चुनावी बात, आपके साथ…!

शैलेन्द्र सिंह पंवार, इंदौर

 अर्थ में सभी आइटम-मैं भी आइटम, तुम भी आइटम

कांग्रेस की तुलना में भाजपा के वार रूम बेहतर काम कर रहे है, कांग्रेस के नेताओं ने कुछ बोला नहीं की, वार रूम में बैठे योद्धाओं ने तुरंत लपक लिया। “भूखे-नंगे” का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि कमलनाथ “आइटम” लेकर आ गए, वो भी विजयलक्ष्मी साधौ के सामने, दिग्विजयसिंह भी “टंच माल” शब्द का उपयोग कर चुके है। आइटम पर भाजपा पहले दिन से ही मुखर थी और सोमवार को प्रदेश के सभी जिलों में मौन व्रत भी रखे गए। शिवराज, सिंधिया, विष्णुदत्त सहित सभी प्रमुख नेताओं ने 2 घंटे का मौन किया। “मौन” का कितना लाभ मिलेगा ये तो 10 नवम्बर को पता चलेगा, पर आइटम से कांग्रेस तो हाल फिलहाल बचाव की मुद्रा में है। कमलनाथ सफाई दे रहे है, पर सफाई हजम नहीं हो रही है, आइटम पर साधौ मुंह छिपा रही है और नाथ सहित सामने बैठे सभी मुस्कुरा रहे है। सोमवार को नाथ सफाई में बोले कि नाम ध्यान नहीं आ रहा था, इसलिए इमरती देवी को आइटम बोला, अर्थ (सृष्टि) में सभी आइटम है, मैं भी आइटम, तुम भी आइटम। वार रूम के योद्धाओं ने इसे भी लपक लिया है, आइटम पर सोनिया गांधी से लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग तक शिकायतें की जा चुकी है। इंदौर-उज्जैन संभाग में वार रूम बाबू रघुवंशी, गोविंद मालू और फायर ब्रांड उमेश शर्मा देख रहे तो प्रदेश स्तर पर इसकी कमान लोकेन्द्र पारासर के हाथों में है।

ढूंढे नहीं मिल रहे सेंगर,संटू और टंडन

सांवेर के रण में भारत सिंह चौहान चिमली, दिलीप चौधरी, हुकूम सांखला, मंजूर बेग, राजू सिंह चौहान जैसे खपे खपाये कांग्रेसी तुलसी सिलावट के पक्ष में जुटे है, ये सब भी तुलसी के साथ भाजपा में आ गए थे, लेकिन मोहन सेंगर, प्रमोद टण्डन, विपिन खुजनेरी (संटू) नहीं दिखाई दे रहे है, ये सब भी आ तो भाजपा में गए थे, पर इनका कनेक्शन तुलसी की बजाए सीधे सिंधिया महाराज से है, शायद इसलिए भी दूरी हो। वैसे इन नए-नए भाजपाईयों के पास करने के लिए कुछ खास नहीं है, सांवेर का पूरा चुनाव भाजपा के दिग्गज नेता ही मैनेज कर रहे है, तुलसी का काम भी हाथ जोड़ने तक ही सीमित है, क्या बोलना है और क्या नहीं, ये भी भाजपाई ही तय करते है। सेंगर शुरुआत में ठाकुरों के कुछ गांव गए थे, कल सिंधिया की सभा में भी थे, पर जुटे कहा है पता नहीं है, टण्डन को स्वास्थ की दिक्कतें हो सकती है, पर खुजनेरी पुरी तरह लापता है। जबकि राजेश पांडे और पप्पू शर्मा सिलावट के लिए सुबह से लेकर शाम तक तैनात रहते है।

 जो जैसा,बरूआ का वैसा इलाज

शैलेन्द्र बरूआ को भाजपा ने मुरैना जिले की 5 सीटों की जिमेदारी दी है, मुरैना की 6 में से 5 पर उपचुनाव है। बरूआ अभी जबलपुर-होशंगाबाद के संभागीय संगठन मंत्री है, इसके पहले ग्वालियर-चंबल संभाग में इसी हैसियत से थे, फिर ये उनका गृह क्षेत्र भी है, राजनीति की ऊंचाइयां उन्होंने यही होते ही प्राप्त की है, शुरुआत में भाजपा को पांचों ही सीटों पर दिक्कत थी, भाजपा के खपे खपाये कार्यकर्ता नए-नए भाजपाईयों को हजम नहीं कर पा रहे थे, संस्कार, विचारों के साथ ही प्रतिष्ठा के भी इनके बीच अहम थे, इससे पार्टी को नुकसान हो रहा था, इनके बीच भाजपा उम्मीदवारों को लेकर भी विरोधभास थे, बरूआ समय रहते इन सभी स्थितियों को भांप गए, चाहे कल के भाजपाई हो या आज के, जो जैसे माना उसे उस तरीके से बरूआ ने समझा दिया, कई को सिंधिया, तोमर व विष्णुदत्त से भी समझवा दिया, अब सभी भाजपा के पक्ष में पूरे मनोयोग से जुटे है, स्थिति भाजपा के अनुकूल हो गयी है, कहने वाले कह रहे है कि कोई आश्चर्य नहीं कि पुरी पांचों सीटे भाजपा के खाते में चली जाए।

टीम गुड्डू अंतिम पांच दिनों की तैयारी में

सांवेर में भले ही कांग्रेस एकजुट है, पर प्रेमचंद्र गुड्डू ने अपनी निजी टीम को अंतिम पांच दिनों की तैयारी पर लगा दिया है, क्योंकि एकजुट टीम में बिखराव का इतिहास रहा है, कांग्रेस की एकजुटता अंतिम पांच दिनों के पहले तक ही रहती है, इसके बाद सभी अपने हितों की पूर्ति में लग जाते है, जिसके हित पूरे नहीं होते है वो ऐसे दूर होता है कि ढूंढें नहीं मिलता है और जिसके पूरे हो जाते है वो हितों का केन्द्रीयकरण कर लेता है, तब दोनों ही स्थिति में नुकसान उम्मीदवार को होता है, गुड्डू कई चुनाव लड़ चुके है, कांग्रेसियों को बेहतर ढंग से समझते है, इसलिए उनकी चुनिंदा टीम भी तैयार रहती है, ये टीम एकजुट दिखने वालों पर नजर रखती है, अंतिम पांच दिनों की तैयारी भी अपनी देख-रेख में करती है। इन दिनों ये टीम गांव-गांव में महिला समूह, भजन मंडली, सांस्कृतिक, सामाजिक व खेल संगठन, युवाओं की टोली, विभिन्न समाजों के प्रमुखों, 500-1000 मतदाताओं को प्रभावित करने वाले लोगों के साथ ही ऐसे भाजपाईयों की खोजबीन में है, जिसे मैनेज किया जा सके।

■ और अंत में
रमेश मेंदोला ने सांवेर का पुरा चुनाव ही बदल दिया है, जहां जैसी जरूरत वहां वैसी व्यवस्था के आदेश दे रखे है। इसलिए कार्यकर्ता हो या नेता कोई रोना नहीं रो रहा है, सुबह से लेकर देर रात्रि तक सभी जुटे रहते है।।

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