ट्रम्प-नेतन्याहू से मोदी की मुलाकात में 5 बातें कॉमन, इजरायल दौरे से क्या मिला?

नई दिल्ली/तेल अवीव/वॉशिंगटन.नरेंद्र मोदी का 3 दिन का इजरायल दौरा पूरा हो गया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच 7 करार हुए लेकिन डिफेंस और काउंटर टेररिज्म पर ऐसा कोई एलान नहीं हुआ, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा हो। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत को इजरायल दौरे से क्या मिला? tatparpatrika.com ने इस सवाल का जवाब Expert से मांगा। मोदी इजरायल से पहले यूएस दौरे पर गए थे। ट्रम्प और नेतन्याहू दोनों ही लीडर्स ने मोदी का शानदार स्वागत किया और मोदी को अपना दोस्त बताया। मोदी की इन विजिट्स में कई ऐसी बातें हैं, जो कॉमन हैं।
ट्रम्प-नेतन्याहू से मुलाकात की 5 कॉमन बातें…
1) गर्मजोशी से स्वागत
US – डोनाल्ड ट्रम्प और मिलेनिया ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर मोदी का इंतजार किया और जब मोदी आए तो ट्रम्प ने बड़ी ही गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। मोदी ने भी ट्रम्प और मिलेनिया का हालचाल लिया। मोदी ने ज्वाइंट स्टेटमेंट में इस वेलकम के लिए ट्रम्प और उनके परिवार का धन्यवाद दिया।
इजरायल – मोदी के स्वागत के लिए पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने 5 प्रोटोकॉल तोड़े। सबसे पहला ये कि वो उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट तक आए। मोदी के साथ उन्होंने दो डिनर और दो लंच किए। 18 प्रोग्राम्स में से 12 में नेतन्याहू मोदी के साथ रहे।
2) दोस्ती
US –
डोनाल्ड ट्रम्प ने मोदी के यूएस पहुंचने से पहले ट्वीट किया और उन्हें सच्चा दोस्त बताया। ज्वाइंट स्टेटमेेंट में भी ट्रम्प ने ऐसा ही कहा।
इजरायल – नेतन्याहू ने अपनी स्पीच में हाथ जोड़कर हिंदी में कहा- स्वागत है मेरे दोस्त।
3) गले मिले
US –
मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प अपने ज्वाइंट स्टेटमेंट के दौरान 2 बार गले िमले।
इजरायल –मोदी का स्वागत करने नेतन्याहू तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे, यहां 18 मिनट के प्रोग्राम में दोनों लीडर्स 3 बार गले मिले।
4) मोदी की तारीफ
US –
ट्रम्प ने अपनी स्पीच के दौरान मोदी की 5 बार तारीफ की और उन्हें दुनिया का एक महान लीडर बताया।
इजरायल – नेतन्याहू ने अपनी स्पीच में मोदी से मुलाकात पर कहा कि ये एक महान दिन था। मेरे दोस्त मोदी हिस्ट्री बना रहे हैं।
5) मोदी ने न्योता दिया
US –
अमेरिका में मोदी ने अपने स्टेटमेंट के दौरान ट्रम्प और उनके परिवार को भारत आने का न्योता दिया। उन्होंने ट्रम्प की बेटी इंवाका को भी भारत आने का न्योता दिया। इंवाका ने मोदी का न्योता कुबूल कर लिया।
इजरायल – नरेंद्र मोदी ने अपनी स्पीच के दौरान नेतन्याहू और उनकी फैमिली को भारत आने का न्योता दिया। उसी वक्त इजरायल के पीएम ने ये न्योता मंजूर कर लिया।
1) 7 मुद्दों पर करार हुए, पर डिफेंस में कोई बड़ा एलान नहीं हुआ?
– भारत-इजरायल के बीच इंडस्ट्रियल रिसर्च एंड डेवलपमेंट, वाॅटर कन्जरवेशन, भारत में स्टेट वाॅटर यूटिलिटी रिफॉर्म, एग्रीकल्चर, एटॉमिक क्लॉक्स, जीईओ-एलईओ ऑप्टिकल लिंक में कोऑपरेशन और स्पेस सेक्टर में 7 अहम करार हुए। दोनों देशों ने ज्वाइंट इनोवेशन के लिए 40 मिलियन डॉलर करीब 25.91 अरब रुपए का रिसर्च एंड डेवलपमेंट फंड बनाने की बात कही।
EXPERT: इजरायल दौरे पर एडवर्टाइजिंग डिप्लोमैसी को तरजीह दी गई है। इजराइल ने बड़ा गेम खेला है। उसकी चीन के साथ स्ट्रैटजिक और डिफेंस पार्टनरशिप है। वह भारत और चीन दोनों को खुश रखना चाहता है। डिफेंस पर समझौते होते तो चीन नाराज हो सकता था।
2) क्या इस दौरे से पॉलिटिकल या इकोनॉमिक मैसेज गया?
– जिस येरुशलम पर फिलिस्तीनी दावा करते हैं, मोदी अपनी तीन दिनों की यात्रा के दौरान वहीं ठहरे। केवल भारतीय कम्युनिटी से मिलने के लिए तेल अवीव गए। इस दौरे का पॉलिटिकल मैसेज साफ है। पहले की सरकारों की तरह मौजूदा गवर्नमेंट को इजराइल के साथ रिश्ते बढ़ाने में कोई परेशानी नहीं है।
EXPERT: इकोनॉमिक नहीं, लेकिन पॉलिटिकल मैसेज गया। इजरायल बहुत बड़ी इकोनॉमी है ही नहीं। पॉलिटिकल मैसेज के दो एंगल हैं। पहला यह कि हमारी पॉलिटकल टेंडेंसी इस्लामिक नेशंस को बैलेंस करने की रही है। माेदी ने एग्रेसिव नेशनलिज्म (अक्रामक राष्ट्रवाद) को आगे रखते हुए कड़ा मैसेज देने की कोशिश की है। इजरायल डिवाइन आइडियोलॉजी को मानता है। उसने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते स्वर्ग में तय हुए। इसका मैसेज गया कि दोनों देश एक ही आइडियोलॉजी से आगे बढ़ेंगे।
3) क्या पाक के खिलाफ हमारी डिप्लोमैसी इससे मजबूत होगी?
– पाकिस्तान के सिक्युरिटी एनालिस्ट ब्रिगेडियर गजनफर अली ने कहा, “हिंदू राष्ट्रवाद और यहूदी राष्ट्रवाद में काफी समानताएं हैं। इंडिया और इजरायल के बीच सिक्युरिटी इंट्रेस्ट पर बात होने का मतलब है कि पाकिस्तान को इजरायल के साथ सिक्युरिटी कॉपरेशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। क्योंकि, ये सीधे-सीधे इस्लामाबाद के इंट्रेस्ट को प्रभावित करेगा।”
EXPERT: ऊपरी तौर पर तो सभी कह रहे हैं, लेकिन दोनों पीएम ने जो साझा बयान दिया, उसमें पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। ऐसा क्यों? हम पड़ोसी कहते हैं, नाम क्यों नहीं लेते। इस तरह हम कैसे कह सकते हैं कि इस दौरे से पाक के खिलाफ डिप्लोमैसी मजबूत होगी?
4) क्या वाकई ये पॉलिटिकल शो साबित हुआ?
– यहूदी-इंडियन कम्युनिटी के रिसर्चर इलिजाय दांडेकर ने कहा, “मोदी की गले लगाने की डिप्लोमैसी को नेतन्याहू ने कुबूल किया। ये काफी गर्माहट भरा था, जैसे दो पुराने दोस्त कई साल बाद मिल रहे हों।”
– कांग्रेस लीडर अजय माकन का कहना है, “मोदी ने पिछले 3 साल में 64 विजिट की हैं। देश के लिए वास्तव में कुछ मजबूती हासिल करने की बजाय, वे यहां की जनता का ख्याल वे केवल टेलिविजन शो के जरिए रखते हैं। ये केवल वक्त ही बता सकता है कि उनकी ये 65th विजिट भारत को कैसे फायदा पहुंचाएगी। उनकी पिछली यात्राओं से भारत को कुछ हासिल नहीं हुआ है।”
EXPERT: शो और पॉलिटिकल रिश्तों में अंतर होता है। शो का इफेक्ट तुरंत नजर आता है। पॉलिटिकल रिश्ते लंबे समय के लिए होते हैं। इसे पॉलिटिकल शो नहीं कह सकते, लेकिन इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इस दौरे में कोई शो नहीं था। यह शो और पॉलिटिकल रिश्तों की मिक्स प्रेजेंटेशन थी।
5) क्या टाइमिंग सही थी?
– मोदी 2014 में बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आए। इजरायल उनकी यात्राओं के दौरान पहले आया है, ये कदम अल्पसंख्यकों में मोदी की निगेटिव मैसेज भेजेगा, खासतौर से मुस्लिमों में। उनका ये कदम उनके एंटी मुस्लिम टैग पर मुहर लगा देगा, क्योंकि फिलिस्तीन से जुड़े ऐतिहासिक कारणों के चलते इजरायल को एक एंटी मुस्लिम नेशन माना जाता है।
EXPERT: टाइमिंग सही हो सकती थी, अगर डिफेंस डील किसी नतीजे तक पहुंचती। चीन इस वक्त हमें लगातार हिट कर रहा है। पाकिस्तान और रूस उसके साथ खड़े हैं। ऐसे में इजरायल को लेकर साफ स्ट्रैटजी बनाते तो ये टाइमिंग सही होती।
5) भारत की छवि प्रो अरब रही है, इजरायल से बढ़ती नजदीकियों का क्या असर होगा?
– मोदी के दौरे से पहले भारत की छवि प्रो-अरब रही है और वो अब तक इजरायल के साथ रिश्तों को कम तरजीह देता आया है। भारत अब तक ऐसा अरब देशों के साथ अपने फायदेमंद रिश्तों के चलते करता रहा है।
EXPERT: मुझे लगता है कि भारत को चैलेंजेस का सामना करना पड़ सकता है। इनमें सबसे पहला इकोनॉमिक चैलेंज है, क्योंकि अरब मंे भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा रोजगार से जुड़ा है। अगर अरब नेशंस इस नजदीकी को गंभीरता से लेते हैं तो मुश्किल होगी। अरब देशों से भारत में रियल एस्टेट से लेकर दूसरे सेक्टर्स में इन्वेस्टमेंट की संभावनाएं हैं। हमें इसमें नुकसान पहुंच सकता है। अरब का झुकाव पाक की तरफ बढ़ रहा है। भारत-इजरायल करीब आए तो यह झुकाव बढ़ सकता है।

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