टल सकती है याकूब की फांसी, सुप्रीम कोर्ट ने लॉर्जर बेंच को ट्रांसफर की पिटीशन

नागपुर. 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन की फांसी टल सकती है। डेथ वॉरंट को गैरकानूनी बताते हुए याकूब की ओर से पिटीशन दायर की गई थी। इस पर मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई तो पिटीशन को लेकर दो जजों के विचार अलग-अलग रहे। इस वजह से पिटीशन लॉर्जर बेंच को भेज दी गई है। बता दें कि नागपुर जेल में बंद याकूब की फांसी की तारीख 30 जुलाई तय की गई है।
क्या है याकूब की पिटीशन में
याकूब ने सुप्रीम कोर्ट में जो पिटीशन दायर की है उसमें कहा गया है कि उसे फांसी नहीं दी जा सकती, क्योंकि टाडा कोर्ट का डेथ वारंट गैर-कानूनी है। याकूब का कहना है कि 9 अप्रैल को रिव्यू पिटीशन कैंसल होने के बाद डेथ वारंट जारी किया गया जबकि उस वक्त क्यूरेटिव पिटीशन सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग थी। एक दूसरे मामले में याक़ूब की फांसी पर रोक के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने भी सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की है। दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने याकूब का डेथ वारंट जारी कर दिया है, जिसके लिए 30 जुलाई का दिन तय किया गया है।
फांसी हुई तो नागपुर जेल में ही दफनाया जाएगा
सूत्रों के अनुसार, अगर याकूब मेमन को फांसी दी जाती है तो उसे नागपुर के सेंट्रल जेल में ही दफनाया जा सकता है। हालांकि पहले इस तरह की खबरें थीं कि फांसी के बाद याकूब की डेड बॉडी उसकी फैमिली को दी जा सकती है। अब जानकारी मिल रही है कि नागपुर जेल एडमिनिस्ट्रेशन उसको जेल में ही दफनाने की तैयारी कर रही हैं। इसके पीछे वजह यह है कि एडमिनिस्ट्रेशन यह नहीं चाहती कि याकूब को फांसी के बाद किसी तरह की लॉ एंड ऑर्डर की दिक्कतें आएं।

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