दलित राइटर इलैया ने कहा- पटेल बनते पहले पीएम तो PAK जैसा होता भारत

नई दिल्ली. दलित एक्टिविस्ट और राइटर कांचा इलैया ने देश के पहले होम मिनिस्टर रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है। रविवार को एक प्रोग्राम में इलैया ने कहा, ‘अगर पंडित नेहरू की जगह पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री बनते तो भारत की हालत भी पाकिस्तान जैसी होती और देश खत्म हो जाता।’ बता दें कि सरदार पटेल ही वो नेता थे जिन्होंने आजाद भारत के लिए 500 से ज्यादा रियासतों को एक किया था।
कौन हैं इलैया?
– आंध्र प्रदेश के रहने वाले कांचा इलैया दलितों के लिए लिखते रहे हैं।
– 63 साल के इलैया ‘व्हाय आई एम नॉट ए हिंदू, पोस्ट-हिंदू इंडिया’, ‘ए डिस्क्लोजर इन दलित-बहुजन, सोश्यो स्पिरिच्युअल एंड साइंटिफिक रिवॉल्यूशन’ जैसी किताबें लिख चुके हैं।
– हाल ही में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि मोदी घोषित ओबीसी पीएम हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि वे दलितों के लिए क्या कर रहे हैं?
– इलैया ने कहा था कि पशुओं के बीच असमानता हो रही है। टोटल मिल्क प्रोडक्शन में भैंस 75% दूध देती है। गाय सिर्फ 60% दूध देती है। लेकिन गाय की रक्षा की बात हो रही है और महाराष्ट्र-गुजरात में बड़े पैमाने पर भैंसों को मारा जा रहा है।
इलैया ने रविवार को क्या कहा?
> इलैया ने दिल्ली में ‘टाइम्स लिटफेस्ट’ में कहा, “पटेल पीएम बनते तो भारत भी पाकिस्तान के रास्ते पर ही चलता और हमारी डेमोक्रेसी खत्म हो जाती।”
< “पटेल का नाम इसलिए ज्यादा उभरा क्योंकि 2014 के लोकसभा इलेक्शन में नरेंद्र मोदी ने उनका बार-बार जिक्र किया। मोदी ने कहा कि अगर पटेल पीएम बनते तो भारत आज कुछ और होता। पटेल को ज्यादा ही तवज्जो दी गई।”
> “पटेल नहीं चाहते थे कि बाबा साहेब अंबेडकर संविधान लिखें। पटेल हिंदू महासभा के करीबी थे।”
< “गांधी गाय की पूजा के फेवर में थे और इसे संविधान में शामिल करना चाहते थे लेकिन खुद बकरी का दूध पीते थे। हैरानी इस बात की है कि उन्होंने बकरी की रक्षा की बात क्यों नहीं की?”
> “अंबेडकर का नाम चुनावी राजनीति में फायदा उठाने के लिए किया गया।”

सुधींद्र कुलकर्णी ने भी पटेल पर दिया बयान

इस लिटफेस्ट में बीजेपी के पूर्व नेता सुधींद्र कुलकर्णी भी मौजूद थे। उन्होंने भी पटेल के बारे में बयान दिया।
< कुलकर्णी ने कहा, “पटेल आज की तारीख में ज्यादा यूजफुल नहीं हैं। दरअसल, हमें आयरन मैन की जगह एक ऐसे आदमी की जरूरत है जो सबको साथ लेकर चल सके।”
> “सरकार और संघ परिवार का नेहरू को बदनाम करने का कदम कामयाब नहीं होगा। आजादी की जंग और मॉर्डन इंडिया बनाने में उनके रोल को कभी नकारा नहीं जा सकता।”