दिल्‍ली की एक अदालत ने 1987 में मेरठ के हाशिमपुरा नरसंहार मामले में 16 आरोपियों को बरी किया।

दिल्‍ली की एक अदालत ने 1987 में उत्‍तर प्रदेश में मेरठ के हाशिमपुरा में हुए नरसंहार के सभी 16 ओरोपी पी ए सी कर्मियों को बरी कर दिया है। इन पर एक अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के 42 लोगों की हत्‍या का आरोप था।

1987 में मेरठ में हुए दंगों के दौरान हाशिमपुरा की हत्‍याओं के मामलों में 19 पीएसी जवानों पर मुकदमा चलाया गया था। इनमें से तीन की मुकदमें के दौरान ही मौत हो गई थी और बाकी 16 जमानत पर बाहर थे। इन जवानों पर तलाशी अभियान के दौरान एक ही समुदाय के 42 व्‍यक्तियों को अगवा करने और फिर उनकी हत्‍या करने का आरोप था। मामले में गाजियाबाद के सीजीएम के सामने 1996 में जार्जशीट पेश की गई थी। फिर मारे गये लोगों के परिजनों द्वारा दाखिल एक याचिका को स्‍वीकार करते हुए उच्‍चतम न्‍यायालय ने मामले को दिल्‍ली की अदालत में स्‍थानांतरित कर दिया था। जुलाई 2006 में दिल्‍ली की अदालत में अभियुक्‍तों पर हत्‍या, हत्‍या के प्रयास, सबूतों से छेड़-छाड़ और लोगों के विरूद्ध षडयंत्र रचने का मुकदमा चलाया गया था जिसमें संदेह का लाभ लेते हुए अदालत ने आज सभी अभियुक्‍तों को बरी कर दिया।