रधानमंत्रीमैल्कम टर्नबुल डोनाल्ड ट्रम्प से इस सिलसिले में बात शुरू कर सकते हैं।’ बता दें कि OBOR चीन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। अरबों डॉलर के इस प्लान को राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2013 से प्रमोट कर रहे हैं।

टर्नबुल के एजेंडे में है नया प्रोजेक्ट

– ऑस्ट्रेलिया के न्यूजपेपर फाइनेंशियल रिव्यू ने अमेरिका के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि नया प्रोजेक्ट टर्नबुल के एजेंडे में शामिल है। अगले हफ्ते अपने अमेरिका दौरे में वो ट्रम्प से इस मुद्दे पर गंभीरता से बात करेंगे।
– हालांकि, अधिकारी ने बताया कि ये प्लान अभी शुरुआती चरण में है और मीटिंग के बाद भी इसके एलान की संभावना नहीं है।
– ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री जूली बिशप और व्यापार मंत्री स्टीवन सियोबो ने इस मामले में तुरंत जवाब देने से इनकार किया।

जापान भी कर चुका है प्रोजेक्ट का समर्थन

– जापान के कैबिनेट सेक्रेटरी योशीहिदा सुगे ने बताया कि अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलिया-भारत हमेशा ही कूटनीतिक समझौतों में शामिल रहे हैं। हालांकि, ये प्रोजेक्ट चीन के OBOR का जवाब नहीं है।

चीन के विस्तार से बढ़ी इंडो-पैसिफिक देशों की चिंता

– बता दें कि इस प्रोजेक्ट के तहत चीन भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (CPEC) से चीन PoK और श्रीलंका में बंदरगाह बनाकर भारत पर हिंद महासागर से घेरा बना रहा है।
– चीन साउथ चाइना सी में भी अपना अधिकार बताता रहा है, जिसके चलते उसके जापान समेत 4 देशों से विवाद हैं। यहां तक की चीन अमेरिका पर भी अवैध रूप से इस क्षेत्र में घुसने के आरोप लगाता रहा है।
– इसके जवाब में अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया काफी समय से इंडो-पैसिफिक रीजन में सिक्युरिटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में मनीला में हुई आसियान (ASEAN) समिट के दौरान चारों देशों के नेताओं ने आपस में मीटिंग भी रखी थी।

क्या है चीन का वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट (OBOR)?

– OBOR, प्रेसिडेंट शी जिनपिंग का पसंदीदा प्लान है। इसके तहत चीन पड़ोसी देशों के अलावा यूरोप को सड़क से जोड़ेगा। ये चीन को दुनिया के कई पोर्ट्स से भी जोड़ देगा।
– एक रूट बीजिंग को तुर्की तक जोड़ने के लिए प्रपोज्ड है। यह इकोनॉमिक रूट सड़कों के जरिए गुजरेगा और रूस-ईरान-इराक को कवर करेगा।
– दूसरा रूट साउथ चाइना सी के जरिए इंडोनेशिया, बंगाल की खाड़ी, श्रीलंका, भारत, पाकिस्तान, ओमान के रास्ते इराक तक जाएगा।
– पाक से साथ बन रहे चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को इसी का हिस्सा माना जा सकता है। फिलहाल, 46 बिलियन डॉलर के चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर काम चल रहा है। बांग्लादेश, चीन, भारत और म्यांमार के साथ एक कॉरिडोर (BCIM) का प्लान है।
– CPEC के तहत पाक के ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ा जा रहा है। इसमें रोड, रेलवे, पावर प्लान्ट्स समेत कई इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किए जाएंगे।
– CPEC को लेकर भारत विरोध करता रहा है। हमारा दावा है कि कॉरिडोर पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से गुजरेगा, तो इससे सुरक्षा जैसे मसलों पर असर पड़ेगा।