जेडीएस के कुछ विधायकों ने कुमारस्वामी से कहा- अब भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन देना चाहिए

बेंगलुरु. कर्नाटक में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बीएस येदियुरप्पा 29 जुलाई को बहुमत साबित करेंगे। कुमारस्वामी की कांग्रेस-जेडीएस सरकार गिरने के बाद येदियुरप्पा ने शुक्रवार को शपथ ली। विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से पहले जेडीएस के विधायक दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन देने की मांग की है। 23 जुलाई को कुमारस्वामी का विश्वास मत प्रस्ताव 99 वोट के साथ गिर गया था।

पूर्व मंत्री और जेडीएस नेता जीटी देवगौड़ा ने शुक्रवार को विधायक दल की बैठक के बाद कहा कि हम सभी ने पार्टी के साथ रहने का फैसला किया है। हालांकि, कुछ जेडीएस विधायकों का सुझाव है कि भाजपा सरकार को बाहर से समर्थन दिया जाए। जबकि कुछ विधायकों ने विपक्ष की भूमिका में रहने और पार्टी को मजबूत करने की सलाह दी है।

अयोग्य घोषित विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

वहीं, कांग्रेस के बागी विधायक रमेश एल जारकिहोली, महेश कुमाथल्ली और निर्दलीय विधायक आर शंकर ने स्पीकर रमेश कुमार द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। रमेश कुमार ने तीनों बागी विधायकों को गुरुवार को अयोग्य घोषित कर दिया था। साथ ही उनके उपचुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई थी।

2023 तक बागी विधायकों की सदस्यता खत्म

बागी विधायकों को संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2 (1) (ए) और भारत के संविधान के 191 (ए) के तहत विधानसभा के सदस्यों के रूप में अयोग्य ठहराया गया। विधानसभा स्पीकर ने कहा कि 23 मई 2023 तक उनकी सदस्यता खत्म रहेगी। तीनों विधायकों आर शंकर (रानीबेनूर), रमेश जारकिहोली (गोकक) और महेश कुमथल्ली (अथानी) को संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के तहत अयोग्य ठहराया है।

कानून सभी के लिए बराबर: स्पीकर
स्पीकर रमेश कुमार ने कहा था, ‘‘मैं इस मामले में किसी फैसले पर पहुंचने के लिए विवेक का इस्तेमाल करूंगा ताकि सुप्रीम कोर्ट ने मुझ पर जो भरोसा दिखाया है, वह कायम रहे। बागी विधायकों के मेरे पास आने की समयसीमा खत्म हो चुकी थी। कानून सभी के लिए बराबर है। फिर वो मजदूर हो या फिर देश का राष्ट्रपति।’’