चीन को अड़ते देख मोदी ने पुतिन को लगाया फोन, जल्द करेंगे मुलाकात

नई दिल्ली/बीजिंग. एनएसजी ग्रुप में भारत की मेंबरशिप को लेकर चीन के अड़ियल रवैये को देखते हुए अब नरेंद्र मोदी ने रूस की ओर कदम बढ़ाए हैं। पीएम मोदी ने प्रेसिडेंट व्लादिमिर पुतिन को बीते शनिवार फोन कर इस बाबत बात की है। बता दें कि रूस ने न्यूक्लियर डील को लेकर यूएन सिक्युरिटी काउंसिल में भारत के रुख का सपोर्ट किया है।
बाइलैट्रल रिलेशंस को मजबूत बनाने पर की बात…
– क्रेमलिन की ओर से जारी बयान के मुताबिक फोन कॉल मोदी ने किया।
– इस दौरान दोनों लीडर्स ने बाइलैट्रल रिलेशंस को लगातार मजबूत बनाने पर जोर दिया।
– बातचीत दोनों देशों के बीच प्रैक्टिकल इश्यूज और को-ऑपरेशन पर फोकस रही।
– मोदी और पुतिन ने जल्द मुलाकात की पॉसिबिलिटी पर भी बात की।
शी जिनपिंग से भी मुलाकात कर सकते हैं मोदी
– सोर्सेज के मुताबिक 24 जून को सिओल में होने वाली एनएसजी कंट्री की प्लेनरी मीटिंग से पहले मोदी वर्ल्ड के कुछ बड़े लीडर्स से मिल सकते हैं।
– इनमें चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग भी शामिल हैं।
– बता दें कि चीन ने एनएसजी ग्रुप में भारत के एंट्री के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
चीन का दावा- वियेना में भारत की मेंबरशिप पर चर्चा नहीं हुई
– चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन होंग लेई ने रविवार को दावा किया है कि वियना मीटिंग (9 जून) में भारत की मेंबरशिप पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।
– लेई ने कहा कि एनएसजी के मेंबर्स गैर-एनपीटी देशों को इस ग्रुप में एंट्री देने के मामले में बंटे हुए हैं। इस पर अब सियोल में 24 जून को होने वाली मीटिंग में चर्चा होगी।
– लेई के मुताबिक एनएसजी के प्रेसिडेंट और अर्जेंटीना के एंबेसडर रफाल मारिआनो ग्रोसी ने वियना में मीटिंग बुलाई थी। उसका कोई एजेंडा नहीं था।
– बैठक में सभी मेंबर देशों के विचार सुने गए, उनकी रिपोर्ट 24 जून को सियोल बैठक में पेश की जाएगी। चीन उस बैठक में भारत की मेंबरशिप पर अपने विचार डिटेल में रखेगा।
– लेई ने कहा, “चीन का मानना है कि जिन देशों ने एनपीटी पर साइन नहीं किए हैं, उन्हें एनएसजी का मेंबर नहीं बनाया जाए।”
– “ऐसे देश अप्रसार के मामले में गंभीर नहीं हो सकते। चीन की यह पॉलिसी किसी एक देश के बारे में नहीं है।”
कोई एक देश भी लगा सकता है अड़ंगा
– लेई ने कहा- चीन के रुख का सपोर्ट एनएसजी के कई मेंबर कंट्री कर रहे हैं।
– “इनमें न्यूजीलैंड, आयरलैंड, तुर्की, साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।”
– एनएसजी ग्रुप के मेंबर देशों में से एक भी अगर विरोध करता है तो मेंबरशिप नहीं मिलती है।
अमेरिका समेत इन देशों ने किया है भारत का सपोर्ट
– बता दें कि अमेरिका ने एनएसजी ग्रुप में भारत की मेंबरशिप का खुलकर सपोर्ट किया है।
– यूएस प्रेसिडेंट बराक ओबामा, मैक्सिकन प्रेसिडेंट एनरिक पेना नीतो और स्विट्जरलैंड के प्रेसिडेंट जोहान श्नेडर अम्मान ने पीएम नरेंद्र मोदी को सपोर्ट करने का भरोसा दिलाया है।
भारत को 2008 से मिल रही हैं फैसिलिटीज
– भारत एनएसजी का मेंबर नहीं है, लेकिन उसके मेंबर्स कंट्री को मिलने वाली फैसिलिटीज भारत को 2008 से मिल रही हैं।
– तब भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर को-ऑपरेशन पैक्ट हुआ था।
– उस करार के लिए भारत को एनपीटी की मेंबरशिप से छूट दी गई थी।
– एनएसजी परमाणु क्षेत्र से जुड़े सेंसिटिव मामलों पर नजर रखती है।
– इसके मेंबर कंट्री को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के ट्रेड और एक्सपोर्ट की छूट रहती है।