छोटा शकील ने उड़ाया मोदी सरकार का मजाक, कहा- दाऊद को पकड़ना हलवा है क्या

नई दिल्ली: अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को भारत सरकार द्वारा वापस लाने की कोशिशों से जुड़े बयानों का डॉन के राइट हैंड छोटा शकील ने मजाक उड़ाया है। शकील ने एक अंग्रेजी अखबार से फोन पर बातचीत में कहा, ”हर बार जब नई सरकार आती है, वह पहला बयान हमारे बारे में देती है। उसको लेके आएंगे, घुसकर लेके आएंगे। क्या हलवा है? बकरी का बच्चा समझ कर रखा है क्या? लाना है तो उसको लाओ न।” ‘उसको’ से यहां छोटा शकील का मतलब गैंगस्टर छोटा राजन से था। शकील ने अपने दुश्मन छोटा राजन को ऑस्ट्रेलिया में ठिकाने लगाने की कोशिश की खबरों पर कहा, ”हम पहुंच ही गए थे, लेकिन वह चूहे की तरह भाग निकला।” बता दें कि आम चुनाव के वक्त पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि दाऊद को वापस लाने जैसे ऑपरेशन प्रेस रिलीज जारी करके नहीं किए जाते। अमेरिका ने पाकिस्तान में लादेन के खिलाफ कार्रवाई प्रेस रिलीज जारी करके नहीं की थी।
दाऊद की हत्या की कोशिशों की खबरों पर भड़का शकील
पिछले साल 16 सितंबर को शकील की बेटी जोया की शादी पर पहुंचने के दौरान दाऊद को ठिकाने लगाने की कोशिशों की खबरों से जुड़े सवाल पर शकील नाराज हो गया। शकील ने कहा, ”सवाल वो करो जिसका जवाब मैं दूं आपको। वो न करो जिसका जवाब न दूं। आज तक जितनी भी ऐसी जानकारियां आई हैं, एजेंसियां भी जानती हैं कि महज ख्याली पुलाव हैं। सपने देखते हैं, इनका सपना कभी पूरा नहीं होगा।”
राजन के ‘हिंदू डॉन’ छवि से नाराज शकील
शकील ने आरोप लगाया कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां आपराधिक गैंगों को लेकर भेदभाव बरतती हैं। शकील ने कहा कि ऐसी खबरें कब आईं कि भारत छोटा शकील को वापस लाने की कोशिश कर रहा है? जब एजेंसियों को पता था कि मैं उसके खिलाफ साजिश रच रहा हूं और वो कहां है तो उन्होंने उसे पकड़ा क्यों नहीं? क्या उसने लोगों को नहीं मारा? क्या वह अपराधी नहीं है? राजन के कथित ‘हिंदू डॉन’ छवि पर छोटा शकील भड़क गया। उसने कहा, ”यह मीडिया का काम है। पैट्रियॉट (देशभक्त) है तो आर्मी में ले लो न। बॉर्डर पर भेजो न। मुल्क के लिए काम करेगा। हिंदू डॉन का कॉन्सेप्ट आप लोगों का है। मीडिया का है। उसने पैसों के लिए बहुत सारे हिंदुओं को मारा है।”
भारत नहीं लौटना चाहता डॉन
दाऊद और छोटा शकील अब भारत वापस नहीं लौटना चाहते। शकील के मुताबिक, 1993 में हुए मुंबई बम धमाकों के बाद दोनों वापस लौटना चाहते थे, लेकिन भारत सरकार ने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया। शकील ने कहा, ”जब हम 1993 में वापस लौटना चाहते थे, तो तुम लोगों और तुम्हारी सरकार ने इसकी मंजूरी नहीं दी। भाई ने भी उस वक्त राम जेठमलानी से लंदन में बात की थी। बात हो गई थी। लेकिन तुम्हारे मंत्रालय, उस आडवाणी ने गेम खेला।” हालांकि, आडवाणी ने क्या किया और जेठमलानी से कब बात हुई, इस बारे में शकील ने कुछ नहीं कहा।
ठिकाने बदलता रहता है दाऊद
1. दिसंबर में कराची में था दाऊद
मीडिया में दिसंबर में आई खबरों के मुताबिक इंडिया का मोस्ट वांटेड टेररिस्ट दाऊद इब्राहिम दिसंबर 2014 से पहले अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर छुपा हुआ था। लेकिन दिसंबर में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उसे सीमा इलाके से निकालकर कराची ले आई। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पाकिस्तानी सेना ने दिसंबर में तहरीक-ए-तालिबान के खिलाफ अभियान तेज कर दिया था। आईएसआई दाऊद इब्राहिम को थाईलैंड, नैरोबी, यूएई या बांग्लादेश में से किसी एक जगह छुपाना चाहती थी। लेकिन बताया गया कि भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ दाऊद पर पैनी नजर बनाए हुए थी। इसलिए दाऊद को कराची के क्लिफ्टन इलाके के एक बंगले और अत्यधिक सुरक्षित तंजीम डिफेंस हाउसिंग सोसायटी के एक बंगले में से किसी एक में पनाह दी गई। दाऊद कराची से रियल एस्टेट का अपना कारोबार चला रहा था। फरवरी में एक और ऑडियो टेप सामने आया जिसमें पुष्टि हुई कि दाऊद कराची में ही था। हालांकि, पाकिस्तान ने कभी इस बात को नहीं माना।
2. मई में अफगान-पाक बॉर्डर पर पहुंच गया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जून में रॉ ने पाकिस्तान के अंदर पांच-छह ठिकानों की पहचान कर उसकी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी थी जहां दाऊद इब्राहिम छिपा हो सकता है। खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया था कि मई में दाऊद कराची से फिर अफगानिस्तान-पाकिस्तान की बॉर्डर पर चला गया। अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई दाऊद को किसी भी एक ठिकाने पर एक महीने से ज्यादा नहीं रहने दे रही। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी इसकी पुष्टि कर चुकी हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक दाऊद पाकिस्तान से बाहर लगातार ट्रेवल कर रहा है। वह अधिकतर सेंट्रल एशियाई देशों में जा रहा है। भारत ने 2012 में दाऊद के सारे डिटेल्स और उसका पाकिस्तानी पासपोर्ट होने के सबूत सौंपे थे। मई में भी केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद को बताया था कि दाऊद के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी है। इसके बावजदू पाकिस्तान कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
क्या रॉ ने की थी दाऊद के खात्मे की कोशिश?
रॉ ने दाऊद को 2013 में कराची में ही खत्म करने की कोशिश की थी। दिसंबर 2014 में एक भारतीय चैनल ने इसका दावा किया था। चैनल ने सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि रॉ ने 2013 में 9 एजेंट चुने और उन्हें कमांडो ट्रेनिंग दी। इन एजेंट्स को सूडान, बांग्लादेश और नेपाल के पासपोर्ट दिए गए। इसके बाद इन कमांडो ने पाकिस्तान में प्रवेश किया। रॉ ने दाऊद को खत्म करने के इस अभियान के लिए इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद की भी मदद मांगी। अभियान को अंजाम देने के लिए 13 सितंबर 2013 की तारीख चुनी गई। दाऊद हर दिन क्लिफ्टन रोड से डिफेंस सोसायटी के घर जाता था। 13 सितंबर को रॉ के 9 एजेंट बीच रास्ते में पोजिशन ले चुके थे। दाऊद जिस कार से आवाजाही करता था, उसका वीडियो भी बना लिया गया था। लेकिन भारतीय चैनल ने दावा किया कि ऐन वक्त पर रॉ के एजेंट्स को भारत से किसी का फोन आया और इस ऑपरेशन को रद्द करना पड़ा।