“ड्रग्स एण्ड काँस्मेटिक रूल्स, 1945” में संशोधन प्रक्रिया केन्द्र सरकार की उदासीनता से धीमी।

विजय कुमार जैन राघौगढ़ म.प्र.। हम जिन अंग्रेजी दवाओं का सेवन करते है जिन सौंदर्य प्रसाधनों का प्रतिदिन उपयोग करते है वह पूर्णतय: शाकाहारी सामग्री से निर्मित है या उनमें मांसाहारी सामग्री का उपयोग किया गया है। इससे अनभिज्ञ है।अंग्रेजी लगभग सभी दवाओं में मांसाहार का उपयोग किया जा रहा है। भारत में आजादी के पूर्व अंग्रेजों ने जो “ड्रग्स एण्ड काँस्मेटिक रूल्स 1945” बनाया था, वही रूल्स आज तक चल रहा है। लगभग 75 वर्ष से यही नियम चल रहा है। इस में नियम संशोधन की प्रक्रिया इतनी शिथिल है कि भारत सरकार भी यह बताने की स्थिति में नहीं है कि संशोधन कब तक पूर्ण हो जायेंगे।

भारत सरकार के डायरेक्टर जनरल – हेल्थ सर्विसेस, सेन्ट्रल ड्रग्स स्टेण्डर्ड आर्गेनाइजेशन (CDSCO) में आरटीआई सेल के असिस्टेंट ड्रग्स कन्ट्रोलर आई एण्ड सीपीआईओ ने आरटीआई एक्ट -2005 के संबंध में अपने पत्र क्रमांक -z- 28020/635/2020 सीडी में दिनांक 28/10/2020 को सूचना प्रदत्त की है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि ड्रग्स एण्ड काँस्मेटिक रूल्स,1945 में संशोधन करने साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट तथा अन्य सभी प्रकार के सौंदर्य व प्रसाधन सामग्रियों पर मांसाहार युक्त सामग्री होने पर “लाल/भूरे रंग” से एवं से एवं शाकाहार युक्त सामग्री होने पर “हरे रंग” से प्रत्येक पैकेट पर डाँट रूप चिन्ह बनाया जाना विचाराधीन है।

इस कार्य को मूर्त रूप देने के लिये ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) की 79 वीं मीटिंग विगत 16 मई,2018 को सम्पन्न हो चुकी है। उक्त बोर्ड की मीटिंग में साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट तथा अन्य सभी प्रकार की सौंदर्य प्रसाधन के पैकेट पर एजेण्डा क्रमांक 8 के अनुसार “शाकाहार सामग्रियों” से निर्मित होने पर “हरे रंग” (Green Colour) से और मांसाहार सामग्रियों से निर्मित होने पर “भूरे/लाल रंग”(Red/Brown Colour) से डाँट रूपी चिन्हों को अनिवार्यतः बनाया जाना स्वीकृत किया था। यह जानकारी CDSCO की बेवसाइट www.cdsco.gov.in पर भी उपलब्ध है।

“ड्रग्स एण्ड काँस्मेटिक रूल्स, 1945” में एतद् विषयक संशोधन हेतु ड्राफ्ट नोटिफिकेशन हेतु तैयार होने के बावजूद शिथिल गति पूर्वक प्रक्रिया होने से वह अभी तक विलंबित  ही है। जबकि डीटीएबी की 79 वीं मीटिंग को सम्पन्न हुए अब तक 2 वर्ष 6 माह से भी अधिक समय व्यतीत हो चुका है। खेद का विषय है कि दीर्घ कालावधि व्यतीत हो जाने के बाद भी अभी तक संशोधन प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी है।

जैनाचार्य विद्या सागर जी महाराज के परम प्रभावक सुयोग्य शिष्य मुनि अभय सागर जी महाराज आरोंन जिला गुना में ससंघ विराजमान है। प्रस्तावित संशोधन में हो रहे विलंब पर मुनि अभय सागर जी महाराज का कहना है सौंदर्य व प्रसाधन सामग्रियों का उपयोग देश भर के प्रत्येक उपभोक्ता प्राय:कर प्रतिदिन ही साबुन, शैम्पू व टूथपेस्ट आदि वस्तुओं के रूप में करते हैं। भूरे/लाल अथवा हरे रंग वाले चिन्ह पैकेट पर नहीं होने से ऐसी वस्तुओं में प्रयुक्त मांसाहार सामग्रियों के होने/ पाये जाने की सूचना मिलने पर उन्हें अत्यधिक मानसिक त्रास/कष्ट झेलना पड़ता है। आपका कहना है उक्त लंबित संशोधन होकर अधिसूचना जारी हो जाने से पैकेट के ऊपर मांसाहार तथा शाकाहार पदार्थों के ऊपर बनाये जाने बाले चिन्हों को देखकर उपयोग करने पर उपभोक्ताओं को होने वाले मानसिक परिताप से छुटकारा मिल सकेगा।

“भारतीय शरीर भारतीय चिकित्सा” अभियान को लगभग चालीस वर्षों से चला रहे डाँ नरेन्द्र जैन भोपाल का कहना है अंग्रेजी दवाओं एवं मांसाहार सामग्रियों से निर्मित सौंदर्य प्रसाधन वस्तुएं अंग्रेजों की देन हैं। अंग्रेजी दवाओं के सेवन से एक बीमारी ठीक होकर दो नई बीमारी हमारे शरीर में आ जाती है। अंग्रेजी दवाओं में मांसाहार सामग्रियों का प्रचुर मात्रा में उपयोग होता है। इसीप्रकार काँस्मेटिक्स एवं सौंदर्य प्रसाधनों में भी मांसाहार सामग्रियों का प्रयोग होता है। जिन वस्तुओं का उपयोग हम सौंदर्य में निखार के लिये करते हैं, उनसे हमारे शरीर को जो हानि होती है वह तत्काल नहीं दिखती है। आपका कहना पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर हम स्वास्थ्य रहने अंग्रेजी दवाओं का निरंतर सेवन कर रहे हैं साथ सौंदर्य में निखार के लिये मांसाहार सामग्री से निर्मित सौंदर्य प्रसाधन सामग्रियों का प्रतिदिन उपयोग कर अनेक बीमारियों को जन्म दे रहे है।

“ड्रग्स एण्ड काँस्मेटिक रूल्स 1945” में संशोधन को लागू कर अधिसूचना जारी करने में विलंब से यह आशंका हो रही है कि अन्तर्राष्ट्रीय एवं भारतीय काँस्मेटिक्स उत्पादक कंपनियों के दवाव में भारत सरकार नियम में संशोधन की अधिसूचना जारी करनें अनावश्यक विलंब करके कंपनियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है। शाकाहारी समाज द्वारा संशोधन की अधिसूचना जल्दी जारी कराने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डाँ हर्षवर्धन को ज्ञापन भेजे जा रहे हैं।

नोट:-लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष है।

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