चीन को दिखाने के लिए गर्मजोशी से मिले ट्रम्प और मोदी: न्यूयॉर्क टाइम्स

न्यूयॉर्क/बीजिंग. डोनाल्ड ट्रम्प और नरेंद्र मोदी पहली मुलाकात में कैमरों के सामने गर्मजोशी से मिले। इसे वर्ल्ड मीडिया ने अपने-अपने नजरिए से देखा है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने व्हाइट हाउस के एक आला अफसर के हवाले से लिखा है कि दोनों नेताओं की आत्मीयता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दिखाने के लिए थी, क्योंकि ट्रम्प चीन से काफी नाराज हैं। इसकी वजह यह है कि जिनपिंग उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम को रोकने में नाकाम रहे हैं। वहीं, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने नसीहत दी है कि भारत अमेरिका का मोहरा न बने चीन ही उसके लिए मददगार साबित होगा।
और किसने क्या लिखा ट्रम्प-मोदी मुलाकात पर…
न्यूयॉर्क टाइम्स (अमेरिका)
– अखबार ने व्हाइट हाउस के एक आला अफसर के हवाले से लिखा है कि दोनों नेताओं की आत्मीयता चीनी प्रेसिडेंट शी जिनपिंग को दिखाने के लिए थी, क्योंकि ट्रम्प चीन से काफी नाराज हैं। जिनपिंग उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम को रोकने में नाकाम रहे हैं। ट्रम्प सरकार भारत को 22 ड्रोन बेच रही है। इसका इस्तेमाल भारत हिंद महासागर में चीन की जासूसी करने में कर सकता है। उधर, चीन के प्रति भारत का भी शक गहरा है। शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ओबीओआर (वन बेल्ट वन रोड ) पर भारत को कई आपत्तियां हैं। ऐसे में, मोदी चीन के साथ कॉम्पिटीशन के लिए ट्रम्प की तरफदारी चाहते हैं।
ग्लोबल टाइम्स (चीन)
– अखबार ने अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के एक दस्तावेज के हवाले से लिखा, “बीजिंग का बढ़ता असर रोकने के लिए वाॅशिंगटन को नई दिल्ली की जरूरत होगी। इसमें भारत के लिए गर्व करने लायक कुछ भी नहीं है।” अखबार ने आगे लिखा, “अमेरिका और भारत चीन के उदय पर चिंता साझा करते हैं। अमेरिका ने चीन पर दबाव बढ़ाने के लिए भारत से दोस्ती बढ़ाई है। चीन को घेरने की अमेरिकी स्ट्रैटजी का हिस्सा बनना भारत के लिए फायदेमंद नहीं है। इसके विनाशकारी नतीजे भी हो सकते हैं।” अखबार ने लिखा कि चीन के साथ मजबूती से खड़े रहना दिल्ली के लिए मददगार होगा।
वॉशिंगटन पोस्ट (अमेरिका):जर्नलिस्ट्स को मुलाकात से पहले ही बता दिया गया था कि कोई भी सवाल नहीं लिया जाएगा। पेरिस क्लाइमेट डील पर कोई बात नहीं हुई।
डॉन (पाकिस्तान):मोदी और ट्रम्प ने एक-दूसरे को दोस्त की तरह गले लगाया। ट्रम्प ने पाकिस्तान से यह तय करने को कहा कि उसकी जमीन से आतंक न पनपे।
टाइम मैगजीन (अमेरिका):भविष्य में दोनों देशों के रिश्ते बेहतर रहने के संकेत मिले हैं। लेकिन दोनों नेताओं ने जर्नलिस्ट्स के सवालों के जवाब नहीं दिए।
द इंडिपेंडेंट (ब्रिटेन):दुनिया के नेताओं के साथ ट्रम्प की मुलाकात सौदों के इर्द-गिर्द होती है। भारत के साथ भी सैन्य सहयोग पर बात हुई और रक्षा सौदे हुए।
फाइनेंशियल टाइम्स (ब्रिटेन):ट्रम्प नेताओं से हाथ मिलाना भी पसंद नहीं करते। पर जब मोदी ने ट्रम्प को गले लगाया तो जर्मोफोब (कीटाणुओं से डरने वाले) ट्रम्प को गले मिलकर जवाब देना पड़ा।
मुलाकात के 20 घंटे बाद तक ट्रम्प ने एक भी ट्वीट नहीं किया, मोदी ने 10 ट्वीट किए
– ट्रम्प ने मोदी से मुलाकात के बाद 20 घंटे तक एक भी ट्वीट नहीं किया। जबकि मोदी ने इस दौरान यात्रा से जुड़े 10 ट्वीट किए। 8 ट्वीट में मोदी-ट्रम्प की फोटो थी।
चीन-पाक-रूस का गठजोड़ रोकने के लिए भारत-अमेरिका का साथ जरूरी – रहीस सिंह, विदेश मामलों के जानकार
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को लेकर एक अमेरिकी अखबार ने ‘अमेरिका फर्स्ट मीट्स इंडिया फर्स्ट’ शीर्षक से एक रिपोर्ट लिखी। ये दो शब्द भारत की बनाई हुई छवि और प्रभाव को बयां कर रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेटर्स का रुख साफ नहीं है, जिसका फायदा एशिया में चीन उठा रहा है। चूंकि पाकिस्तान चीन का एक वफादार सिपाही है, जिसे चीन आॅल व्हेदर फ्रेंड कहता है। इसलिए चीनी वर्चस्व से उसे भी फायदा मिलता रहता है। अब रूस के इनके साथ आने से यह गठजोड़ माॅस्को-बीजिंग- इस्लामाबाद धुरी में बदलता दिख रहा है। यह भारत के लिए बेहद विपरीत स्थिति है। भारत इन तीनों के साथ तब तक सक्षम सौदेबाजी नहीं कर सकता, जब तक भारत के साथ अमेरिका न खड़ा हो। इस यात्रा ने फिलहाल इस संक्रमण की समाप्ति का संकेत दे दिया है। इस यात्रा की दूसरी उपलब्धि यह रही कि भारतीय नौसेना के लिए 22 गार्जियन ड्रोन खरीद की बात पक्की हो गई। इसने यह प्रमाणित कर दिया है कि अमेरिका के लिए भारत ‘बड़ा रक्षा साझीदार’ है। भारत के लिए तीसरा अहम विषय पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करना और आर्थिक रूप से मिल रहे सहयोग को कम करना है, ताकि वे भारत के खिलाफ टेरर फंडिंग को रोक सकें।
मोदी 4 जुलाई को इजरायल जाएंगे
– पहली बार कोई भारतीय पीएम वहां जा रहा है। येरुशलम के एक अखबार ने लिखा- “जागो, दुनिया के सबसे अहम प्रधानमंत्री आ रहे हैं।”

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