चुनाव हारकर भी जेटली को मिला फाइनेंस, वे हर भारतीय को गरीबी दिखाएंगे

नई दिल्ली. बीजेपी के सीनियर लीडर यशवंत सिन्हा ने अरुण जेटली पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें (जेटली) इस सरकार में सबसे बेहतर माना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले ही तय हो चुका था अगर मोदी सरकार बनी तो जेटली ही वित्त मंत्री होंगे। जेटली अमृतसर से चुनाव हार गए, लेकिन यह हार उनके अप्वॉइंटमेंट में रुकावट नहीं बनी। 1998 में ऐसे ही हालात में अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने करीबी जसवंत सिंह और प्रमोद महाजन को कैबिनट में शामिल नहीं किया था।
यह काम जेटली जैसे सुपरमैन भी नहीं कर सकते…
– सिन्हा ने ये बातें इंडियन एक्सप्रेस के आर्टिकल में लिखी हैं। उन्होंने लिखा है कि इससे पहले वाजपेयी सरकार में जसवंत सिंह और प्रमोद महाजन को भी वाजपेयी करीबी होने के बावजूद मंत्री नहीं बनाया गया था। लेकिन जेटली को वित्त मंत्रालय के साथ ही रक्षा मंत्रालय भी मिला।
– सिन्हा ने आगे लिखा है कि मोदी सरकार में जेटली कितने ज़रूरी है, इस बात का पता चलता है कि जेटली को 4 मंत्रालय दिए गए, जिनमें से 3 अब भी उनके पास हैं।
– उन्होंने लिखा कि मैंने वित्त मंत्रालय संभाला है मुझे पता है यह आसान काम नहीं है। यह चौबीस घंटे सातों दिन का काम है, जिसे जेटली जैसे सुपरमैन भी पूरा नहीं कर सकते हैं।
‘मुझे अब बोलना ही होगा’
– सिन्हा के आर्टिकल का टाइटल ‘I need to speak up now’ (मुझे अब बोलना ही होगा) है।
– उन्होंने लिखा है, ”देश के वित्त मंत्री ने इकोनॉमी की हालत बिगाड़ दी है, ऐसे में अगर मैं चुप रहूं तो ये राष्ट्रीय कर्तव्य के साथ अन्याय होगा।”
– यशवंत ने लिखा है, “मुझे भरोसा है कि मैं जो कुछ कह रहा हूं, यही बीजेपी के और दूसरे लोग मानते हैं, लेकिन डर की वजह से ऐसा कहेंगे नहीं।”
इकोनॉमी में सुधार नहीं कर पाए जेटली
– यशवंत सिन्हा ने लिखा कि अरुण जेटली उदारीकरण (liberalisation) के बाद के वित्त मंत्रियों में सबसे लकी हैं, लेकिन इसके बाद भी वे देश की इकोनॉमी में कोई सुधार नहीं कर पाए हैं।
लोगों को गरीबी पास से दिखाएंगे जेटली
– अपने आर्टिकल के आखिरी में जेटली पर तंज कसते हुए उन्‍होंने लिखा है, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि उन्‍होंने बेहद करीब से गरीबी देखी है। ऐसा लगता है कि उनके वित्त मंत्री भी ओवरटाइम काम कर यह तय करना चाहते हैं कि सभी भारतीयों को भी बेहद करीब से इस तरह का अनुभव होना चाहिए।”
– सिन्हा ने लिखा है कि जीडीपी अभी 5.7 है, सभी को याद रखना चाहिए कि सरकार ने 2015 में जीडीपी तय करने के तरीके को बदला था। अगर पुराने नियमों के हिसाब से देखें तो आज जीडीपी 3.7 होनी थी।
– बता दें कि पिछले महीने जारी पहली तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक जीडीपी रेट गिरकर 5.7% रह गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7.6% था।
अमरिंदर ने हराया था जेटली को
– 2014 के लोकसभा चुनाव में अरुण जेटली अमृतसर से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे। अमरिंदर सिंह ने उन्हें करीब 90 हजार वोटों से हाराया था।
स्वामी भी कह चुके बर्बाद हो जाएगी इकोनॉमी
– इससे पहले बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी भी देश की गिरती इकोनॉमी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साध चुके हैं।
– एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “आज इकोनॉमी में गिरावट काबू में नहीं है। ये क्रैश हो सकती है। इकोनॉमी में सुधारने के लिए हमें कई अच्छी चीजें करनी होंगी। अगर कुछ नहीं किया गया, तो यह कमजोर होती चली जाएगी और बैंक बर्बाद हो सकते हैं, फैक्ट्रियां बंद होनी शुरू हो सकती हैं।”

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