जापान में 6.3 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी नहीं

टोक्यो. जापान में 6.3 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप का केंद्र बोनिन द्वीप के पास 474 किलोमीटर गहराई में था। अभी नुकसान की कोई खबर नहीं है। इसी साल 30 मई को भी जापान में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। तब रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7.8 आंकी गई थी। उस दौरान जापान से हजारों किलोमीटर दूर भारत की राजधानी दिल्ली में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे।
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती है। हलचल के बाद भूकंप आता है।
जापान : साल में जितने दिन, उससे ज्यादा भूकंप के झटके, क्या है वजह?
जापान भूकंप के सबसे ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र में है। जापान पेसिफिक रिंग ऑफ फायर के क्षेत्र में आता है। यानी ऐसा इलाका जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स हैं। इस रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर जापान, अलास्का और उत्तर व साउथ अमेरिका तक जाता है। इस वजह से जापान में भूकंप ज्यादा आते हैं और ज्वालामुखी फटते हैं। करीब 15 देश इस रिंग ऑफ फायर की जद में हैं।
2011 में हुई थीं 16 हजार मौतें
जापान में मार्च 2011 में 9 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप के कारण जबर्दस्ती सुनामी उठी थी। 10 मीटर ऊंची लहरों ने कई शहर तबाह कर दिए थे। 16 हजार लोगों की मौत हुई थी।
कितनी तबाही लाता है भूकंप
रिक्टर स्केल असर
0 से 1.9 सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है।
2 से 2.9 हल्का कंपन।
3 से 3.9 कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर।
4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं। दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है।
6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
7 से 7.9 इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
8 से 8.9 इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं।
9 और उससे ज्यादा पूरी तबाही। कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।
भूकंप में रिक्टर पैमाने का हर स्केल पिछले स्केल के मुकाबले 10 गुना ज्यादा ताकतवर होता है।
रिंग ऑफ फायर
रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स भी हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और ज्वालामुखी फटते हैं। इस रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर जापान, अलास्का और उत्तर व साउथ अमेरिका तक देखा जा सकता है। दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में आते हैं। यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने सक्रिय ज्वालामुखी हैं, उनमें से 75% इसी क्षेत्र में हैं। 15 देश इस रिंग ऑफ फायर की जद में हैं।
कितने देशों में है रिंग ऑफ फायर का असर?
जापान, रूस, फिलिपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मैक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली, बोलिविया।