जिनपिंग से मिले मोदी, एनएसजी पर भारत के विरोध में 6 देश

नई दिल्ली/ताशकंद/सियोल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बावजूद भारत की एनएसजी (परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह) सदस्यता पर सहमति नहीं बन सकी। दोनों नेता गुरुवार को ताशकंद में मिले। इससे उम्मीद बंधी थी कि एनएसजी में भारत की सदस्यता से बाधा दूर हो गई। उधर, सियोल में जापान ने भारत की सदस्यता का मुद्दा उठाया। लेकिन चीन ने विरोध किया। देर रात डिनर के बाद हुई चर्चा में भी कोई फैसला नहीं हो सका।
इससे पहले ब्राजील भी भारत की सदस्यता के विरोध में आ गया। चीन के अलावा ब्राजील, तुर्की, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया और द. अफ्रीका भी विरोध करने वालों में शामिल हैं। पाक को एनएसजी की सदस्यता देने पर तो विचार ही नहीं हुआ। अब शुक्रवार को पूर्ण बैठक में फिर से चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, चीन ने कहा है कि एनएसजी में विरोध के कारण भारत के साथ उसके द्विपक्षीय रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
मोदी और जिनपिंग गुरुवार को ही शंघाई सहयोग परिषद (एससीओ) की बैठक में शामिल होने ताशकंद पहुंचे हैं। बैठक के दौरान इस संगठन में भारत को सदस्यता दी गई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने बताया कि जिनपिंग ने एससीओ में भारत की सदस्यता का स्वागत किया। कहा कि इससे संगठन को मजबूती मिलेगी। मोदी ने इसके लिए चीनी राष्ट्रपति को धन्यवाद दिया। इसके बाद दोनों नेताओं ने एनएसजी में भारत की सदस्यता के आवेदन के मसले पर करीब 50 मिनट बातचीत की। उन्होंने जिनपिंग से कहा कि एनएसजी में भारत के आवेदन पर चीन निष्पक्ष ढंग से और गुण-दोष के आधार पर समर्थन दे। हालांकि इस अपील का चीन पर कोई असर हुडा या नहीं, यह शुक्रवार को एनएसजी की प्रमुख बैठक में साफ हो सकेगा।